हमारा सच्चा दोस्त कौन हैं | Who is our True Friend in Hindi

 नमस्ते मेरे भाईयो और बहनों, आप सभी का स्वागत है हमारे नॉलेज ग्रो हिंदी ब्लॉग में, दोस्तो आज का ये आर्टिकल आप सभी के लिए बहुत ही special और शानदार होने वाला है। क्युकी दोस्तो आज के इस आर्टिकल मैं आपको बताने वाला हूं कि हमारा सच्चा दोस्त कौन है? इसीलिए इस लाइफ चेंजिंग आर्टिकल को आखिर तक जरूर पढ़िए।


हमारा सच्चा दोस्त कौन हैं? | Who is Our True Friend In Hindi

दोस्तो लाखों लोग है दुनिया में फिर भी इंसान इतना तनहा क्यों है? दोस्तो कितने रिश्ते हमने अपने लाइफ में बनाए फिर भी हम अकेले क्यों है ? अपने अकेले पन को दूर करने केलिए सारी जिंदगी कितने लोगों से मिले, कितने लोगों से रिश्ते बने और कितने लोगों से रिश्ते टूटे और फिर भी दिल खाली है। दोस्तो हर इंसान को यह शिकायत रहती है कि ऐसा कौन है जिसे हम अपना कहे?

दोस्तो एक पिता और पुत्र थे। पुत्र का मानना था कि हमारे लाइफ में जीतने ज्यादा मित्र हो उतना ही अच्छा है। जीतने ज्यादा कॉन्टैकट्स हो उतना काम अच्छे से होता है और उतना ही वो हमे हेल्प करते हैं। लेकिन उसके पिता का यह मानना था कि चाहे बहुत ज्यादा मित्र नहीं हो पर बहुत अच्छे मित्र हो, चाहे एक ही मित्र हो लेकिन हमारे सारे सुख दुख में हमारा साथ दे। 

दोस्तो पुत्र इस बात को नहीं मानता था और वो केहता था कि इतने कम मित्र रहेंगे तो हमारे काम कैसे होंगे और हम जीवन मै कैसे चल पाएंगे। तब उसके पिता ने कहा कि चलो आज एक परीक्षा करते हैं कि आज रात को हम घर से बाहर निकलते है और तुम मुझे अपने मित्रो के पास ले चलो, देखते है कि कौन कैसी सहायता करते हैं ?

और पिता ने कहा कि मेरा सिर्फ एक ही मित्र हैं मै तुम्हे उसके पास ले चलता हूं और तुम मुझे अपने मित्रो के पास ले चलो। तब पुत्र ने कहा कि चलो इसमें क्या बड़ी बात है, मेरे सभी दोस्त मेरी सहायता करेंगे। उसके बाद रात को पिता और पुत्र दोनों ही घर से बाहर निकले।

उसका पुत्र सबसे पहले अपने पहले मित्र के पास आया और दरवाजे पर दस्तक दी और आधी रात का समय था। पुत्र ने आवाज लगाई और कहा कि क्या तुम अन्दर हों? मुझे तुम्हारी सहायता चाहिए. तब उसके घर के अंदर से आवाज आई कि वो अब सोने जा रहा है और तुम कल आना। तब पुत्र ने कहा कि नहीं मुझे बहुत ही जरूरी काम है ?

दोस्तो इतने मै उसके मित्र कि भी आवाज आई कि अभी मैं तुम्हारी कोई भी सहायता नहीं कर सकता तुम कल आना! पुत्र के दिल को बहुत ही दुःख पहुचा क्यूकी वो उसका सबसे खास दोस्त था। ऐसे ही वो अपने सभी मित्रो के घर चला गया लेकिन सबने कोई ना कोई बहाना बना दिया... कि घर मै नहीं है या बीमार हैं और किसी ने भी उसके लिए दरवाजा नहीं खोला।

अब उसके पिता ने कहा कि मेरा सिर्फ एक ही मित्र हैं, चलो उसके पास चलते हैं! पिता ने अपने मित्र के घर दस्तक दी और जैसे ही उसके मित्र को आवाज लगाई तो अन्दर से उनका मित्र दरवाजा खोलकर एक हाथ में पैसो कि थैली और एक हाथ लाठी लेकर बाहर आ गया। 

तब उसके पुत्र ने पूछा कि अरे भाई हमने तो अभी तक कुछ बोला भी नहीं है। और आप एक हाथ मै पैसों कि थैली और एक हाथ मै लाठी लेकर बाहर आए हैं ,ऐसी क्या बात है ?

