Divya Prerna Prakash Book Summary -With Hindi PDF Download

Divya Prerna Prakash Book Summary in Hindi, Divya Prerna Prakash Book in Hindi Pdf Free Download

नमस्कार मेरे प्यारे भाईयो और बहनों आप सभी का नॉलेज ग्रो मोटिवेशनल ब्लॉग पर स्वागत है. दोस्तो अगर आप Divya Prerna Prakash Book Pdf Free Download करना चाहते हैं या फिर इस किताब की हिंदी समरी पढ़ना चाहते हैं? तो आप बिलकुल सही जगह पर आये हुए है।

दोस्तों अगर आप इस आर्टिकल को अंत तक पढ़ते हैं, तो इस आर्टिकल से आपको बहुत कुछ सीखने को मिलने वाला है, जो आपके जीवन को रूपांतरित करने में बहुत सहायक साबित हो सकता है। इसलिए इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़ें।

Divya Prerna Prakash Book in Hindi Pdf Free Download
Divya Prerna Prakash Book Summary – With Hindi PDF Free Download

Divya Prerna Prakash Book Summary in Hindi

दोस्तो दिव्य प्रेरणा प्रकाश किताब हर युवा को पढ़ना चाहिए, क्योंकि इस किताब में जीवन को किस प्रकार जीना है ये इस किताब में बताया हुआ है। और यह किताब स्त्री पुरुष, गृहस्थी, विद्यार्थीं इन सभी केलिए अनुपम सामग्री है।

दोस्तो इस किताब में बताया गया है कि सामान्य जीवन को किस प्रकार जिने से यौवन का ओज बना रहता है और जीवन दिव्य बनता है। दोस्तो ये किताब मेरे जीवन की पहली किताब है, जिसे मैंने 3 साल पहले पढ़ा था, और इस किताब ने मेरी जिंदगी को बदला है।

दोस्तो इसलिए आज में आपके साथ इस किताब की हिंदी समरी शेयर करने वाला हु, ताकि इस किताब से मुझे जो कुछ भी सीखने को मिला हुआ है, वो आपको भी जानने को मिल सखे। तो बिना समय को गंवाए चलिए आर्टिकल कि शुरुआत करते हैं।

दिव्य प्रेरणा प्रकाश बुक समरी इन हिंदी में

दोस्तों ब्रह्मचर्य (Celibacy) उन लोगों को बहुत अजीब लगता है, जिन्हें “संभोग” शक्ति के बारे में बिलकुल भी कोई जानकारी नहीं है। वीर्य संभोग शक्ति का ईंधन है और ब्रह्मचर्य को संत रहीम जी ने अपने दोहा में निम्न प्रकार से बताया हुआ है और इसका एक सुंदर अर्थ है।

रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सुन  | पानी गए न उबरे मोती मानुष चुन

दोस्तो इसका अर्थ है : –

कृपया पानी बचाकर रखिए, बिना पानी के सब कुछ बेकार है। दोस्तो यहा चूने का मतलब है आटा। आप पानी के बिना रोटी कैसे बना सकते है और मोती की चमक उसकी पहचान है। दोस्तो यहाँ सबसे दिलचस्प बात यह है कि, महान आत्माओं के द्वारा मानव जीवन के लिए पानी के अर्थ को एक सुंदर तरीके से बताया गया है।

दोस्तों यहा पानी की तुलना वीर्य से की गई है, और मनुष्य के शरीर में वीर्य सबसे महत्वपूर्ण तरल पदार्थ है, और महिला के शरीर में इसे रज कहा जाता है। वीर्य मानवी शरीर का सार द्रव है। इस प्रकार यदि हम इसकी रक्षा कर लेते हैं और इसे सही जगह और सही समय पर उपयोग करते हैं, तो हम भी ब्रह्मचर्य को सार्थक कर पाएंगे।

दोस्तो इसका अर्थ है : –

दोस्तो वीर्य का महत्व जानना आप सभी का अधिकार है। वीर्य का शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक स्वास्थ्य से बहुत गहरा संबंध है। हमें भोजन से ऊर्जा मिलती है और रक्त का निर्माण भोजन से होता है और अंत में रक्त से वीर्य बनता है।

दोस्तो यह इतनी आसानी से नहीं बनता है, यह बहुत लंबी प्रक्रिया के बाद वीर्य बनता है। इस बात को आचार्य सुश्रुत जी ने छट्ठी शताब्दी में कहा था और उन्होंने लिखा है की 👇

