Atomic Habits Book Summary in Hindi By James Clear

Atomic Habits Book Summary in Hindi: नमस्कार साथियों, आप सभी का हमारे नॉलेज ग्रो हिन्दी ब्लॉग में स्वागत है। दोस्तो आज का यह आर्टिकल आप लोगों के लिए बहुत ही स्पेशल और यूजफुल होने वाला है। क्योंकि दोस्तो आज के इस आर्टिकल में हम बात करने वाले हैं, जेम्स क्लियर की बेस्ट सेलर बुक एटॉमिक हैबिट्स की समरी के बारे मैं।

Atomic Habits Book Summary in Hindi

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एटॉमिक हैबिट्स बुक किन लोगों के लिए हैं?

  • वे लोग जो कामयाबी के शिखर पर पहुंचना चाहते हैं।
  • वे लोग जो अपनी आदतों के बारे में जानना चाहते हैं।
  • वे लोग जो साइकोलॉजी पढ़ना चाहते हैं।
  • वे लोग जो अपनी बुरी आदतों को छोड़कर अच्छी आदतें अपनाना चाहते हैं।

एटॉमिक हैबिट्स बुक आपको क्यों पढ़ना चाहिए?

दोस्तो सुबह उठकर ब्रश करना, नहाना, हर दिन उसी रास्ते से काम पर जाना और घर लौटते वक्त हमेशा उसी होटल में खाना खाना, अपना मोबाइल इस्तमाल करना और ना जाने कितनी ऐसे काम शामिल है, जो हम अपनी जिंदगी में बिना सोचे समझे करते रहते हैं। हमारा दिमाग हमेशा आराम खोजता रहता है, जिससे वो आदतें बना लेता है, ताकि उसे हर बार सोचना ना पड़े। लेकिन इन आदतों के नतीजे बहुत अच्छे या बहुत बुरे भी हो सकते है।

दोस्तो एटॉमिक हैबिट्स बुक आपको उन वजहों के बारे में बताती है, जिससे हम किसी भी आदत को अपनाते हैं। यह किताब हमे बताती हैं कि क्यों किसी आदत को छोड़ना बहुत मुश्किल होता हैं और क्यों किसी अच्छी आदत को अपनाना बहुत मुश्किल होता है। उसके साथ ही यह किताब हमे यह भी बताती है की किस तरह से हम बुरी और खराब आदतों को छोड़कर अच्छी आदतों को आसानी से अपना सकते है।

Atomic Habits Book को पढ़कर आप सीखेंगे की

  • हमारे छोटे छोटे काम क्यों नहीं होते है।
  • हमारी आदतें किस तरह से बनती हैं।
  • किसी भी उबाऊ काम को कैसे किस तरह से मजेदार बनाया जा सकता है।

Atomic Habits Book Summary in Hindi – एटॉमिक हैबिट्स बुक समरी इन हिंदी

दोस्तो इस किताब को James Clear जी ने लिखा है, जो एक अमेरिकन लेखक और साइकोलॉजिस्ट हैं। उनको आदतों के बारे मैं और साइकोलॉजी के बारे मे लिखना बहुत पसंद है। तो दोस्तो बेहद सरल और प्रैक्टिकल तरीको से जानते हैं की कैसे अपनी बुरी आदतों को तोड़ा जाए ताकि अपने जीवन में अच्छी आदतों को स्थान दे सके। तो चलिए शुरू करते हैं।

छोटे छोटे कामो का नातिजा बहुत बड़ा हो सकता है।

दोस्तो जब आप हर दिन कसरत करते हैं, तो आप एक दिन में ही सेहतमंद और फिट नहीं बनते, लेकिन एक दिन आप जरूर सेहतमंद हो जाते हैं। वैसे ही जब आप हर रोज बाहर का फास्ट फूड खाते हैं, तो आपको पता नहीं लगता की आप मोटे हो रहे हों। लेकिन कुछ कुछ दिनों या कुछ महीनो के बाद जब आप अपनी पुरानी फोटो देखते हैं, तो आपको पता लगता हैं की हर रोज के उस फास्ट फूड खाने से आपकी सेहत पर क्या असर डाला हैं।

