The Psychology Of Money Hindi Summary – With Pdf Download

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नमस्कार दोस्तों, आप सभी का नॉलेज ग्रो हिन्दी ब्लॉग पर स्वागत है। आज के इस आर्टिकल में हम बात करने वाले है, पर्सनल फाइनेंस के उपर लिखी गई सबसे पॉपुलर और शानदार किताब The Psychology of Money Book के बारे में।

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The Psychology of Money Book किन लोगों केलिए हैं?

  • वे लोग जो धन संपत्ति के मनोविज्ञान के बारे में जानना चाहते हैं।
  • वे लोग जो जल्द से जल्द पैसे से पैसा कमाना चाहते हैं।
  • वे लोग जो कामयाबी हासिल करना चाहते हैं।

लेखक Morgan Housel के बारे में

दोस्तो इस किताब को Morgan Housel जी ने लिखा हुआ है, और Morgan Housel जी एक इन्वेस्टर और ऑथर है। Morgan Housel जी एक इन्वेस्टमेंट फंड के पार्टनर भी हैं, जिसे चौदह लोगों ने मिलकर शुरू किया था।

दोस्तो उन्होंने वॉल स्ट्रीट जर्नल के लिए भी कई आर्टिकल लिखे हुए हैं और वो आज तीन किताबो के लेखक भी है। तो आइए उनके अनुभव और उनके द्वारा लिखी हुई किताब धन संपत्ति का मनोविज्ञान की कंप्लीट हिंदी बुक समरी को पढ़ते हैं।

The Psychology of Money Summary in Hindi | धन संपत्ति का मनोविज्ञान

दोस्तो कई बार हम यह सोचते रहते हैं की क्यों कुछ लोग ज्यादा पैसा होने के बावजूद हमेशा एक मिडिल लाइफ जीते हैं, और कैसे कुछ लोग कम इनकम होने के बावजूद भी long-term में मिलिनियर बन जाते हैं। आप चाहे माने या ना माने, इस वक्त आप पैसे को लेकर जो आप डिसीजन ले रहे होंगे, वो कुछ सालो बाद आपके फाइनेंशियल स्टेट्स पर असर डालेंगे।

इसीलिए दोस्तो क्यों न आज ही The Psychology of Money Book के जरिए धन संपत्ति के मनोविज्ञान के बारे में समझा जाए। यह किताब पर्सनल फाइनेंस को ह्यूमन बिहेवीयर के लेंस से परखती है और ये कई विषयों पर एक फ्रेस नजीरया देती है।

जैसे की बहुत सी पर्सनल फाइनेंस की किताबे फोकस करती है, ऐसी चीजों पर जैसे की स्टॉक मार्केट कैसे काम करता है? कैसे स्टॉक सेलेक्ट किए जाए या कैसे पोर्टफोलियो बनाया जाए। Morgan Housel जी लोगों और पैसों के बीच के बीच के रिलेशनशिप पर फोकस करते हैं।

The Psychology Of Money Summary in Hindi | psychology of money book in hindi Pdf download

दोस्तो इस बुक का हर एक चैप्टर एक इंसान का पैसों के प्रति बीहेवियर और एटीट्यूड को दर्शाता है। कुछ निश्चित बीहेवियर्स अच्छे नतीजे की गारंटी होती है, जब की दूसरे बीहेवियर्स असफलता के होते हैं। इस बुक में पैसे से रिलेटेड बहुत से लेसंस पर बात किया गया है। कुछ लेसंस हमारे निश्चित व्यवहार के प्रति सजग बनाते हैं और कुछ लेसंस हमे लाभकारी आदतें अपनाने केलिए प्रोत्साहित करते हैं।

दोस्तो इस किताब के सभी चैप्टर्स की खुभसूरती यह है की इन्हे कोई भी व्यक्ति कर सकता है। यह लेसंस सिर्फ ज्यादा इनकम वाले लोग या बहुत बड़ी एजूकेशन डिग्री वाले लोगों के लिए नही है। The Psychology of Money Book आपका आपके पैसों के साथ रिलेशनशिप और एटीट्यूड सुधारने की काम करेंगी।

