Captain Vikram Batra Biography in Hindi | कैप्टन विक्रम बत्रा की जीवनी

Captain Vikram Batra Biography in Hindi : नमस्कार साथियों आप सभी का स्वागत है हमारे नॉलेज ग्रो हिन्दी ब्लॉग में। दोस्तो आज का यह आर्टिकल आप सभी के लिए बहुत ही प्रेरणादायक और स्पैशल होने वाला है। क्योंकि दोस्तो आज के इस आर्टिकल में हम आपके साथ शेयर करने वाले हैं, कैप्टन विक्रम बत्रा की जीवनी हिंदी में। दोस्तो अगर आप कैप्टन विक्रम बत्रा जी की जीवनी हिंदी में पढ़ना चाहते हैं, तो इस इंट्रेस्टिंग आर्टिकल को आखिर तक जरूर पढ़िए।

Captain Vikram Batra Biography in Hindi

दोस्तों भारत के जाबाज सिफाई कैप्टन विक्रम बत्रा का नाम तो आप लोगों ने पहले भी कही बार सुना होगा, जिन्हे की 1999 के कारगिल युद्ध का हीरो माना जाता हैं। दरअसल विक्रम बत्रा ने इस युद्ध में बहादुरी और शौर्य का एक ऐसा नमूना पेश किया था जिन्हे सुनकर आज भी सभी भारतीय लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

दोस्तों आज के इस ब्लॉग पोस्ट में हम कैप्टन विक्रम बत्रा जी के जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी बाते आपको बताने वाले हैं, जो यकीनन आपने पहले कभी सुनी या पढ़ी नहीं होंगी। और उसी के साथ हम आपको विक्रम बत्रा जी के लव स्टोरी के बारे में भी बताएंगे जो की कैप्टन विक्रम बत्रा की बायोपिक के आने के बाद से बहुत ज्यादा चर्चित है। तो दोस्तो चलिए इस इंट्रेस्टिंग कहानी को शुरु करते हैं।

Captain Vikram Batra Biography in Hindi | कैप्टन विक्रम बत्रा की जीवनी

दोस्तो सन 1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच में अब तक कुल 4 युद्ध लड़े गए हैं और यह हम सभी भारतीयों के लिए गर्व की बात है, क्योंकि उन चारों युद्धों में हमारे भारत देश ने पाकिस्तान को मात दे दी थी। अब इस बात में कोई शक नहीं है की, इस युद्धों में मिले जीत का पूरा पूरा श्रेय हमारे भारत के उन वीर जवानों को जाता है। जिन्होंने इन लढ़ाइयो को जितने केलिए अपने जान की कुर्बानी तक दी थी। और दोस्तो कैप्टन विक्रम बत्रा जी भी उन वीर जवानों में से एक है।

कैप्टन विक्रम बत्रा का प्रारंभिक जीवन

दोस्तो कैप्टन विक्रम बत्रा जी का जन्म 9 September 1974 के दिन हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में आने वाले छोटे से कसबे में हुआ था। इनके पिता का नाम गरीधारी लाल बत्रा है जो की एक सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल है और उनके मां का नाम कमल कांता बत्रा है, जो पेशे से एक स्कूल टीचर हैं।

विक्रम बत्रा जी का जन्म जुड़वा बच्चों के रूप में हुआ था और वो अपने जुड़वा भाई विशाल से 14 मिनिट पहले पैदा हुए थे। और दोस्तो जुड़वा होने के चलते ही घर के सभी लोग इन्हें लव कुश कहकर बुलाते थे। जिसमे लव कैप्टन विक्रम बत्रा जी का नाम था और कुश उनके छोटे भाई विशाल जी का नाम था।

कैप्टन विक्रम बत्रा का एजूकेशन (Education)

दोस्तो कैप्टन विक्रम बत्रा जी ने अपनी शुरवाती की पढ़ाई पालमपुर के DAV School से पूरी की और इसके बाद अपनी सीनियर सेकेंडरी की पढाई पालमपुर के सेंट्रल स्कूल से पूरी की। अब चुकी यह स्कूल सेना की छावनी में मौजूद था, इसीलिए विक्रम बत्रा जी ने बहुत ही कम उम्र में ही सेना के अनुशासन को समझ लिया था। साथ ही उनके पिता बचपन से ही उनको देश प्रेम की कहानियां सुनाई करते थे। जिसके वजह से उनके अंदर स्कूल के समय से ही देश प्रेम की भावनाएं जाग उठी थी।

