Divya Prerna Prakash Book in Hindi Pdf Download & Book Summary

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नमस्कार मेरे प्यारे भाईयो और बहनों आप सभी का नॉलेज ग्रो हिंदी ब्लॉग पर स्वागत है. दोस्तों क्या आप Divya Prerna Prakash Book Pdf Free Download करना चाहते है? तो आप सही जगह पर आये हुए है.

दोस्तों आज के इस इंट्रेस्टिंग आर्टिकल को अंत तक जरुर पढ़िए क्यूंकि, में आज आपके साथ दिव्य प्रेरणा प्रकाश pdf डाउनलोड करने के लिए शेयर करने वाला हु, और उसके साथ ही दिव्य प्रेरणा प्रकाश बुक इन हिंदी समरी भी शेयर करने वाला हु.

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दोस्तो दिव्य प्रेरणा प्रकाश किताब हर युवा को पढ़ना चाहिए, क्योंकि इस किताब में जीवन को किस प्रकार जिया जाएं यह बताया गया है। और यह किताब स्त्री पुरुष, गृहस्थी, विद्यार्थीं सभी केलिए अनुपम सामग्री है। दोस्तो इस किताब में बताया गया है कि सामान्य जीवन को किस प्रकार जिने से यौवन का ओज बना रहता है, और जीवन दिव्य बनता है।

Divya Prerna Prakash Book Summary in Hindi

दोस्तों ब्रह्मचर्य (Celibacy) उन लोगों के लिए बहुत अजीब लगता है, जिन्हें “सं-भो-ग” शक्ति के बारे में जानकारी नहीं है। वी_र्य “सं-भो-ग” शक्ति का ईंधन है और ब्रह्मचर्य को संत रहीम जी ने अपने दोहा में निम्न प्रकार से बताया गया है और इसका एक सुंदर अर्थ है।

रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सुन  | पानी गए न उबरे मोती मानुष चुन |

दोस्तो इसका अर्थ है : –

कृपया पानी बचाकर रखिए, बिना पानी के सब कुछ बेकार है। दोस्तो यहा चूने का मतलब है आटा। आप पानी के बिना रोटी कैसे बना सकते है और मोती की चमक उसकी पहचान है। दोस्तो यहाँ सबसे दिलचस्प बात यह है कि, महान आत्माओं द्वारा मानव जीवन के लिए पानी के अर्थ को एक सुंदर तरीके से बताया गया है।

दोस्तों यहा पानी की तुलना वी_र्य से की गई है, और मनुष्य के शरीर में वी_र्य सबसे महत्वपूर्ण तरल पदार्थ है, और महिला के शरीर में इसे रज कहा जाता है। वी_र्य मानवी शरीर का सार द्रव है। इस प्रकार यदि हम इसकी रक्षा कर लेते हैं और इसे सही जगह पर उपयोग करते हैं, तो हम ब्रह्मचर्य को सार्थक कर पाएंगे |

दोस्तो इसका अर्थ है : –

दोस्तो वी_र्य का महत्व जानना आप सभी का अधिकार है। वी_र्य का शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक स्वास्थ्य से बहुत गहरा संबंध है। दोस्तो हमें भोजन से ऊर्जा मिलती है , रक्त का निर्माण भोजन से होता है और अंत में रक्त से वी_र्य बनता है। दोस्तो यह इतनी आसानी से नहीं बनता है, यह लंबी प्रक्रिया के बाद वी_र्य बनता है। यह बात आचार्य सुश्रुत जी ने छट्ठी शताब्दी में कहा था।

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दोस्तो आचार्य सुश्रुत ने लिखा है : –

रसाद्र्त्रम ततो मांसं मान्सान्मेदः प्रजायते । मेदस्यास्थी ततो मज्जा मज्जयाः शुक्र संभवः

दोस्तो इसका अर्थ है : –

भोजन के पाचन के बाद रस बनता है और रस के पाचन के बाद रक्त बनता है, और यह 5 दिनों के बाद बनाता है और इस तरह, 5 दिनों के अंतराल में, रक्त से मांस, मांस से मेद, मेद से हड्डी, हड्डी से मज्जा, मज्जा से वी_र्य बनता है जो वी_र्य बनने का अंतिम चरण है। इस प्रक्रिया में महिला के शरीर में रज बनाता है और पुरुष के शरीर में वी_र्य बनाता है।

दोस्तो वैज्ञानिक कहते हैं कि वी_र्य को बनने में 30 दिन 4 घंटे लगते हैं और वी_र्य ऑटोमैटिक बनता है, और इसलिए हम इस की किमत को महसूस नहीं कर पा रहे हैं। हमें अब आपको यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि वी_र्य कितना कीमती और मूल्यवान है। आप खुद ही इसका अंदाजा लगा सकते हैं। वी_र्य के हर परमाणु में असीमित ऊर्जा छिपी हुई होती है और कई बहादुर आत्माएं, वैज्ञानिक, योद्धा, लेखक वीर्य की एक बूंद में छिपे हुए थे।

वी_र्य क्या है ?