The Greatest Shown on Earth

दोस्तो जब लेखक Morgan Housel जी कॉलेज में पढ़ते थे तब पैसे कमाने के लिए जॉब किया करते थे। जहा पर वो काम करते थे, वो लॉस एंजेलिस का एक आलीशान और मेहंगा होटल था। एक बार वहा एक गेस्ट आया, जो अक्सर वहा पर आया करता था। वो लड़का एक टेक्नोलॉजी executive था और काफी तेज दिमाग वाला भी था।

बीस साल कि उम्र में उसने सिर्फ वाईफाई राउटर के लिए key Component डिजाइन करके उसे पेटेंट करवाया था। उस यंग मिलिनर ने कई सारी tech companies को स्टार्ट किया और बाद में उसे बेच दिया। वो लड़का काफी सफल भी था, लेकिन वो पैसे के मामले में काफी अनलकी था।

वो लड़का जहा भी जाता था वहा पर वो अपने साथ नोटो की गड्डी रखता था और जिसके साथ भी बात करता था, उसे वो ये पैसे दिखाता था। वो लड़का शराब पीकर बड़ी बडी डींगे मारता था। एक दिन उस आदमी ने गाड़ी पार्क करने वाले गार्ड को बुलाया और उसे कुछ नोट्स देकर पास वाली दूकान पर जाने का ऑर्डर दिया।

गार्ड को नोट के बदले में दुकानदार ने 1000$ के सोने के सिक्के दिए। उस यंग लड़के ने उस सोने के सिक्के का क्या किया होगा? उसने वो सारे गोल्ड कॉइंस पास वाले समुद्र में फेंक दिए और उसने अपने दोस्तो को भी बुलाया और सब ने मिलकर उन गोल्ड कॉइंस को समुद्र में ऐसे फेक दिए, जैसे कोई तालाब में पत्थर फेकता हैं।

उसके कुछ ही दिनों के बाद वो यंग मिलेनियर एक होटल में एक लैंप से टकरा गया। उसके बाद उस होटल के मैनेजर ने उससे कहा की लैंप की कीमत 500$ हैं, तो इस यंग लड़के ने तमाशा खड़ा कर दिया। उसने अपने जेब से पैसे निकालकर उस होटल के मैनेजर के मुंह पर मारे और कहा की ये रहे 5000$ अब दुबारा मुझे अपनी शक्ल मत दिखाना।

शायद आप अभी यह सोच रहे होंगे की ये मात्र एक कहानी है कोई सच नहीं है। और आप यह भी सोच रहे होंगे की क्या उस यंग मिलिनियर का क्या हुआ होंगा? लेकिन दोस्तो यह कहानी एकदम सच है। इस किताब में आप ऐसी ही सच्ची कहानियां पढ़ेंगे। लेकिन इस कहानी के अंत में इस यंग मिलिनियर का दिवाला निकल जाता हैं।

उसने कुछ ही सालों में उसने जो कुछ भी कमाया हुआ था, वो सब कुछ उड़ा दिया। उसके सारे पैसे खत्म हो गए और उसके यार दोस्त भी उसे छोड़ के चले गए। दोस्तो देखा आपने पैसे से आप सब कुछ खरीद सकते है लेकिन अच्छा व्यवहार नही खरीद सकते।

चलिए एक और कहानी को पढ़ते हैं…

रोनाल्ड रीड एक दरबान था वो एक छोटे से गांव में पैदा हुआ था और पला बढ़ा था। वो अपने परिवार का पहला ऐसा इंसान था, जिसने हाई स्कूल तक की पढ़ाई की हुई थी। और उससे भी मजेदार बात यह थी की वो रोज स्कूल पहुंचने के लिए लोगों से लिफ्ट लेकर स्कूल पहुंचता था।

रोनाल्ड एक साधारण जिंदगी जी रहा था। 25 साल तक उसने एक गैस स्टेशन पर गाड़िया रिपेयर करने का काम किया। उसने जेसी पन्हे में 20 सालो तक फ्लोर की सफाई का काम किया। उसके बाद 38 साल की उम्र में उसने 2 बेडरूम का घर खरीद लिया। उसने वो घर 12000$ में खरीद लिया था और अपनी पूरी जिंदगी उसी घर में ही गुजारी।