तब उसके पिता के मित्र ने कहा कि आधी रात को कोई इंसान किसी के घर में आपत्ति काल में ही जाता हैं। अगर किसी से झगडा हुआ है या कोई मुसीबत आयि है या कोई सता रहा है तो मै तुम्हारे पिता के साथ लड़ने के लिए तैयार हूं। या अगर कोई बीमार है या इमर्जेंसी है तो मै ये पैसे लेकर आया हूं जिससे मै उनकी सहायता कर सकू।

इसके बाद पुत्र के पिता ने पुत्र से कहा कि हजार झुटे रिश्तों से एक सच्चा रिश्ता ज्यादा मायने रखता है। दोस्तो हमारा मित्र ऐसा हो जिससे हम दिल कि हर बात बता पाए बिना घबराए बिना सोचे, जिससे कुछ छुपाना ही पड़े।

दूसरी कहानी

दो मित्रो का आपस में बहुत घनिष्ट सम्बन्ध था। एक बार एक मित्र को कुछ रुपयों कि आवश्यकता पड़ी और वह अपने मित्र के घर गया और तब उसका मित्र कहीं बाहर गया हुआ था। तो उस मित्र के पत्नी से पूछा कि मुझे कुछ रुपयों कि आवश्यकता है? तब उसकी पत्नी ने कहा कि क्या आपको पता है कि तिजोरी कि चावी कहा है और आप पैसे निकालकर ले जाइए, और वह मित्र पैसे निकालकर वहां से चला गया।

जब वो दूसरे दिन अपने मित्र से मिला तो उसने उसको बताया कि मैंने कल तेरे घर से कुछ पैसे लिए है, मैंने तेरे पत्नी को बताया और पैसे लेकर वहां से चला आया। दोस्तो यह सुनकर उसका मित्र रोने लगा, उस मित्र को बड़ा आश्चर्य हुआ कि अरे भाई क्यों रोते हो, मै तेरे पैसे लौटा दूंगा ना...

तब उसके मित्र ने कहा कि, इसीलिए नहीं रो रहा हूं कि तूने पैसे ले लिए, बस इसीलिए रो रहा हू क्योंकि बस तेरा इतना विश्वास है मुझ पर कि तुझे पूछना पड़ा, कि तुझे बताना पड़ा कि पैसे ले जाऊं... भाई हम शरीर से दो मित्र है लेकिन हमारी जान एक हैं। तुझे जरूरत क्या है बताने कि, तुझे मुझपर भरोसा नहीं है...

दोस्तो मित्र हो तो ऐसा, मित्र हो तो श्री कृष्ण और सुदामा कि जैसा, दोस्तों और एक प्यारी कहानी है जो मै आपको अभी बताने वाला हूं।

कहानी तीसरी

भगवान श्री कृष्ण और सुदामा एक बार जंगल मै कुछ फल तोड़ने के लिए गए। भगवान श्री कृष्ण बोले कि मै पेड़ पे चड़ जाता हूं और मै फल तोड़कर नीचे फेंकता हूं और तुम उन्हें पकड़ लेना और बाद में हम साथ में खाएंगे। 

दोस्तो उसके बाद भगवान श्री कृष्ण ने एक फल तोड़कर नीचे फैंका और अपने मित्र सुदामा से कहा कि इसे खाकर इसकी जाच करलो कि यह सही है या नहीं? तब उसके बाद सुदामा ने फल खाना शुरू किया और सुदामा ने कहा कि अरे कृष्ण फल तो बहुत मीठा है और उस फल को पूरा खा गया। 