रसाद्र्त्रम ततो मांसं मान्सान्मेदः प्रजायते। मेदस्यास्थी ततो मज्जा मज्जयाः शुक्र संभवः

दोस्तो इसका अर्थ है : –

भोजन के पाचन के बाद रस बनता है और रस के पाचन के बाद रक्त बनता है, और यह 5 दिनों के बाद बनाता है। और इस तरह, 5 दिनों के अंतराल में, रक्त से मांस, मांस से मेद, मेद से हड्डी, हड्डी से मज्जा, मज्जा से वीर्य बनता है, जो वीर्य बनने का अंतिम चरण है।

दोस्तो इस प्रक्रिया में महिला के शरीर में रज बनाता है और पुरुष के शरीर में वीर्य बनाता है। वैज्ञानिक भी कहते हैं कि वीर्य को बनने में 30 दिन 4 घंटे लगते हैं और वीर्य ऑटोमैटिक बनता है, और इसलिए हम इस की किमत को महसूस नहीं कर पा रहे हैं।

दोस्तो हमें अब आपको यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि वीर्य कितना कीमती और मूल्यवान है। आप खुद ही इसका अंदाजा लगा सकते हैं। वीर्य के हर परमाणु में असीमित ऊर्जा छिपी हुई होती है और कई बहादुर आत्माएं, वैज्ञानिक, योद्धा, लेखक वीर्य की एक बूंद में छिपे हुए थे।

वीर्य क्या है ?

वीर्य हमारे शरीर का एक तरह राजा है, ऐसी कई आत्माएं भविष्य में वीर्य की एक बूंद के साथ पैदा होंगी और ये कल्पना करना असंभव है। और कोई भी इस सच को नकार नहीं सकता है, क्योंकि ये सच्चाई पत्थर पर एक लकीर है, जो कभी गायब नहीं हो सकती है।

वीर्य शरीर रूपी साम्राज्य का राजा है और यदि राजा शक्तिशाली हो तो कोई भी दुश्मन (रोग) शरीर रूपी साम्राज्य पर आक्रमण नहीं कर सकता। दुश्मन नष्ट हो जाएंगे लेकिन राजा और उसका साम्राज्य हमेशा सुरक्षित रहेगा।

इसलिए हमें इस राजा यानी की अपने वीर्य को कभी भी कमजोर नहीं करना चाहिए। अन्यथा दुश्मन यानी की रोगरूपी शत्रु आपके शरीर पर आक्रमण करेंगे और आपके शरीर पर कब्जा कर लेंगे। इसलिए ब्रह्मचर्य का पालन करना आवश्यक है और इसका उच्च शारीरिक मूल्य भी है।

वीर्य का उपयोग कहां करें?

दोस्तो प्राचीन भारतीय ऋषि-मुनियों ने बताया है कि वीर्य का उपयोग सिर्फ संतान प्राप्ति के लिए किया जाता है और यह प्रकृति की व्यवस्था है। ऋषियों-मुनियों ने “संभोग” को पूरी तरह त्यागने के लिए नहीं कहा है।

लेकिन उन्होंने इसे समझदारी से उपयोग करने की सलाह भी दी है, ताकि दंपत्ति एक खुशहाल विवाहित जीवन जी सकें। उन्होंने ऐसा क्यों कहा है? क्योंकि वीर्य की ऊर्जा के बिना आप “संभोग” का आनंद नहीं ले सकते और “संभोग” का आनंद सीधे वीर्य के अपव्यय से संबंधित है।

माली की कहानी:

दोस्तों सबसे पहले आपको उस माली की कहानी याद रखनी चाहिए। जिसने कड़ी मेहनत करके एक सुंदर बगीचा बनाया था और वहा पर कई सुन्दर फूल खिलाए और उस माली ने उन फूलों से सुगंधित इत्र बनाया।

दोस्तो इस इत्र का सुगंध पर्यावरण को मंत्रमुग्ध करने ही वाला था, इससे पहले ही उस माली ने बिना सोचे समझे उस इत्र को गंदे नाली में फेंक दिया। अब आप सोचेंगे की वह माली कितना मूर्ख है और कितना पागल है!

लेकिन दोस्तो में आपको बताना चाहूंगा कि वह माली हमारे अंदर ही रेहता है। केवल कुछ समय के “से.क्सु.अल” प्लेजर के लिए 30 दिन की कमाई को एक मिनट में बर्बाद करना यह कोई बुद्धिमानी नहीं है।

दोस्तो शारीरिक “संभोग” का आनंद लेने से पहले मानव खुद को एक शेर समझ रहा होता है। लेकिन “संभोग” करने के बाद, डरी हुई बिल्ली बन जाता है। क्या यह हमारा अनुभव नहीं है?