रोनाल्ड रीड की शादी भी हुई लेकिन कोई बच्चा नहीं हुआ। जब वो 50 साल का हुआ तो उसकी वाइफ चल बसी। उसके पड़ोसी का कहना था की रोनाल्ड की हॉबी लकड़ियां काटना था। जिस दिन रोनाल्ड ने न्यूज हेडलाइन बनाई वो दिन था उसके मौत का।

यह बात 2014 की थी, वो 92 वे साल का था और उसके पास  8 मिलियन डॉलर थे, उसने 2 मिलियन डॉलर अपने 2 सौथेले बच्चो के लिए छोड़े थे और 6 मिलियन डॉलर एक हॉस्पिटल और एक बड़े लायब्ररी को डोनेट कर दिए थे।

अगर आप विकिपीडिया पर रोनाल्ड रीड सर्च करेंगे तो उसमे आपको पता चलेगा कि वो एक चौकीदार, गैस स्टेशनर अटेंडेंट, इन्वेस्टर, समाजसेवक और मिलेनियर था। अब आपके मन में यह सवाल जरूर आया होगा की ये कैसे हुआ?

दोस्तो इसमें कोई ट्रिक नही है, रोनाल्ड ने कोई भी लॉटरी नही जीती थी और नाही उसे कोई खानदानी पैसा मिला हुआ था। रोनाल्ड सिर्फ अपना पैसा बचाकर bluechip स्टॉक्स और म्यूचुअल फंड्स में इन्वेस्ट कर रहा था। बस इतनी सी बात थी। वो एक एक पैसे को सेव करके उसे स्टॉक्स और म्यूचुअल फंड में निवेश करता था।

यहा तक की उसने कभी इंट्रेस्ट भी निकाला नहीं था। उसने अपने सेविंग्स को सालो साल तक कंपाउंड किया हुआ था। और उसके मौत तक उसके पास 8 मिलियन डॉलर रक्कम जमा हुई थी। दोस्तो क्या आप कंपाउंडिन का कंसेफ्ट जानते हैं? चलिए इसके बारे मे बाद में बात करेंगे उसके पहले मै आपको एक ओर रियल स्टोरी सुनाना चाहता हूं।

कहानी नंबर 3

अब नजर डालते हैं उस आदमी की ओर जो रोनाल्ड रीड से बिलकुल हटकर था। उसका नाम रिचर्ड फ्यूस था वो एक एक्जीक्यूट था और उसने हॉवर्ड से एमबीए किया हुआ था। और वो 40 की उम्र में रिटायर्ड हो गया था। उसका अंडर 40 सक्सेसफुल पीपल के लिस्ट में उसका नाम भी शामिल था।

बड़े शहर में 18000 स्क्वेयर फुट का एक बड़ा सा बंगला था, जिसमे 2 स्विमिंग पूल, 2 लिफ्ट, 2 गैरेज और 11 बाथरूम थे। इस बंगले के मेंटेनेंस का खर्चा ही 90,000$ पर मंथ का था। इसके मेंटेनेंस में रिचर्ड ने काफी बड़ा उधार लिया हुआ था। लेकिन फिर उसके किस्मत ने करवट बदलली यानी की 2008 में फाइनेंशियल क्रासेश आया और रिचर्ड रातों रात फूट पाठ पे आ गया।

दोस्तो इन दोनो यंग मिलिनियर्स यानी की रोनाल्ड रीड और रिचर्ड जी के कहानी से हमने क्या सीखा???

फाइनेंशियल सक्सेस कोई साइंस नही है, बल्की फाइनेंस ही एक ऐसा फील्ड है, जहा रोनाल्ड जी जैसे लोग भी सफलता हासिल कर सकते हैं। एक हंबल एजुकेशन और एक्सपीरियंसेस वाला इन्सान सर्जन, आर्किटेक या इंजीनियर नही बन सकता, लेकिन फाइनेंस में रोनाल्ड रीड जैसा मामूली इंसान भी काफी बढ़िया अचीवमेंट कर सकता है।

फाइनेंशियल सक्सेस एक सॉफ्ट स्किल है जिसे कोई भी सिख सकता हैं। यह एक यूनिक फील्ड है जहा आपकी नॉलेज से ज्यादा आप कैसे बिहेव करेंगे यह ज्यादा मायने रखता है।