वी_र्य हमारे शरीर का एक तरह राजा है, ऐसी कई आत्माएं भविष्य में वी_र्य की एक बूंद के साथ पैदा होंगी और यह कल्पना करना असंभव है। कोई भी इस सच को नकार नहीं सकता है। यह सच्चाई पत्थर पर एक लकीर है, जो कभी गायब नहीं हो सकती है। वीर्य शरीर रूपी साम्राज्य का राजा है।

यदि राजा शक्तिशाली हो तो कोई भी दुश्मन साम्राज्य पर आक्रमण नहीं कर सकता। दुश्मन नष्ट हो जाएंगे लेकिन राजा और उसका साम्राज्य हमेशा सुरक्षित रहेगा। हमें इस राजा यानी की अपने वी_र्य को कभी कमजोर नहीं करना चाहिए। अन्यथा, दुश्मन यानी रोगरूपी शत्रु आपके शरीर पर आक्रमण करेंगे और कब्जा कर लेंगे। इसलिए ब्रह्मचर्य आवश्यक है और इसका उच्च शारीरिक मूल्य है।

वी_र्य का उपयोग कहां करें?

दोस्तो प्राचीन भारतीय ऋषि-मुनियों ने बताया है कि वी_र्य का उपयोग सिर्फ संतान प्राप्ति के लिए किया जाता है और यह प्रकृति की व्यवस्था है। ऋषियों-मुनियों ने “सं-भो-ग” को पूरी तरह त्यागने के लिए नहीं कहा है। लेकिन उन्होंने इसे समझदारी से उपयोग करने की सलाह भी दी है ताकि दंपत्ति एक खुशहाल विवाहित जीवन जी सकें। उन्होंने ऐसा क्यों कहा है? क्योंकि वी_र्य की ऊर्जा के बिना आप “सं-भो-ग” का आनंद नहीं ले सकते और “सं-भो-ग” का आनंद सीधे वी_र्य के अपव्यय से संबंधित है।

माली की कहानी

दोस्तों सबसे पहले आपको उस माली की कहानी याद रखनी चाहिए। जिसने कड़ी मेहनत करके एक सुंदर बगीचा बनाया था और वहा कई सुन्दर फूल खिलाए और उस माली ने उन फूलों से सुगंधित इत्र बनाया। दोस्तो इस इत्र के सुगंध पर्यावरण को मंत्रमुग्ध करने ही वाली थी, इससे पहले उस माली ने बिना सोचे समझे उस इत्र को गंदे नाली में फेंक दिया।

अब आप सोचेंगे की वह माली कितना मूर्ख है और कितना पागल है! लेकिन दोस्तो में आपको बताना चाहूंगा कि वह माली हमारे अंदर ही रेहता है। केवल कुछ समय के “से_क्सु_अ_ल” प्लेजर के लिए 30 दिन की कमाई को एक मिनट में बर्बाद करना यह कोई बुद्धिमानी नहीं है।

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दोस्तो शारीरिक “सं-भो-ग” का आनंद लेने से पहले मानव खुद को एक शेर समझ रहा होता है। “सं-भो-ग” के बाद, डरी हुई बिल्ली बन जाता है। क्या यह हमारा अनुभव नहीं है? दोस्तो इस दुनिया में ऐसा कोई भी इंसान ऐसा नहीं है< जिसे “सं-भो-ग” के बाद पछतावा नही हुआ हो। यह सभी का प्रैक्टिकल अनुभव है और कोई प्रमाण की आवश्यकता नहीं है।

क्या इसका कोई समाधान है?

दोस्तो जब कोई इंसान “यौ_न” “उत्ते_ज_ना” से ग्रस्त होता है, तब उसके मन के दो भाग हो जाते है। हमारा चेतन मन “सं-भो-ग” के आनंद को पूरा करने के लिए जोर जोर से कहता रहता है और वही हमारा अवचेतन मन केहता है, कि तुम बहुत पछताओगे। पर अक्सर यही देखा गया है कि इन दोनों के लड़ाई में चेतन मन सफल हो जाता है और इंसान जान बूझकर बार बार जीवन भर क्षणभंगुर आनंद को हासिल करने केलिए अपने बेश कीमती वी_र्य का नाश करता रहता है।

क्या ऐसा कोई आदमी है जो इस दलदल से बच पाया है?