दोस्तो उस पेड़ पे कुल चार फल थे। सुदामा पहला खा गया दूसरा खा गया तीसरा भी खा गया। जब श्री कृष्ण ने ये देखा कि सुदामा सारे फल खाते जा रहा है और आखरी फल बचा हुआ है, तब श्री कृष्ण बोले कि अरे सुदामा तुझे इतनी क्या बुख लगी है कि तू थोड़ा इतज़ार नहीं कर रहा, और मेरे लिए एक भी फल नहीं बचाया। 

उसके बाद भगवान श्री कृष्ण ने आखरी जो फल बचा था उसको उठाया और उस फल को थोडासा खाया तो फल इतना कड़वा था जैसे कि जेहर हो। और तब भगवान श्री कृष्ण ने बोला कि अरे सुदामा तूने बताया नहीं कि इतना कड़वा फल है और तू खाता गया। तब उसके बाद सुदामा बोला की जैसे ही मैंने वो फल खाया तो मुझे पता चल गया कि ये फल बहुत ही कड़वा है। पर हे कृष्ण मै ये नहीं चाहता था कि इतने कड़वे फल को तुम खावो। 

इसीलिए मैंने सोचा कि ये सारे फल मै खा लूंगा तो तुम्हे इस कड़वाहट का सामना ही नहीं करना पड़ेगा। दोस्तो मित्रता हो तो ऐसी, दोस्तो हम हजार दोस्त बना लेते हैं पर मौका आते ही कहा जाते हैं सब। जब हम सबसे ज्यादा तकलीफ और दर्द मै होते हैं तब कोई क्यों नहीं होता पास। 

दोस्तो तकलीफ दूर करना तो दूर कि बात कोई दर्द को समझता भी नहीं, हमारे संबंधों का कोई स्तर ही नहीं है। दोस्तो मै आपके लिए और एक कहानी बताने वाला हूं जो आपको मित्रता के बारे मै बहुत कुछ बताएगी।

कहानी चौथी

एक बार दो मित्र जंगल से जा रहे थे और रात का समय था। तब दोनों मित्रो ने सोचा कि आगे भयानक जंगल है और आगे यात्रा नहीं कर पाएंगे। तो ऐसा करते है कि एक एक करके थोड़ी थोड़ी देर सोते हैं।

पहले एक मित्र सोया और आधी रात को दूसरा मित्र सोया और पहला उठ गया। दोस्तो जब दूसरा मित्र सो रहा था तब इतने मै वहां एक साप आया और जो मित्र जाग रहा था उसने उसे देखा उसने उस सर्प से बोला कि तुम यहां क्यों आए हो? 

तब वो सर्प बोला कि तेरा यह मित्र मेरे पिछले जन्म का वैरी है और जब तक मैं इसका खून नहीं पीऊंगा तब तक मेरा प्रतिशोध शांत नहीं होंगा और मुझे मुक्ति नहीं मिलेगी। इसको में डस के इसका खून पिके तभी मै यहां से चला जाऊंगा।

तब उसके मित्र ने कहा कि तुझे इसका खून ही चाहिए ना अगर में तुझे इसका खून पिलादू तू यहां से चला जायेगा ना? तब सर्प ने कहा कि... हां, तब में चला जाऊंगा।

अब जो मित्र जाग रहा था वो अपने मित्र जो सो रहा था उसके छाती पे जाकर बैठ गया हात पे चाकू लेके, जैसे ही उसका मित्र उसके छाती पे बैठ गया हात में चाकू लेके तब सोते हुए मित्र कि आंख खुल गई और तब उसने देखा कि मेरा मित्र मेरे छाती के उपर चढ कर बैठा हुआ है और उसके हात मै चाकू है। ये देखकर वो फिरसे सो गया। 

उसके बाद उस दूसरे मित्र ने अपने सोते हुए मित्र के सीने पे हलका सा चाकू चलाया और उसके सीने से थोड़ा सा खून निकाला और सर्प को पिलाया और उस सर्प को वहा से भगा दिया। दूसरे दिन वो दोनो जंगल से चले गए। नाही उस मित्र ने पूछा नाही ही उस मित्र ने बताया।

पर इस मित्र को बड़ा आश्चर्य हुआ कि मै इसके उपर चाकू लेकर बैठा था और ये बेपरवाह होकर सोता रहा। इसे कोई चिंता है नही थी। फिर बाद मै इसी मित्र ने कहा कि मै आधी रात को तुम्हारे उपर चाकू लेकर बैठा था ? 