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फाइनेंस की फील्ड पैसे का मनोविज्ञान समझने का तरीका यह है कि, आप चाहे जहा से भी हो या जैसे भी हो, पैसा आपका दिमाग बड़ा बनाता है। बस आपको ध्यान देने और अलर्ट रहने की जरूरत है। हर कोई अमीर बन सकता है, लेकिन हर कोई हंबल नही होता हैं।

No One’s Crazy

दोस्तो हम में से हर कोई लाइफ के एक छोटे से पार्ट को ही अनुभव कर पाता है। इस अनुभव के बेसेस पर ही हम ये सोचते है, की हमे यह पता है, की यह दुनिया किस तरह से काम करती है? लेकिन असल बात तो यह है की लाइफ में हम जो भी अनुभव करते है, वो हमारे सरकम स्टांसेस और हमारी कंडीशनिंग और दूसरे कई फैक्टर्स पर डिपेंड करता है।

उदाहरण के तौर पर जो इंसान गरीबी में बड़ा हुआ हैं, वो रिस्क और रिवार्ड को लेकर उसकी सोच उस इंसान से अलग होंगी, जो अमीरी में पला बड़ा हुआ है। सन 2006 में नैशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च ने पिछले 50 साल के डाटा को लेकर ये देखने केलिए यह स्टडी किया की लोग किस बेस पर रिस्क लेते हैं।

उन्होंने पाया की किसी भी इंसान की रिस्क लेने की क्षमता उसकी पर्सनल हिस्ट्री पर डिपेंड करती है, ना की उसकी एजुकेशन और इंटेलिजेंस पर। हर इंसान का फाइनेंशियल डिसीजन अलग अलग होता हैं। जो पूरी तरह से सरकम स्टांसेस और अनुभव पर डिपेंड करता है। लोग पैसे को लेकर कोई भी निर्णय अपने पास मौजूद इनफॉर्ममेंशन के बेसेस पर ही लेते हैं।

Luck And Risk

दोस्तो Luck And Risk एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। हमारी सफलता में लक का बहुत ही बड़ा रोल होता हैं। और ये हमारी लाइफ को काफी हद तक इफेक्ट भी करता है। उदाहरण के तौर पर…

1968 में अमेरिका का एक लेकसाइड स्कूल दुनिया के कुछ गिने चुने स्कुल्स में से एक था। जहा पर 3000 डॉलर का कंप्यूटर था। उस साल दुनिया भर में तकरीबन 33 करोड़ बच्चे हाईस्कूल में पढ़ रहे थे। जिनमे से सिर्फ 300 बच्चे ही लेकसाइड स्कूल में पढ़ रहे थे और बिल गेट्स उन्ही में से एक थे।

बिल गेट्स कहते है कि अगर वो लेकसाइड स्कूल नही गए होते तो आज शायद माइक्रोसॉफ्ट भी नही होता। बिल गेट्स के साथ लेकसाइड स्कूल में कैंट्स इवान नाम का एक लड़का था, जो बिल गेट्स का काफी अच्छा दोस्त हुआ करता था और बिल गेट्स की तरह बहुत ही अच्छा कंप्यूटर स्टूडेंट भी था। जो की फ्यूचर में माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनी को बना सकता था।

लेकिन दुर्भाग्य वश उसकी एक एक्सीडेंट में मौत हो गई। यह बैड लक का एक उदाहरण है, क्योंकि हाई स्कूल में पढ़ रहे किसी बच्चे का माउंट एवरिंग के दौरान मारे जाने की पोसिब्लिटी करोड़ों में से एक थी। इसी तरह आपका कोई इन्वेस्टमेंट फेल हो जाता हैं, तो हो सकता है की उसके पीछे का कारण आप नही बल्कि आपका लक हो सकता है।

Never Enough

कर्ट वॉनगट और जोसेफ हेलर दोनो ही अमेरिकन लेखक थे। एक बार वो दोनो किसी बडी पार्टी में गए हुए थे। वहा कर्ट ने जोसेफ जी को कहा की इस पार्टी का जो होस्ट है, वो एक फंड मैनेजर है और वो एक दिन में इतने पैसे कमाता है। जितना जोसेफ अपनी जग प्रसिद्ध नोवेल से भी आज तक नही कमा पाए हैं।

