Can’t Hurt Me Book Summary in Hindi By David Goggins

दोस्तो अगर आप can’t hurt me book summary in hindi में पढ़ना चाहते हैं, तो आप can’t hurt me summary in hindi आर्टिकल को जरूर पढ़िए।

नमस्कार मेरे भाइयों और बहनों आप सब का हमारे नॉलेज ग्रो हिन्दी ब्लॉग पर स्वागत है। दोस्तो आज की यह बुक समरी आप सब के लिए बहुत ही प्रेरणादायक और लाइफ चेंजिंग साबित होने वाली है। क्योंकि दोस्तो आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से आपके साथ can’t hurt me book summary in hindi में शेयर करने वाले हैं।

Can't Hurt Me Book Summary in Hindi
Can’t Hurt Me Book Summary in Hindi

can’t hurt me book summary in hindi | can’t hurt me summary in hindi

दोस्तों David Goggins जिनके दिल में छेद होने के बावजूद और 2 हार्ट सर्जरी के बाद भी इन्हें दुनिया का सबसे टफेस्ट इंसान माना जाता हैं। क्योंकि इन्होंने सिर्फ 17 घंटो में 4013 पुल अप्स लगाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज किया है। साथ ही इन्होंने दुनिया की सबसे टफ और मुश्किल bad water race में 217 किलो मीटर दौड़ लगाई हुईं हैं।

साथ ही डेविड गोगिंस जी नेवी सील भी रह चुके हैं, जिन्होंने दुनिया की सबसे मुश्किल मिलेट्री ट्रेनिंग कही जाने वाली heel week training को सिर्फ एक बार ही नही बल्कि 3 बार कंप्लीट किया हुआ है। दोस्तो कहानी यही पर खत्म नहीं होती है, बल्की डेविड गोगिंस जी का बचपन बहुत ही मुश्किलों से गुजरा हुआ है। जहा उनके पिता उनको यानी की डेविड जी और उनके मां और भाई को लगभग हर रोज बेल्ट से मारा करते थे और साथ ही उनको हर रोज टॉर्चर भी किया करते थे।

डेविड जी और उनके मां और भाई से हर रोज अपने बिजनेस में बिना कोई पैसे दिए काफी हार्ड वर्क करवाते थे। और इसी चाइल्ड हुड टॉर्चर के वजह से डेविड जी को आगे चलकर काफी गरीबी और मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। जहा उनके अंदर बिलकुल भी कॉन्फिडेंस, मोटिवेशन और सेल्फ लव का नामोनिशान तक नहीं था। इवन वो एक टाइम पे तो उनका वेट 130 kg तक बढ़ गया हुआ था।

उन्हें नाही खुद की लाइफ पसंद थी और नाही वो खुद को पसंद करते थे। लेकिन एक दिन उनका माइंडसेट ऐसे बदल गया की जो इंसान खुद को दुनिया का सबसे बड़ा लूजर इंसान मानता था, वही इंसान आज अल्ट्रा मैराथोंन रनर, अल्ट्रा डिस्टेंस सायकिलिस्ट, मोटिवेशन स्पीकर और एक ऑथर भी हैं।

David Goggins life lessons in Hindi
Image Source : Google

दोस्तो डेविड जी चाहते हैं की जैसे वो खुद एक नॉर्मल इंसान से एक extraordinary इंसान बने हुए हैं, ठीक वैसे ही बाकी लोग भी अपनी लिमिट को पुश करके अपने हायर लेवल को अचीव कर पाए, इसीलिए उन्होंने अपनी new York Times bestselling can’t hurt me Book को लिखा हुआ है।

5 David Goggins life lessons in Hindi

जिसमे उन्होंने अपनी लाइफ जर्नी, संघर्ष और अपने अनस्टॉपेबल माइंडसेट को कैसे बिल्ड किया जाता हैं? यह सब अपने प्रैक्टिकल अनुभव से सीखकर हमारे साथ शेयर किया हुआ है। और इस can’t hurt me book summary in Hindi आर्टिकल के जरिए हम आपके साथ वही 5 David Goggins life lessons in Hindi में शेयर करने वाले हैं।