जी, हाँ दोस्तो ऐसे भी लोग हैं, जो इसके पीछे के विज्ञान को जानते है, वे कभी भी इस दलदल में नहीं जाते हैं। इससे पहले, वे खुद को अत्यंत मानसिक शक्ति के साथ बचा लेते हैं और वे हमेशा खुश रहते हैं। वी_र्य ऊर्जा एक प्राकृतिक है और आप इसे दबाकर नहीं रख सकते। जब यह नीचे की ओर बहती है, तो आप “सं-भो-ग” के सिवाय कुछ नहीं सुचता और तब आप कहीं भी खुशी नहीं देखेंगे।

दोस्तो जब यही वी_र्य कि ऊर्जा ऊपर की ओर बेहती है, तो यह एक आश्चर्य जनक कार्य करती है और आप इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। इसे वी_र्य का उर्ध्वगमन कहा जाता है जिसे इंग्लिश में सि_मे_न रिटेंशन भी कहा जाता है और यह ब्रह्मचर्य का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

दोस्तों जो भी भारत के ऋषियों-मुनियों से ब्रह्मचर्य के रहस्य को समझ लेता है, वो दैनिक जीवन को बदल देता है और जीवन जीने की कला सीखता है। इन्द्रिय संयमी लोग सही व्यक्ति के साथ, सही समय पर सही जगह पर वी_र्य कि ऊर्जा का उपयोग करते हैं और वे लोग हमेशा खुशहाल जीवन जीते हैं। वही व्यक्ति उस आनंदमय स्थिति के बारे में बोल सकता है, जिसने ब्रह्मचर्य का पालन करने के बाद इस तरह के आनंद को प्राप्त किया है।

ब्रह्मचर्य क्या है? – What is Celibacy in Hindi

सर्व अवस्थाओ में मन, वचन और कर्म इन तीनों से वा_स_ना यानी से_क्स का सदैव त्याग करना उसे ब्रह्मचर्य कहा जाता है। 

जरूर पढ़िए: 100+ हैरान कर देने वाले ब्रह्मचर्य के फायदे

भगवान वेद व्यास जी ने कहा है।

विषय इन्द्रियों द्वारा प्राप्त होने वाले सुख का सदैव पूर्वक त्याग करना उसे ब्रह्मचर्य कहा जाता हैं।

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दोस्तो भगवान शंकर कहते है।

हे पार्वती, बिंदु अर्थात वी_र्य रक्षण सिद्ध होने के बाद ऐसी कोनसी सिद्धि है, जिसे साधक को प्राप्त नहीं हो सकती।

दोस्तो इसका अर्थ है।

दोस्तो साधना द्वारा जो साधक अपने वी_र्य को ऊध्वगामी बनाकर योगमार्ग में आगे बढ़ता हैं, वे कई प्रकार के सिद्धियो के मालिक बन जाते हैं और उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं रेहता है।

दोस्तो ब्रह्मचर्य एक उत्कृष्ट तप है…

ऐसे तो तपस्वी लोग कई प्रकार के तप करते है , परन्तु भगवान शंकर ने ब्रह्मचर्य को उत्कृष्ट तप कहा है। ब्रह्मचर्य ही उत्कृष्ट तप है और इससे बढ़कर तपछर्या तीनों लोको में दूसरी कोई और नहीं हो सकती हैं, ऐसा भगवान शंकर ने कहा है।

वी_र्य_र_क्षा ही जीवन है।

क्योंकि वीर्य इस शरीर रूपी नगर का एक तरह से राजा ही है।

“मरणं बिंदोपातेंन जीवन बिन्दुधारणात”

दोस्तो इसका अर्थ है..

वी_र्य_ना_श ही मृत्यू है और वी_र्य_र_क्षा ही जीवन है”

जीवन में स्त्री प्रसंग कितनी बार ?

दोस्तो एकबार सुकरात जी से किसी ने पूछा कि जीवन में पुरुष केलिए स्त्री प्रसंग कितनी बार होना चाहिए? तब सुकरात जी ने कहा…

जीवन भर में सिर्फ एकबार।

यदि इससे भी तृप्ति ना हो तो साल में सिर्फ एक बार।

यदि इससे भी संतोष ना होतो तो?

महीने में एकबार।

इससे भी मन ना भरे तो ?

तो महीने में दो बार परन्तु मृत्यु शीघ्र ही आ जाएगी।

इतने पर भी इच्छा बनी रही तो क्या करे?