दोस्तो हम हर रोज ना जाने कितने ऐसे काम करते हैं, जो या तो अच्छे होते है या बुरे। हमे हमेशा ऐसा लगता हैं की उस छोटे से काम का नतीजा कुछ खास नहीं होगा, लेकिन हम यह भूल जाते है की उस छोटे से काम को लगातार करते रहने से हम ना जाने कितने पीछे या आगे चले जा सकते हैं।

उदाहरण के लिए एक व्यक्ति इंटरनेट पर हमेशा अच्छी अच्छी जानकारी को सर्च करता है और वही पर दूसरा व्यक्ति हर दिन इंटरनेट पर हमेशा मनोरंजन की चीजों को देखता है या सर्च करता रहता है। हाला की देखने में लग रहा है की दोनों भी व्यक्ती इंटरनेट का इस्तमाल कर रहे हैं। लेकिन 5 साल बाद उन दोनों के बीच का अंतर बहुत ज्यादा होगा।

इसीलिए अगर आप लंबे समय तक कामयाब और सेहतमंद रहना चाहते हैं, तो आपको उन कामों को पहचानिए जो आपको आगे लेकर जा रहा है या पीछे, और उसके साथ यह भी देखिए की वो काम करना अच्छा है या बुरा। और इसके बाद फैसला किजिए की वो काम आपको हर रोज करना चाहिए या नहीं?

दोस्तो में आपको एक उदाहरण देकर समझाता हूं।

दोस्तो अगर आप आज कोई नया काम कर रहे हैं या कोई ऐसा काम जो आप हर रोज करते हैं तो आप खुद से सवाल कीजिए की अगर आप इस काम को अगले 5 साल तक लगातार इसी तरह करते रहेंगे तो आपके उपर इसका क्या असर होगा? इस तरह से आप यह पता कर सकते है की वो काम आपको करना चाहिए या नहीं?

अगर आप अपनी इनकम का ज्यादातर हिस्सा अच्छे अच्छे गैजेट्स या सुख सुविधा खरीदने में बिताते हैं, तो जाहिर सी बात है की आप खुद को आराम दे रहे हैं। और 5 साल बाद इसका असर यह होगा की आप 5 साल बाद भी उतना ही पैसा कमा रहे होंगे जितना अभी कमा रहे होंगे।

लेकिन अगर आप अपनी इनकम का ज्यादातर हिस्सा खुद को पहले से बेहतर बनाने में या कही पर इन्वेस्ट करते हैं जहा से आपको अच्छा खासा रिटर्न मिले, तो जाहिर सी बात है की आप 5 साल बाद बहुत काम करके पैसा कमा रहे होंगे और एक सफल और कामयाब इंसान बनेंगे।

हम उन कामों को बार बार करते हैं, जिनसे हमे कुछ ना कुछ इनाम मिलता है।

दोस्तो जरा सोचिए की आप कौन से काम हर रोज करते है, और उसके बाद यह सोचिए की आप वह काम क्यों करते हैं और अगर वो काम ना करें तो आपको किस तरह से परेशानी होगी। हम में से ज्यादातर लोगों की आदत होती है सुबह उठकर ब्रश करना। अगर आप दो दिन तक ब्रश नही करेंगे तो आपके मुंह से बदबू आने लगेगी और यह आपको अच्छा नहीं लगेगा।

दूसरे शब्दों में कहें तो, ब्रश करने से आपको एक इनाम मिलता है, जिसे पाने के लिए आप हर रोज सुबह उस काम को लगातार दोहराते रहते हैं। इसे साबित करने के लिए एक सायकोलॉजिस्ट ने एक बंदर पर एक्सपेरिमेंट किया। उन्होंने बस उस बंदर को एक पिंजरे में बंद कर दिया और उसके सामने एक लिवर और कंप्यूटर रख दिया गया। उस कंप्यूटर पर जब लाल रंग की लाईने दिखाई दे जाए और उसके बाद लिवर को खीचा जाए, तो उस बंदर को खाने के लिए फल मिल जाते थे।

बंदर इस बात को समय के साथ समझ गया और फिर वो ध्यान लगाकर स्क्रीन की तरफ देखना लगा। जैसे ही लाल रंग की लाइने उसे दिखती, वो लिवर को खीच देता था और उसे खाने के लिए फल मिल जाते थे। इस तरह से वो बंदर बार बार इनाम को पाने के लिए वो बार बार उस काम को लगातार करने लगा।