तब दूसरे मित्र ने कहा कि... हां

तब इस मित्र ने बोला कि तुम कुछ बोले क्यों नहीं? तुम्हे डर नहीं लगा कि मै तुम्हारी जान ले लूंगा। 

तब दूसरे मित्र ने बोला कि... मुझे तुम पर इतना विश्वास है कि तुम अगर मेरी जान भी ले लोगे ना तो उसमे भी मेरी भलाई होंगी। तुम सपने में भी मेरा बुरा नहीं सोच सकते।

दोस्तो क्या हमे हमारे रिश्तों पे इतना विश्वास है? वास्तविकता में हमारे संतो ने हमारा सच्चा दोस्त परमात्मा को कहा है। पर जब सब कुछ अच्छा अच्छा होता है ना तब लगता है कि भगवान है और जैसे ही हमारे साथ कुछ बुरा होता है या कठिन समय और दुख आया है तो लोग केहते है कि मुझे भगवान पे भी विश्वास नहीं है। 

भगवान मेरे साथ हमेशा ग़लत करते हैं। जब कोई संकट या दुख कि घड़ी भी आए ना तब याद रखना ये कहानी कि कोई पहाड़ जैसा दुख भगवान ने इस छोटे दुख के रूप मै काट दिया। दोस्तो हमारा मन बहुत कमजोर है और हमारा विश्वास और प्रेम बहुत ही जल्दी टूट जाता है।

दोस्तो इसीलिए हमे उस स्तर का प्रेम और विश्वास प्राप्त नहीं होता क्युकी हमारे दिल में अभी भी उस अतूट विश्वास ने जन्म नहीं लिया है। दोस्तो जिनका भी परमात्मा पर पूर्ण भरोसा है वो एक एकेले ही काफी है हजार मित्रो के और हजार लोगों के तुलना में।

जैसे महाभारत के उद्ध के समय श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि अर्जुन तुमने उद्ध के लिए मुझे ही क्यों चुना। तुम्हारे पास दोनों विकल्प थे। तू चाहता तो तू मेरी नारायणी सेना को भी चुन सकता था, वो अजय कभी परस्थ नहीं होती। और एक तरफ मै एकेला निहत्ता...

तब अर्जुन ने कहा कि प्रभु आपके आगे ऐसी हजारों नारायणी सेना भी कुछ नहीं। अगर आप मेरे साथ है तो दुनिया कि कोई ताकत नहीं जो मुझे हरा सके और आपके भरोसे ही मैंने ये उद्ध लड़ने कि सोची है। 

दोस्तो यदि अगर हमारे मन मै भी ऐसा विश्वास और भरोसा आ जाए कि परमात्मा हमारे साथ है तो दुनिया कि कोई ताकत हमे हरा नहीं सकती। तो हम स्वयम को हमेशा आनंदित महसूस करेंगे और तब हमे कभी भी नहीं लगेगा की अब हम अकेले है क्यूकी वो परमात्मा हमेशा हमारे साथ है...

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Conclusion : -

दोस्तो इस आर्टिकल मै बताए हुई सभी कहानियां अगर आपने ध्यान से पढ़ी हुई हो तो आपको समझ आया हुआ होंगा कि हमारा सच्चा दोस्त कौन है ? दोस्तो अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगा हो और आपके लिए उपयोगी साबित हुआ हो तो हमारा सच्चा दोस्त कौन है ? इस इंटरस्टिंग आर्टिकल को अपने दोस्तो के साथ फेसबुक और whatsapp पर जरूर शेयर कीजिए।

दोस्तो और नीचे कॉमेंट बॉक्स मै हमे कमेंट करके बताए की आपको ये आर्टिकल कितना अच्छा लगा। दोस्तो फिर मिलेंगे ऐसे ही एक इंटरस्टिंग आर्टिकल के साथ तब तक के लिए जहां भी रही है खुश रहिए।

धन्यवाद आपका दिन शुभ हो...

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