दोस्तो इस दुनिया में ऐसा कोई भी इंसान ऐसा नहीं है, जिसे “संभोग” के बाद पछतावा नही हुआ हो। और ये हम सभी का प्रैक्टिकल अनुभव है और कोई प्रमाण की आवश्यकता नहीं है।

क्या इसका कोई समाधान है?

दोस्तो जब कोई इंसान “यौन” “उत्तेजना” से ग्रस्त होता है, तब उसके मन के दो भाग हो जाते है। हमारा चेतन मन संभोग के आनंद को पूरा करने के लिए जोर जोर से कहता रहता है और वही हमारा अवचेतन मन केहता है कि तुम बहुत पछताओगे।

पर अक्सर यही देखा गया है कि इन दोनों की लड़ाई में चेतन मन सफल हो जाता है और इंसान जान बूझकर बार बार जीवन भर क्षणभंगुर के आनंद को हासिल करने केलिए अपने बेश कीमती वीर्य का नाश करता रहता है।

क्या ऐसा कोई आदमी है, जो इस दलदल से बच पाया है?

जी, हाँ दोस्तो ऐसे भी लोग हैं, जो इसके पीछे के विज्ञान को जानते है, वे कभी भी इस दलदल में नहीं जाते। इससे पहले, वे खुद को अत्यंत मानसिक शक्ति के साथ बचा लेते हैं और वे हमेशा खुश रहते हैं।

वीर्य ऊर्जा एक प्राकृतिक है और आप इसे दबाकर नहीं रख सकते। इसलिए जब ये ऊर्जा नीचे की ओर बहती है, तब आपको “संभोग” के सिवाय कुछ और नहीं सुचता और तब आप कहीं भी खुशी नहीं देखेंगे।

जब यही वीर्य कि ऊर्जा ऊपर की ओर बेहती है, तो यह एक आश्चर्य जनक कार्य करती है और आप इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। इसे वीर्य का उर्ध्वगमन भी कहा जाता है, जिसे इंग्लिश में सिमेन रिटेंशन भी कहा जाता है और यह ब्रह्मचर्य का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

दोस्तों जो भी व्यक्ति भारत के ऋषियों-मुनियों से ब्रह्मचर्य के रहस्य को समझ लेता है, वो व्यक्ति अपने दैनिक जीवन को बदल देता है और जीवन जीने की कला को सीखता है। इन्द्रिय संयमी लोग सही व्यक्ति के साथ, सही समय पर सही जगह पर वीर्य कि ऊर्जा का उपयोग करते हैं और वे लोग हमेशा खुशहाल जीवन जीते हैं।

और दोस्तों वही व्यक्ति उस आनंदमय स्थिति के बारे में बोल सकता है, जिसने ब्रह्मचर्य का पालन करने के बाद इस तरह के आनंद को प्राप्त किया है। दोस्तो अब जानते हैं की ब्रह्मचर्य क्या है और उसके फायदे क्या है?

ब्रह्मचर्य क्या है? – What is Bramhacharya in Hindi

सर्व अवस्थाओ में मन, वचन और कर्म इन तीनों से “से.क्स” का सदैव त्याग करना उसे ब्रह्मचर्य कहा जाता है। दोस्तो अगर आप ब्रह्मचर्य क्या है और उसके फायदे क्या है? इसके बारे में details में जानकारी जानने के लिए नीचे दिए गए आर्टिकल को जरूर पढ़े।

भगवान वेद व्यास जी ने कहा है।

विषय इन्द्रियों द्वारा प्राप्त होने वाले सुख का सदैव पूर्वक त्याग करना उसे ब्रह्मचर्य कहा जाता हैं।

दोस्तो भगवान शंकर कहते है।

हे पार्वती, बिंदु अर्थात वीर्य रक्षण सिद्ध होने के बाद ऐसी कोनसी सिद्धि है, जो एक साधक को प्राप्त नहीं हो सकती।

दोस्तो इसका अर्थ है।

दोस्तो साधना द्वारा जो साधक अपने वीर्य को ऊध्वगामी बनाकर योगमार्ग में आगे बढ़ता हैं, वे कई प्रकार के सिद्धियो के मालिक बन जाते हैं और उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं रेहता।

दोस्तो ब्रह्मचर्य एक उत्कृष्ट तप है।

ऐसे तो तपस्वी लोग कई प्रकार के तप करते है, परन्तु भगवान शंकर ने ब्रह्मचर्य को उत्कृष्ट तप कहा है। ब्रह्मचर्य ही उत्कृष्ट तप है और इससे बढ़कर तपछर्या तीनों लोको में दूसरी कोई और नहीं हो सकती, ऐसा भगवान शंकर ने कहा है।

“मरणं बिंदोपातेंन जीवन बिन्दुधारणात”

दोस्तो इसका अर्थ है..