दोस्तो विक्रम बत्रा जी शुरवात से ही पढ़ाई लिखाई के साथ साथ स्पोर्ट्स में भी काफी अच्छे थे। वह एक खिलाड़ी के रूप में अपने स्कूल को दिल्ली के यूथ पार्लियामेंट कॉमपीटेशन में नैशनल लेवल पर भी रिप्रेजेंट किया करते थे। यू तो उन्हें अलग अलग खेलो में दिलचस्पी थे लेकिन खास तौर पर टेबल टेनिस एक ऐसा खेल था, जिसमे उन्हें महारत हासिल थी।

इसके अलावा उन्हें कराटे भी बहुत पसंद था और इसमें भी उन्होंने ग्रीन बेल्ट भी हासिल की हुई थीं। और दोस्तो कहते हैं की स्कूल से आते जाते समय में विक्रम जी छावनी में मौजूद सिफाइयो का कदम ताल देखने केलिए रुक जाया करते थे। और इस तरह बचपन में ही उन्हें सेना से एक तरह का लगाव सा हो गया था।

अब स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने चंडीगढ़ के DAV College में एडमिशन ले लिया, जहा उन्होंने मेडिकल साइंस में अपनी बैचलर की डिग्री हासिल करली। और दोस्तो कॉलेज की डिग्री हासिल करने के दौरान उन्होंने एनसीसी भी ज्वाइन करली थी, जहा पर वे बेस्ट कैडेट चुने गए थे। और इसके चलते वो सन 1994 वे के गड़तन प्रदिवस के परेट का भी हिस्सा बन गए थे। जो की अपने आप में एक बहुत बड़े सम्मान की बात थी।

कैप्टन विक्रम बत्रा करियर (Career)

दोस्तो विक्रम बत्रा जी जब अपनी ग्रैजुएशन कर रहे थे, तब उन्होंने मर्चेंट नेवी में जाने केलिए एक एग्जाम दिया था। अब चुकी वे पढ़ाई में शुरवाती से ही काफी अच्छे थे, इसीलिए उन्होंने इस एग्जाम को बहुत आसानी से क्वालिफाई कर दिया और इस परीक्षा को पास करने के बाद से उनका मर्चेंट नेवी में जाने का रास्ता साफ हो चुका था। अब इस नौकरी केलिए उन्हे पोलैंड जाना था जहा उनकी सैलरी लाखो में होने वाली थी।

लेकिन फिर एक दिन अपने मां के गोद में सर रखकर लैठे हुए थे, तब अचानक उनके मन में ना जाने क्या खयाल आया की उन्होंने अपनी मां से कहा की मां में मर्चेंट नेवी में नही जाना चाहता, मुझे इंडियन आर्मी को ज्वाइन करना है। अब विक्रम बत्रा जी के द्वारा अचानक लिया गया यह फैसला उनके परिवार केलिए काफी हैरान करने वाला था। क्योंकि दोस्तो मर्चेंट नेवी में जाने के लिए उन्होंने काफी मेहनत की थी और देखा जाए तो उनके परिवार वालो का हैरान होना भी जायस था।

क्योंकि उन्होंने एक ऐसी जॉब को ठुकराया था जिसे हासिल करने केलिए बहुत लोग सालो साल कड़ी मेहनत करते हैं। लेकिन विक्रम बत्रा जी ने अपना मन बना लिया था की उन्हें अपना जीवन देश की सेवा और रक्षा करते हुए ही बिताना है। और अपने इस लक्ष को पूरा करने केलिए उन्होंने DAV College में पढ़ाई पूरी करने के बाद से साल 1995 वे में M.A English करने केलिए चंडीगढ़ के पंजाब युनिवर्सिटी में एडमिशन ले लिया।

ताकि मिलेट्री मैं जाने केलिए वे कंबाइन डिफेंस services यानी की सीडीएस का एक्जाम दे सके। और दोस्तो इस दौरान वे इवनिंग क्लासेस में पढ़ाई किया करते थे और दिन में चंडीगढ़ की ट्रेवलिंग एजेंसी के अंदर पार्ट टाइम जॉब करते थे। अगर कैप्टन विक्रम बत्रा जी चाहते तो पढ़ाई और खाने और रहने का खर्च अपने पिता से ले सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया क्योंकि वे अपने पिता के उपर ज्यादा बोज नहीं बनना चाहते थे।