1. The 40% Rule

दोस्तो हर चीज कि एक सेफ्टी लिमिट होती है, जो उसके रीयल लिमिट से काफी कम होती है। यानी कि दोस्तो मान लीजिए आपके पास एक कार है और अगर इस कार की लिमिट 200km/ hour होंगी, और जब आप अपनी कार को 80 या 100 km की स्पीड को लेकर पुश करोगे, तो आपको लगने लगेगा कि आपके कार कि फूल लिमिट आ गई है और वो और ज्यादा फास्ट नही जा सकती या इससे ज्यादा फास्ट उसे नही जाना चाहिए।

दोस्तो ठीक वैसे ही ह्यूमन बॉडी भी इसी तरह ही काम करती है, हमारे नॉर्मल लाइफ में हमे हमारे बॉडी को हर रोज टेस्ट नही करना होता है। और ऐसे मौके हमारे लाइफ में शायद ही कभी आते होंगे, जहा आपको अपनी बॉडी को फिजिकली उसके एंड लिमिट तक पुश करना पड़ता हो।

और यहां पर डेविड गोगिंस जी यही कहना चाहते हैं कि जब हम सोचने लगते है, की हम अपनी बॉडी को और ज्यादा पुश नही कर सकते हैं, या हमारी फुल लिमिट टच हो चुकी है। एचुअल्ली तब तक हमारे बॉडी की सिर्फ 40% कैपेसिटी को ही हमने यूज की हुई होती है। और यह काम हमारे दिमाग का ही होता हैं, जो हमे बहुत जल्द ही केह देता है, की बस बेटा और मत कर, तूने अपनी लिमिट्स को पार कर लिया है।

हमारा दिमाग यह डिक्लियर कर देता है की यही हमारी मैक्सिमम लिमिट है। इसी पर डेविड गोगिंस जी बोलते हैं की, जब भी आप गिव अप करने के लिए सोचेंगे तो यह रूल याद रखो की ये आपके फुल पोटेंशियल का सिर्फ 40% ही है और असल में आपका फुल पोटेंशियल इससे काफी ज्यादा है, और आपके पास अभी भी काफ़ी ज्यादा एनर्जी बाकी है।

दोस्तो अगर हमे अपने गोल्स को सच में अचीव करना है, तो हमे अपने फुल पोटेंशियल को जानना हमारे लिए सबसे पहला स्टेप्स है। इसी रूल को इंप्लीमेंट करने के लिए हम incremental Rule का इस्तमाल कर सकते हैं।

incremental Rule

दोस्तों incremental Rule यानी की हमे हर रोज खुद को कल से एक कदम आगे पुश करना होता है। उदाहरण के लिए अगर आप हर दिन 5km दौड़ लगाते हैं, तो आपको अगले दिन आपको सिर्फ एक कदम आगे बढ़ना है, यानी की आपको अगले दिन सिर्फ 6 km ही दौड़ने की कोशिश करनी है। और उससे अगले दिन 7 km दौड़ने की कोशिश करनी है।

इस रूल का इस्तमाल आप अपनी पढ़ाई और काम में भी कर सकते हैं। क्योंकि ये रूल हमे अपने दिमाग, बॉडी और अपनी लिमिट्स पर कंट्रोल देता है।

2.The Accountability Mirror

डेविड गोगिंस जी कहते है की अगर हमे अपने गोल्स को रियलाईस करना है, तो हमे खुद को टफ बनाना पड़ता है। Accountability Mirror एक ऐसी ट्रिक है, जो डेविड जी खुद फॉलो करते आए हुए हैं, तब से जब उनके लाइफ में कुछ भी सही नही जा रहा था।

डेविड गोगिंस जी कहते है की वो एक आयने के सामने खड़े हो जाते है, और खुद से सवाल करते थे, कि मैं अभी कहा हु और मुझे मेरी लाइफ में आखिर कहा जाना है? और यह एक ऐसा प्रोसेस था, जिसमे वो खुद से इमोशनली बात कर पाते थे। कई बार वो खुद पे ही चिलाया करते थे, और ऐसे ही खुद से बाते किया करते थे। यह जानने के लिए की आखिर उन्हें अपनी जिंदगी में करना क्या है?