दोस्तो किसी भी काम को करने के लिए हमे एक क्यों की जरूरत होती है, जो हमे यह बताता है की उस काम को करने का वक्त आ गया है। उदाहरण के लिए कुछ लोग तनाव से मुक्ति के लिए शराब का सहारा लेते हैं। जब भी वे तनाव में आ जाते है तो यही उनका क्यों होता हैं जो उन्हें बताता है की अब शराब पीने का टाइम आ चुका है।

ठीक इसी तरह किसी भी काम को करने पर हमे एक इनाम मिलता है और उस इनाम को पाने के लिए हम उस काम को लगातार करते रहते हैं। जब उस व्यक्ति को शराब पीने से राहत मिल जाती है, तो वो व्यक्ति फिर से तनाव में जाने के बाद फिर से शराब को याद करता है। दोस्तो इसी तरह से लगभग हर एक हैबिट इसी पैटर्न को अपनाती है।

कुछ खराब आदतें भी है जिन्हे अपनाने से हमे कुछ वक्त के लिए आराम या मज्जा मिलता है, लेकिन लंबे समय में वे हमारे लिए नुकसानदायक है। लेकिन फिर भी हम उन कामों से मिलने वाले इनाम को पाने के लिए उन कामों को करते रहते हैं। हम खुद को ऐसा करने से रोक नही पाते हैं। अगले भाग में हम इसके हल के बारे में जानेंगे।

नई आदत को बनाने के लिए आपको अपने माहौल को बदलना होगा।

दोस्तो अब जब आप यह जान गए हैं कि हमारी आदतें किस तरह से बनती है? तो आइए उसका इस्तमाल करके यह जानने की कोशिश करते हैं की किस तरह से नई आदत को आसानी से अपना सकते हैं। कुछ ऐसी खास चीजे होती है, जो हमे एक खास काम करने के लिए हमे उकसाती है।

उदाहरण केलिए अगर आप किसी रेस्टोरेंट के सामने से गुजरते हैं, तो आपको वहा पर खाने की खुशबू आती है। तो आप रेस्टोरेंट में खाना खाने के लिए चले जाते हैं। दोस्तो उस खाने की खुशबू ने आपको खाना खाने के लिए उकसाया। इसका मतलब यह की अगर आप किसी नए काम को अपनी आदत में कन्वर्ट करना चाहते हैं, तो आपको उन चीजों को अपने पास रखिए जो आपको वह काम करने केलिए उकसाए।

अगर आप हर सुबह कसरत करने की आदत डालना चाहते हैं, तो आपको अपने बेडरूम में सेहत से जुड़े फोटोज को लगा देना है। ताकि आप सुबह उठते ही अपनी सेहत बनाने केलिए कसरत करें। अगर आप चाहते हैं की अच्छा और सेहतमंद खाना खाए तो अपने फ्रिज में और अपने खाने के टेबल पर हमेशा सेहतमंद खाना रखिए। हो सके तो आप सेहतमंद लोगों के साथ रहना शुरू कर कीजिए, ताकि उनकी सेहत को देखकर आपको भी सेहत बनाने केलिए आपका मन करे।

इसके अलावा एक और तरीका यह है की आपको उस नए काम को करने केलिए प्लानिंग करना है। उदाहरण केलिए अगर आप सेहतमंद लोगों की तरह सेहतमंद बनाना चाहते हैं, तो आपको खुद से सिर्फ यह मत कहिए की आप अब से अपनी सेहत का खयाल रखेगे। बल्की आप ऐसा करने के लिए एक अच्छा प्लान बनाएं। जैसे की आप सुबह उठकर क्या करेंगे, कौन सा खाना खाएंगे। अगर कभी बाहर का फास्ट फूड खाने का मन करे तो आप खुद को कैसे रोकेंगे, किस तरह के लोगों के साथ रहेंगे इत्यादि…

दोस्तो अगर आप इस तरह से पूरे तैयार रहेंगे तो इसकी संभावना ज्यादा बढ़ जाती है की वाकई में आप उस काम को करेंगे जो आपने करने केलिए सोचा है।

एक नई आदत को अपनाने केलिए खुद को एक इनाम दीजिए।

जैसे की हमने आपको पहले ही कहा है की हर काम को करने पर आपको एक इनाम मिलता है। आप इसका इस्तमाल करके आप अपने अंदर बहुत सी नई आदतो को बना सकते हैं। लेकिन अगर आपको सेहत बनानी है तो आपको सेहतमंद खाना खाना होगा। लेकिन सेहतमंद खाना खाने से आपको मजा नही आता है, तो किस तरह से आप अपने इस आदत को अपना सकते हैं।