विक्रम बत्रा लव स्टोरी (Captain Vikram Batra Love Story in Hindi)

दोस्तो पंजाब यूनिवर्सिटी में विक्रम बत्रा जी की मुलाकात डिंपल नाम की एक लड़की से हुई जो की उस समय में उनके क्लास मेट हुआ करती थी। पहले तो इन दोनों में सिर्फ दोस्ती हुआ करती थीं लेकिन देखते ही देखते उनकी यह दोस्ती गहरे प्यार में बदल गई। और उसके बाद दोनो ने एक दूसरे के साथ जीवन बिताने का फैसला किया। हालाकि ये दोनो अपने शादी के सपने बुने रहे थे। तभी अचानक इनके जीवन में ऐसा मोड़ आया की जिसके वजह से वे एक दूसरे से अलग हो गए।

दरअसल हुआ यह था की साल 1996 वे में विक्रम बत्रा जी ने सीडीएस की परीक्षा पास करली और इंटरव्यू में सिलेक्शन होने के बाद से उन्हें ट्रेनिंग कोर्सेस केलिए देहरादून जाना पड़ा। जहा उन्होंने इंडियन मिलिट्री अकेडमी की मानेकाशा बटालियन को ज्वाइन कर लिया था। इस बटालियन में 19 महीनों का ट्रेनिंग कोर्स पूरा करने के बाद 6 दिसंबर 1997 वे के दिन उन्हें जम्मू के सोफोर नाम के इलाके में स्थित आर्मी की फौज में भर्ती करवाया गया। इस तरह से विक्रम बत्रा जी के आर्मी के शानदार करियर की शुरुवात हुई, जिसकी कहानियां आज भी लोगों को सुनाई जाती है।

कैप्टन विक्रम बत्रा का कारगिल युद्ध में योगदान – (Vikram Batra Kargil Story in Hindi)

दोस्तो विक्रम बत्रा जी को मिलेट्री ज्वाइन करने १२ महीने के बाद कारगिल युद्ध केलिए जाना पड़ा था। और इस युद्ध में शामिल होते ही उन्होंने ऐसी वीरता दिखाई की उनको जल्द ही कैप्टन का पद सौफ कर .5140 नाम के पर्वत शिखर को पाकिस्तानी सेना से आजाद कराने की जिम्मेदारी उनके उपर सौंप दी गई। हाला की यह बहुत मुश्किल टास्क था लेकिन कैप्टन विक्रम बत्रा जी उन सिफाइयो में से एक थे, जो नामुमकिन को भी मुमकिन बनाने का दमखम रखते थे।

दोस्तो इसी जज्बे से आगे बढ़ते हुए उन्होंने जीत हासिल की और इस जीत को हासिल करने के बाद जब उनका इंटरव्यू लिया गया तब इस इंटरव्यू के द्वरान उन्होंने कहा था ये दिल मांगे मोर… दोस्तो उनके द्वारा इतने कहते ही पूरे भारत में हर जगह यही नारा गूंजने लगा था। इस इंटरव्यू में उन्होंने यह भी बताया था कि उस समय उनको शेरशाह कोड नेम दिया गया था। जिसे कुछ समय पहले बॉलीवुड मूवी शेरशाह में भी एडॉप्ट किया गया है।

दोस्तो दरअसल यह फिल्म कैप्टन विक्रम बत्रा जी के जीवन पर आधारित है। खैर कारगिल के उस युद्ध में .5140 पर यह अहम जीत हासिल करने के बाद भारतीय सेना के द्वारा .4875 को कब्जे में लेनी की अभियान शुरू की ओर इस अभियान की बागडोर भी विक्रम बत्रा जी को ही सौफी गई थी। अब विक्रम बत्रा जी इस मिशन के गंभीरता और खतरे को अच्छे से समझते थे।

इसीलिए उन्होंने इस अभियान पर निकलने से पहले उन्होंने अपने जुड़वा भाई विशाल को एक पत्र लिखकर कहा था की प्रिय कुश मां और पिताजी का ख्याल रखना, क्योंकि यहां हालात ऐसे है की किसी भी पल कुछ भी हो सकता है। और उसके बाद 7 जुलाई 1999 के दिन .4875 को जितने केलिए अभियान पर निकल पड़े। लेकिन जैसे ही वे इस शिखर की ओर आगे बढ़े तब ही पाकिस्तान के सेना ने फायरिंग करना शुरू कर दिया।