ये फर्स्ट एक्सप्रियंस के बाद डेविड जी काफी बदल गए थे, और दूसरे लोग उनके बारे में क्या सोचते है, इस बारे में उन्होंने सोचना ही छोड़ दिया था। उसके साथ एक और बदलाव उन्होंने ये किया। वो अब उनके सारे गोल्स को पोस्टेड नोट्स पर लिखकर आयने पर चिपका देते थे। जिससे की जब भी वे आयने से बात करते थे, तब खुद को उन गोल्स के लिए उत्तरदायी मानते थे।

एवन डेविड जी आज तक इस एक हैबिट को फॉलो करते आए हैं। दोस्तो डेविड जी के अकॉर्डिंग अगर हम भी इनकी इस अच्छी आदत को फॉलो करेंगे, तो हमारे लाइफ में भी क्लारेटी, परपज और मोटिवेशन आएगा। लेकिन एक चीज हमे समझने की आवश्कता है, और वो है Accountability Mirror को फॉलो करने के लिए ये बात का होना जरूरी है की हम खुद से हमेशा सच बोले न की झूठ।

क्योंकि अगर हम खुद से ही झूठ बोलते रहेंगे तो हमे वो गोल्स रियलाइज करने के लिए कोई भी पर्पज नही मिलेगा। इसीलिए रोज सुबह आइने के सामने आकर खुद से बात करे और आइने पर अपने लक्ष्य का पोस्टेड नोट्स लगाएं। अपने आप को यह याद दिलाओ की आप कौन हों और आपको अपनी लाइफ में आगे कहा जाना है और आगे क्या करना है?

3. Bring your Best When You Feel Your Worst

दोस्तो जब हम अपने लक्ष्यों के प्राप्ति के लिए आगे बढ़ते हैं, तो वो यात्रा काफी मुश्किल सी होती है और ये एक ऐसा फिजिकल चैलेंज होता है, जिसमे हमे खुद से जितना होता हैं, इससे पहले की हम किसी और को हराए। इसका ये भी मतलब होता हैं की ऐसे सवाल जो हमारे दिमाग में बार बार आते है, उनके जवाब हम पता कर पाए।

में आपको एक उदाहरण प्रस्तुत करके समझाता हूं, जैसे की में जिस जगह और जिस सिच्वेशन में हू, मै यहां पर क्यों हूं? और ऐसे ही कई और सवाल और इसके जवाब रेडी होंगे तो उससे मदद लेकर हम एक फास्ट डिसिजन ले सकते हैं। ये जानना बहुत जरूरी है कि अगर हम किसी चीज के लिए लढ रहे है, तो क्यों लढ रहे हैं? और यह भी एक्सेप्ट करना की समय अच्छा हो या बुरा बीत ही जाता हैं।

तो उसे खुशी खुशी आते और जाते देखो और ऐसे से ही ओवरटाइम में आपका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और आप में एक नई पावर आएगी। डेविड बस इतना कहते है की जब भी आपको लगे कि आप हार गए हो, तो ऐसे टाइम में आप हार्ड वर्क करोगे तो आप अपनी खोई हुई एनर्जी को दुबारा वापस पा सकते है।

और जैसे ही आपको मोमेंटम मिलेगा, तो आपके पास मौके आयेंगे, जिससे आप आपने ओप्पोनॉन्ट्स का भी कॉन्फिडेंस ब्रेक कर सकोगे। इसीलिए किसी भी टाइप के इंप्रूवमेंट के लिए आपको ऐसी कॉमिटमेंट दिखानी पड़ेगी, जिससे की आप अपने बुरे समय में भी अपना बेस्ट देने के लिए एकदम रेड्डी हो।

4. Callous Your Mind

दोस्तो हम जानते है की डेविड गोगिंस जी एक एडुरेंस एथिलीट रह चुके हैं और इसके लिए फिजिकल स्ट्रेंथ से ज्यादा मेंटल स्ट्रेंथ की ज्यादा जरूरत पड़ती है। दोस्तो डेविड जी ने भी इसी मंत्र का उपयोग करके अपनी मेंटल स्ट्रेंथ को बिल्ड किया हुआ है। अगर हम कोई भी ऐसा काम करते हैं, जिससे हमारी स्क्रीन पर फ्रिक्शन आए, तो हमारी स्कीन टफ हो जाती है, बिलकुल वैसे ही जैसे जिम में हमारी मसल्स स्ट्रेंथ टफ हो जाती है।

तो दोस्तो हमे हमारे माइंड को भी ठीक ऐसे ही ट्रीट और ट्रेन करना होंगा। डेविड जी खुद ऐसी सिच्वेशन में थे, जहा उनकी बॉडी पर काफी injuries थी, लेकिन इसके बावजूद वे अपनी विल पावर से आगे बढ़ते गए। दोस्तो हमारे माइंड को टफ बनाने का सिर्फ एक ही तरीका है और वो है अपने माइंड को पैनफुल और डिसकंफर्टेबल सिच्वेशन में डालना।