इसका आसान सा तरीका यह है की उस काम को ऐसे काम से जोड़ दीजिए जिसे करने में आपको मजा आता हों। उदाहरण केलिए अगर आपको कहानी पढ़ना पसंद है, तो खुद से कहिए की अगर में इस हफ्ते सेहतमंद खाना खाऊंगा, तो संडे की दिन एक कहानी पडूंगा। या अगर आपको मूवी देखना पसंद है तो आप सन्डे के दिन एक मूवी देख सकते हो।

जब हम किसी काम से मिलने वाले इनाम के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में डोपामिन नाम का एक महत्वपूर्ण हार्मोन रिलीज होता हैं, जिससे हमे अच्छा लगता हैं। इसीलिए कुछ लोगो को दिन में ख्वाब देखने की आदत पड़ जाती है। क्योंकि वे खुली आंखों से सपने देखकर खुद को मर्सिडीज कार में घुमाते हैं और इससे उन्हें मजा आता है।

यह खूबी हम सब में होती है, और इसीलिए अपनी ट्रीट के बारे मे सोचने से ही आपको अच्छा लगने लगता हैं। लेकिन वो ट्रीट आपको तभी मिलेगी जब आप अपना काम पूरा कर लेंगे। इसीलिए उस ट्रीट को पाने केलिए आपके अंदर उस काम को पूरा करने केलिए इंटरेस्ट बढ़ जायेगा।

साइकोलॉजिस्ट ने डोपामिन के महत्व को समझने केलिए चूहों पर एक एक्सपेरिमेंट किया। उन्होंने चूहों के दिमाग में इलेक्ट्रिक राड डालकर उनके दिमाग में रिलीज होने वाले डोपामिन हार्मोन को बंद कर दिया। इसका नतीजा यह हुआ की उन चूहों ने खाना पीना बंद कर दिया, क्योंकि उन्हें बुख तो लगती थीं लेकिन खाना खाने के बाद जो आराम मिलता है वह नही मिल रहा था। क्योंकि उन्हें उस काम में मजा नहीं आ रहा था। इसीलिए उन्होंने उस काम को करने से छोड़ दिया और उसके वजह से कुछ ही दिनों में बूख प्यास के मारे चूहों की मौत हो गई।

इसीलिए अगर आपने बोरिंग से भी बोरिंग काम को पूरा करने पर खुद को एक इनाम देने का वादा करे, जिसके बारे में सोचने पर ही आपको अच्छा लगता हो। तो आप उस बोरिंग काम को भी आराम से कर लेंगे। दोस्तो में आपको मेरे प्रैक्टिकल अनुभव से समझाता हूं।

दोस्तो कुछ साल पहले मुझे रीडिंग की हैबिट डेवलप करनी थी, लेकिन मुझे किताब को हाथ में रखते ही और एक दो पन्ने पढ़ते ही नींद आ जाती थीं। लेकिन मुझे रीडिंग कि इस आदत को अपनाना था, क्योंकि इस रीडिंग के वजह से ही यह ब्लॉग आज बन पाया है, और में मेरे विचार और अच्छी अच्छी किताबों की समरी आपके साथ शेयर कर पा रहा हूं।

दोस्तो मुझे Motivational Stories और Motivational Videos देखने का बहुत शॉक है, और इसीलिए मैंने रीडिंग कि इस अच्छी आदत को अपनाने के लिए मैने सबसे पहले खुद कहा की अगर हर रोज सुबह मैने सिर्फ 15 मिनिट बुक रीडिंग की तो रीडिंग करने के बाद मैं एक मोटीवेशनल वीडियोस देखूंगा।

और ऐसे हर रोज करके मैने रीडिंग की हैबिट को डेवलप किया। में हर दिन रीडिंग करने के बाद एक 5 या 10 मिनिट का मोटिवेशनल विडियोज देखता था। जिसके वजह से मुझे रीडिंग करने के बाद मोटिवेशनल विडियोज देखने का इनाम भी मिलता था। दोस्तो मेरे हिसाब से इनाम ऐसा होना चाहिए, जिससे हमे नुकसान भी ना हो और हमे ज्ञान भी मिल जाए। जैसे में करता रहता हूं।