दोस्तो इसके जवाब में कैप्टन विक्रम बत्रा जी और उनके टीम ने तुरंत एक्शन लेते हुए अपनी तरफ से भी फायरिंग करना शुरू कर दी। और दोस्तो कहते है की विक्रम बत्रा जी पाकिस्तानी सैनिकों पर कहर बनकर टूट पड़े थे। जिसके चलते भारतीय सैनिकों ने कुछ ही समय में तैनात पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के नींद सुला दिया था।

विक्रम बत्रा की मृत्यु कब हुई ? (Vikram Batra death)

दोस्तो यह मिशन ऑलमोस्ट पूरा ही हो चुका था, तभी कैप्टन विक्रम बत्रा जी की नजर अपने साथी की तरफ पड़ी जो इस लड़ाई में पुरी तरह से घायल हो चुके थे। इसलिए कैप्टन विक्रम बत्रा जी ने अपने उस साथी को अपने कंधो पर उठाकर उन्हें सुरक्षित जगहों पर ले जाने लगे थे। लेकिन जैसे ही वे आगे बढ़े तभी वहा पर छिपे हुए पाकिस्तानी सैनिक ने उनके सीने पर गोली चलाई।

दोस्तो हाला की यह गोली लगने के बाद भी उन्होंने अपने साथी को एक सुरक्षित जगह पर पहुंचाया और बचे कूचे पाकिस्तानी सैनिकों पर एक बार फिर से टूट पड़े। दोस्तो कहते है की कैप्टन विक्रम बत्रा जी ने अपनी आखरी सास  लेने से पहले .4875 पर भारत का झंडा लहरा दिया था। और झंडा लहरा के तुरंत बाद ही जय माता दी कहते हुए शहीद हो गए थे।

दोस्तो इस युद्ध पर जाने से पहले उन्होंने अपने साथियों और दोस्तो से वादा किया था की “वे या तो कारगिल पर तिरंगा लहराते हुए वापस आयेंगे या फिर तिरंगे में लिपटकर” और दोस्तो कैप्टन विक्रम बत्रा जी ने अपने इन दोनो ही वादो को पूरा करके दिखा दिया।

दोस्तो कैप्टन विक्रम बत्रा जी के साहस और कुर्बानी केलिए 15 अगस्त 1999 वे के दिन उनको सबसे बड़े मिलिट्री ऑनर परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। उनकी यह शौर्यगाथा आज भी वीरता, बलिदान और देश प्रेम की एक मिसाल मानी जाती है। उन्होंने देश प्रेम केलिए अपनी जो भी कुरबानी दी उसका बदला कभी भी नही चुकाया जा सकता है।

वही अगर बात करे उनकी लाइफ पार्टनर डिंपल चीमा की तो उनके बारे में बताया जाता हैं की कैप्टन विक्रम बत्रा जी के शहीद होने के बाद उन्होंने कभी भी शादी नही की और आज भी वो एक टीचर के तौर पर काम करती है और साथ ही वो आज भी विक्रम बत्रा जी के फैमिली के टच में रहती है और उनके हर एक दुख सुख में उनके साथ खड़ी रहती है।

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Conclusion of Captain Vikram Batra Biography in Hindi

दोस्तो यह थी कहानी हमारे भारत के जाबाज सिफई कैप्टन विक्रम बत्रा की जीवनी और कहानी, दोस्तो उनकी यह कहानी पढ़कर आपको कैसा लगा हमे नीचे कमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके हमे जरूर बताए। अगर आपको हमारे द्वारा लिखा हुआ Captain Vikram Batra Biography in Hindi आर्टिकल अगर आपको पसंद आया होगा तो अपने सभी दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्सएप इसे जरूर शेयर कीजिए।

FAQ of Captain Vikram Batra Biography in Hindi :

Q-1) कैप्टेन विक्रम बत्रा कौन थे ?
Ans : हमारे भारत देश के एक जाबाज और शूरवीर आर्मी ऑफिसर।

Q-2) विक्रम बत्रा की मृत्यु कब हुई ?
Ans : ७ जुलाई, १९९९ को

Q-3) विक्रम बत्रा की बायोपिक फिल्म कौन सी है ?
Ans : शेरशाह

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