“वीर्य नाश ही मृत्यू है और वीर्य रक्षा ही जीवन है।”

जीवन में स्त्री प्रसंग कितनी बार करना चाहिए?

दोस्तो एकबार सुकरात जी से किसी ने पूछा कि जीवन में पुरुष केलिए स्त्री प्रसंग कितनी बार होना चाहिए? तब सुकरात जी ने कहा…

जीवन भर में सिर्फ एकबार

यदि इससे भी तृप्ति ना हो तो साल में सिर्फ एक बार।

यदि इससे भी संतोष ना होतो तो?

महीने में एकबार

इससे भी मन ना भरे तो ?

तो महीने में दो बार परन्तु मृत्यु शीघ्र ही आ जाएगी।

इतने पर भी इच्छा बनी रही तो क्या करे?

इसपर सुकरात जी ने कहा की,

तो ऐसा करे कि पहले कब्र खुदवा ले, फिर कफ़न और लकड़ी लाकर तैयार करके रखिए, फिर उसके बाद आपकी जो भी इच्छा है उसे आप करे।

हस्तमैथून के दुष्परिणाम क्या है?

दोस्तो हस्तमैथून कि गन्दी आदत से युवक अपनी विर्यधारन की शक्ति को खो बैठता है और वह तीव्रता से नपुसंकता की और बढ़ता है। उसकी आंखे निस्तेज और कमजोर हो जाती है और थोड़े ही परिश्रम से वो ज्यादा थक ज्याता है।

उसकी आखों के आगे अंधेरा छा जाता है और अधिक कमजोरी से उसे मूर्छा भी आ जाती हैं और उसकी संकल्पशक्ति कमजोर हो जाती हैं और कमर में हमेशा दर्द रहता है। सिर के बाल झड़ जाना, ये सब हस्तमैथुन करने से ये सब दुष्परिणाम इंसान को भोगने पड़ते है।

सीमेन रिटेंशन क्या है?

दोस्तो वीर्य का ऊर्ध्वगमन का अर्थ ये नहीं कि वीर्य स्थूल रूप से उपर सहसार चक्र की और जाता है। इस विषय में कई लोग भ्रमित हो जाते हैं। वीर्य तो वहीं रेहता हैं, लेकिन उसे संचालित करने वाली जो कामशक्ति है, उसका ऊर्ध्वगमन होता है।

वीर्य को उपर चढ़ाने के लिए हमारे शरीर के अंदर कोई नाड़ी नहीं हैं। इसीलिए वीर्य उपर नहीं जाता है, बल्कि हमारे अंदर एक वैधुतिक शक्ति चुंबकीय शक्ति होती है। जो नीचे की और बेहती रहती है, तब शु.क्रा.णु सक्रिय होते हैं।

दोस्तो इसीलिए पुरुष की दृष्टि जब भड़कीली वस्त्र पर पढ़ती हैं, या उसका मन स्त्री का चिंतन करता है, तब यही शक्ति उसके चिंतन मात्र से नीचे मूलाधार केंद्र के नीचे जो काम केंद्र है, उसको सक्रिय करके हमारे वीर्य को भाहर धकेलती है।

फिर वीर्य स्खलित होते ही उसके जीवन की काम शक्ति व्यर्थ में खर्च हो जाती है। लेखक केहते है कि आप बहुत योगसाधना करके ऊर्ध्वरेता न भी बनो लेकीन फिर भी वीर्यरक्षण केलिए इतना छोटा सा प्रयोग तो जरूर कर सकते हों।

दोस्तो यह तो सिर्फ हमने आपको दिव्य प्रेरणा प्रकाश पुस्तक का छोटा सा सार बताया हुआ है। लेकिन आपको इस किताब को खरीद कर इसे जरूर पढ़ना चाहिए। या फिर इस किताब की पीडीएफ डाऊनलोड करके इसको पूरा पढ़ सकते हो।

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