हम उन चीजों को अपना लेते हैं, जो आसान होते हैं।

दोस्तो हमारे दिमाग को आराम करना बहुत पसंद है। इसीलिए वो हमेशा उन कामों को करना पसंद करता है, जो बहुत आसान होते हैं। तो अगर आपको एक नई आदत बनानी है तो आपको उसे इतना आसान बनाना होगा की आप उसे आसानी से अपना सकते हो। ठीक उसी तरह से अगर आपको एक बुरी आदत को छोड़ना है, तो उसे इतना मुश्किल बनाना होगा की आप उसे छोड़ देंगे।

सबसे पहले बात करते हैं बुरी आदतों को छोड़ने की, इसके लिए आपको कुछ ऐसा करना होगा जिससे वह काम आपके लिए मुश्किल हो जाए। उदाहरण के लिए अगर आप इंस्टाग्राम की रील्स देखने की आदत को छोड़ना चाहते हैंं, तो आपको इंस्टाग्राम ऐप को अपने मोबाइल फोन से uninstall कर देना है। जिससे आप इंस्टाग्राम ऐप को यूज नही कर पाएंगे। क्योंकि आपने उस ऐप को डिलीट करके उस काम को करने केलिए मुश्किल कर दिया।

ठीक उसी तरह अगर आपको किसी अच्छी आदत को अपनाना है, तो उसे करने के लिए उसे आसान बनाए। उदाहरण केलिए अगर आपको सुबह उठकर जोगिंग करना है, तो अपने जूतो को अपने बेड के नीचे ही रखिए, और अपनी जोगिंग की ड्रेस को भी सोते समय अपने आसपास रखिए। ताकि सुबह उठकर आपको जोगिंग केलिए जाने में आसानी हो।

दूसरा तरीका यह है की आपको किसी भी आदत को अपनाने केलिए 2 मिनिट का नियम अपनाए। क्योंकि हमारे दिमाग को छोटे और आसान काम करना बहुत अच्छा लगता हैं, क्योंकि वे जल्दी खत्म हो जाते हैं। इसीलिए आप खुद से स्टार्टिंग में यह मत कहिए की में हर हफ्ते एक किताब पढ़कर खत्म कर दुंगा, बल्की उसकी जगह आप खुद से यह कहिए की में हर दिन सिर्फ 2 पेज ही पढूंगा, लेकिन हर दिन पढूंगा।

दोस्तो इससे होंगा यह की आप जब हर दिन सिर्फ 2 पेज ही पढ़ते हैं, तो आपको रीडिंग करने की आदत पड़ जाएगी। और उसके बाद धीरे धीरे करके आप 2 से 10 और 10 से 30 पेज भी पढ़ने लग जायेंगे। क्योंकि यह मेरा प्रैक्टिकल अनुभव है।

अपनी अच्छी आदतों को एक बार दोहराने पर खुद को कुछ इनाम दीजिए।

दोस्तों पहले के वक्त के लोगों को सिर्फ खाने पीने की और खुद को सुरक्षित रखने की चिंता रहती थीं। वे जंगलों में खाने के लिए घूमते रहते थे और जब उन्हें खाना मिल जाता था तब वे आराम से बैठ जाते थे। लेकिन आज के वक्त में हम भविष्य के बारे में सोचते हुए काम करते हैं।

दोस्तो हमारे हालात तो बदल गए हैं लेकिन हमारी मानसिकता अभी भी वही है। हम लंबे समय को देखते हुए काम ना तो चाहते हैं, लेकिन उसे कर नही पाते हैं। एक्जांपल केलिए अगर एक व्यक्ति रोज शराब पिता है, क्योंकि उससे उसे तुरंत राहत मिलती है। लेकिन 5 से 10 साल बाद यह कैंसर या किसी अन्य बड़े रोगों का रूप धारण कर लेगी, यह उसे पता होते हुए भी वह इंसान रोज शराब पिता रहता है। क्योंकि उससे उसे तुरंत राहत मिलती है और यही हमारी मानसिकता है।

लेकिन कसरत करने का फायदा हमे बहुत जल्दी नहीं मिलता है, इसीलिए हम ज्यादातर वो काम नही करते हैं, जिसमे तुरंत रिजल्ट नही मिलता हो। इसका मतलब यह है की किसी तरह से अच्छी आदतों को एकबार दोहराने से खुद को किस तरह का इनाम दे सके तो हम उस काम को जल्द ही अपना लेंगे।