इसपर सुकरात जी ने कहा।

तो ऐसा करे कि पहले कब्र खुदवा ले, फिर कफ़न और लकड़ी लाकर तैयार रखे, फिर उसके बाद जो इच्छा हो वो करे।

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ह_स्त_मै_थू_न के दुष्परिणाम क्या है?

ह_स्त_मै_थू_न कि गन्दी आदत से युवक अपनी विर्यधारन की शक्ति को खो बैठता है और वह तीव्रता से नपुसंकता की और बढ़ता है। उसकी आंखे निस्तेज और कमजोर हो जाती है और थोड़े ही परिश्रम से थक ज्याता है। उसकी आखों के आगे अंधेरा छा जाता है।

अधिक कमजोरी से मूर्छा भी आ जाती हैं और उसकी संकल्पशक्ति कमजोर हो जाती हैं और कमर में हमेशा दर्द रहता है। सिर के बाल झड़ जाना, यह सब ह_स्त_मै_थु_न करने से हम सब को दुष्परिणाम भोगने पड़ते है।

सी_मे_न रिटेंशन क्या है?

वी_र्य का ऊर्ध्वगमन का अर्थ यह नहीं कि वी_र्य स्थूल रूप से उपर सहसार चक्र की और जाता है। इस विषय में कई लोग भ्रमित हो जाते हैं। वी_र्य तो वहीं रेहता हैं लेकिन उसे संचालित करने वाली जो का_म_श_क्ति है, उसका ऊर्ध्वगमन होता है।

वी_र्य को उपर चढ़ाने के लिए हमारे शरीर के अंदर कोई नाड़ी नहीं हैं। इसीलिए वी_र्य उपर नहीं जाता है, बल्कि हमारे अंदर एक वैधुतिक शक्ति चुंबकीय शक्ति होती है। जो नीचे की और बेहती रहती है, तब शु_क्रा_णु सक्रिय होते हैं।

दोस्तो इसीलिए पुरुष की दृष्टि भड़कीली वस्त्र पर पढ़ती हैं या उसका मन स्त्री का चिंतन करता है, तब यही शक्ति उसके चिंतन मात्र से नीचे मूलाधार केंद्र के नीचे जो काम_केंद्र है, उसको सक्रिय करके हमारे वी_र्य को भाहर धकेलती है। वी_र्य स्ख_लि_त होते ही उसके जीवन की काम_शक्ति व्यर्थ में खर्च हो जाती है।

लेखक केहते है कि आप बहुत योगसाधना करके ऊर्ध्वरेता न भी बनो फिर भी वीर्यरक्षण केलिए इतना छोटा सा प्रयोग तो कर सकते हों।

दोस्तो यह तो सिर्फ हमने आपको दिव्य प्रेरणा प्रकाश पुस्तक का छोटा सा सार बताया है। लेकिन आपको इस किताब को खरीद कर या दिव्य प्रेरणा प्रकाश बुक इन हिंदी पीडीएफ फाइल डाऊनलोड करके इसको पूरा पढ़ सकते हो।

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Conclusion of Divya Prerna Prakash Book Summary in Hindi :

दोस्तों अब आपको पता चल ही गया होगा कि दिव्य प्रेरणा प्रकाश बुक एक जवान युवा केलिए कितनी जरुरी है। इसीलिए में इस बुक को लाइफ सेविंग बुक केहता हूं। दोस्तो, मैंने इस बुक को ३ साल पहले पढ़ा था और मेरी जिंदगी बदल गई। दोस्तो आप इस आर्टिकल के जरिए से समझ गए होंगे कि वी_र्य क्या है और वी_र्य केसे बनता है, वी_र्य धातु कितनी भेश कीमती है?

दोस्तो क्या आप इस ब्लॉग पर पहली बार आए हुए हैं, तो मैं आप लोगों को बताना चाहूंगा की मैं हर रोज आप सभी केलिए सफल और कामयाब लोगों के विचार और उनकी जीवनी, उनके द्वारा लिखी गई इंस्पिरेशनल, सेल्फ हेल्प किताबों की हिंदी समरी आप सभी के लिए इस ब्लॉग पर हर दिन पब्लिश करता रहता हूं। इसीलिए आप हमारे नॉलेज ग्रो हिन्दी ब्लॉग और टेलीग्राम चैनल को Subscribe जरूर किजिए।

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दोस्तो फिर मिलेंगे एसे हि एक इंट्रेस्टिंग आर्टिकल के साथ तब तक केलिए आप जहा भी रहिए खुश रहिए।

आपका बहुमुल्य समय देने केलिए धन्यवाद!

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