दोस्तो जब आप अपने माइंड को पैनफुल और डिसकंफर्टेबल सिच्वेशन दोगे, तो ऐसा भी टाइम आएगा जब आपके माइंड को पैनफुल और डिसकंफर्टेबल सिच्वेशन की आदत पड़ जायेगी। और उसके बाद तब आपके माइंड को डिसकंफर्टेबल सिच्वेशन से कुछ भी फर्क नहीं पड़ेगा और आप उस सिच्वेशन को आसानी से हैंडल कर पाओगे। हमे पैन से भागना नहीं चाहिए बल्कि जान बूझकर पैन को सहना चाहिए।

इसको अपने ऊपर इंप्लीमेंट करना आपके लिए ही फायदेमंद साबित होगा। जैसे जैसे आप अपने लाइफ में पेनफुल और डिसकंफर्टेबल सिच्वेशंस को डालते रहेंगे, तो आपको पता चल जाएगा की आप ओवर द टाइम पीरियड ऐसी सिच्वेशंस को हैंडल करना सीख गए हों।

5. The Cookie Jar

डेविड गोगिंस कहते है की हम अभी कैसे भी सिच्वेशंस से गुजर रहे हो, हमारे अंदर एक कुकी जार होता हैं। इस कुकी जार से आप ऐसी मेमोरीज और अनुभवों को निकाल पाओगे, जो आपको याद दिलाएगी, की ऐसा टाइम जब आपको आपके प्रॉब्लम से लढ़कर सफलता हासिल हुई होंगी।

कुकी जार मैथड को इस्तमाल करने के लिए आपको अपने पास्ट के experience और सक्सेस और अचिवमेंट की पुरी लिस्ट बनानी होगी। ये लिस्ट आपका एक पर्सनल कुकी जार है। जब आप कोई डिफिकल्ट काम को करने जा रहे हो और तब आपका माइंड give up करने के लिए सोच रहा हो, तो आप अपने कुकी जार से एक ऐसे अनुभव को निकाल सकते हो, जहा से आपको आपकी अचिवमेंट याद आ जाए।

इससे आपको और ज्यादा मोटिवेशन मिलेगी, और इस कुकी जार मैथड से आप अपनी पुरानी प्रॉब्लम्स भी याद करेंगे और वो याद करके आप अपनी करंट की प्रॉब्लम्स को देखेंगे और उसके साथ कंपेयर करेंगे। इससे आपको पता चल जाएगा की आपकी अभी की प्रॉब्लम्स आपकी पास्ट की प्रॉब्लम्स से कितनी सिमिलर होती है।

कोई भी चैलेंजेस में आपका माइंड  कॉन्स्टटली (constantly) ये वैल्यूएट करता है की आप अपने लक्ष्य से कितनी दूर है? और आपके माइंड में इतनी पावर होती है की वो आपको कनविंस कर सके की आप उस काम में कोई ताकत ही नहीं डाले। और अगर आप इस नेगेटिव सोच से जीत सको, तो अपना गोल को हासिल कर सकते है। भले ही वो गोल आपसे कितना ही क्यों न दूर हो।

आप इस टेक्निक को टालमटोल करने की आदत को दूर करने के लिए भी कर सकते हो। डेविड गोगिंस जी ने इस मैथड का इस्तमाल करके बहुत कुछ अचीव किया हुआ है। जिसमे उन्होंने कोई भी ट्रेनिंग नही की हुई थी और कोई भी अनुभव नहीं होते हुए भी इन्होंने मैराथन प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और उसमे काफी अच्छा परफॉर्म किया हुआ था।

इसीलिए डेविड जी कहते है की हमारा माइंड हमे काफी डराता हैं और अपने पोटेंशियल से लड़ने नही देता है। लेकिन कुकी जार मैथड को इस्तमाल करके हम अपनी पास्ट की अचिवमेंट से अपनी फ्यूचर कि अचिवमेट्स को भी हासिल कर सकते हैं।

तो दोस्तो यह थी can’t hurt me book summary in hindi में आप सभी को कैसी लगी, कृपया हमे नीचे कमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके ज़रूर बताएं और उसके साथ ही अपने दोस्तो के साथ can’t hurt me summary in hindi आर्टिकल को शेयर जरूर किजिए।

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Conclusion of can’t hurt me book summary in hindi

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