उदाहरण केलिए एक व्यक्ति को अमेरिका घूमना है, और साथ ही उसको बाहर का फास्ट फूड खाने की बुरी आदत भी थी। उस व्यक्ति को इस बुरी आदत को छोड़कर घर का सेहतमंद खाना खाने की हैबिट को डालना था। इसीलिए उसने घर में ही ट्रिप अमेरिका नाम का एक अकाउंट ओपन किया। जब भी वो खुद को बाहर का खाने से रोक लेता था। तो वो उन पैसों को अपने उस अकाउंट में डाल देता था।

इस तरह उसे यह देखकर खुशी मिलती थी, क्योंकि उसका अमेरिका घूमने का सपना पूरा होने वाला था। और इस खुशी को पाने केलिए वो उस काम को लगातार करता रहता था। दोस्तो इसका परिणाम यह हुआ की उसकी बाहर का फास्ट फूड खाने की आदत भी बंद हो गई और उसका अमेरिका घूमने का सपना भी पूरा हो गया। दोस्तो इसीलिए हमे अपनी अच्छी आदतों को एक बार दोहराने पर खुद को कुछ इनाम देना चाहिए।

अपनी अच्छी आदतों ट्रैक करने केलिए अपने पास एक हैबिट ट्रैकर (नोटबुक) रखिए।

दोस्तो बेंजामिन फ्रैंकलिन जी 20 साल की उम्र से ही खुद के हाथ में एक नोटबुक रखते थे। जिसमे वो उन 13 गुणों को लिखते थे, जो उन्हें अपनाना था। अगर वे किसी दिन अपने सारे कामों को दोहराते थे, तो उस दिन वे उन सारे कामों पर टिक किया करते थे। और जिस दिन वे अपनी कुछ आदतों को किस वजह से दोहरा नही पाते थे, तो वे उसे क्रॉस कर देते थे।

इस तरह से समय के साथ उन्हें यह पता लगने लगा की वे किस हद तक अपनी अच्छी आदतों को अपना रहे हैं। जिस दिन वे अपने सारे कामों को पूरा कर लेते थे, तब वे सारे कामों को टिक किया करते थे। जिससे उन्हें एक सुकून मिलता था, और उस सुकून को पाने केलिए वे हर रोज अपनी उन अच्छी आदतों को अपनाते गए और वे एक सफल और कामयाब आदमी बन गए।

दोस्तो यहां पर बेंजामिन फ्रैंकलिन जी कहते है की “इस सुकून मैं सफलता का सुकून कहता हूं” उसके साथ साथ वे कहते हैं की “सफलता हमे रोज रोज मिलती है, नाकी 5 साल बाद में या 10 साल बाद” दोस्तो ठीक इसी तरह आप भी अपने पास भी एक हैबिट ट्रैकर रखिए, जिससे आपको पता लग जायेगा की आप कौन से काम कर रहे हैं और कौन से काम नही कर पा रहे हैं।

इस तरह से आप यह पता लगा सकते हो, की ५ साल बाद आप उस फील्ड में सफलता हासिल कर पाएंगे है या नहीं। जिस फील्ड में आपको सफलता हासिल करनी है।

Conclusion of Atomic Habits Book Summary in Hindi

दोस्तो आज आपने Atomic Habits Book Summary in Hindi ब्लॉग पोस्ट की जरिए आपने यह सीखा की हम समय के साथ नई नई आदतें अपना लेते हैं, क्योंकि उस काम को करने से हमे कुछ ना कुछ इनाम मिलता रहता है। अगर हम किसी अच्छे काम को करने केलिए खुद को कुछ ना कुछ इनाम दे, तो हम उस इनाम को पाने केलिए हम उस काम को लगातार दोहराते रहते हैं।

दोस्तो ठीक उसी तरह अगर हम अपनी बुरी आदतों को दोहराना खुद के लिए मुश्किल बना देते है, तो हम किसी भी बुरी आदत को आसानी से छोड़ सकते है। दोस्तो अगर आपको अपनी आदतों के बारे में details में पढ़ना है तो आपको Atomic Habits Book को खरीद कर पूरा पढ़ लेना चाहिए। किताब को खरीदने की लिंक नीचे दी हुई है।

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