यह सुनकर जोसेफ जी ने कहा कि हा, यह सही है लेकिन मेरे पास कुछ ऐसा है जो उसके पास कभी नही होंगा। और वो है Enough यानी की बहुत। दोस्तो इंसानी दिमाग की प्रवृति है की यह हमेशा ज्यादा की तलाश में रहता है और चाहे हमारे पास जितना भी क्यों न हों। लेकिन फिर भी हम दूसरो को देखकर उनसे खुद को कंपेयर करते हैं। और हमेशा ऐसी चीजे चाहते हैं, जो दूसरो के पास है।

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दोस्तो enough का मतलब यहां पर यह नही है की आप बहुत कम में खुश हो जाए और अपनी लाइफ को मुश्किलों में बिताए बल्की यहां पर enough का मतलब यह है की आपको यह क्लेरिटी होनी चाहिए की कितना पैसा आपके लिए enough होगा। बजाय इसके की सिर्फ पैसे के पीछे भागते रहना।

दोस्तो कुछ ऐसी चीजे है जैसे की reputation, freedom, family, friends, Love, और happiness आदि… चीजे है जिन्हे छोड़कर सिर्फ पैसे कमाने के पीछे लगना मूर्खता है।

Confounding Compounding

दोस्तो आसान भाषा में कंपाउंडिन का मतलब समझा जाए तो हम यह कह सकते हैं, की कोई भी इन्वेस्टमेंट करने पर आपकी जो कमाई होती है, उसे फिर से इन्वेस्ट करना कंपाउंडिन कहलाता है। इसमें आपको प्रिंसिपल के साथ उसके इंटरस्ट पर भी इंट्रेस्ट मिलता है।

दोस्तो जब यह किताब लिखी गई थीं तब वॉरेन बफेट जी की टोटल नेट वर्थ 84.5 बिलियन डॉलर थी और जिसमे से 81.5 बिलियन डॉलर रक्कम उनके 65 वे जन्म दिन के बाद आए थे। वॉरेन बफेट जी 10 साल की उम्र से ही investing करना शुरू कर दिया था। अगर उन्होंने वे 30 साल की उम्र के बाद इन्वेस्टमेंट करना शुरू कर देते, तो उन्हें सेम रिटर्न नहीं मिलता।

और उनकी टोटल नेट वर्थ 84.5 बिलियन डॉलर की जगह सिर्फ 11.9 मिलियन डॉलर ही होते, क्योंकि कंपाउंडिन के लिए पैसों की नही बल्कि टाइम की जरूरत होती है। वॉरेन बफेट इसीलिए सफल नहीं थे क्योंकि वे अच्छे इन्वेस्टर थे, बल्की वो इसीलिए सफल और कामयाब है क्योंकि वे लंबे टाइम के लिए बहुत अच्छे इन्वेस्टर बने रहें है।

Getting Wealthy VS Staying Wealthy

अमीर बने रहने के लिए थोड़ा सा पागलपन और किफायती होना जरूरी है। जैसे लिवर मोर अमेरिका के एक ट्रेडर थे। 1929 के I ग्रेड डिप्रेशन के समय पूरी दुनिया के इन्वेस्टर के पैसे डूब रहे थे, तब ऐसे कठिन समय में लीवर मोर ने 3 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा कमाएं।

लेकिन इसके बाद भी वे रुके नहीं और इसके बाद भी वे कठिन से भी कठिन दाव लगाते गए और बदकिस्मती से 4 साल के भीतर ही उन्होंने अपनी सारी दौलत गवा दी और खुद अपनी जान लेली। दोस्तो लीवर मोर की तरह बहुत लोग ज्यादा पैसे तो कमा पाते है, लेकिन इन पैसे को संभालकर नही रख पाते है।

पैसे कमाने के लिए रिस्क लेने और ऑप्टिमेस्टिक रहने और अपने ऊपर बिलीव करने की आवश्यकता होती है। वही अपने पैसे को बचाने के लिए बहुत बड़े जोखिम से बचने और किफायती बनने और इस बात को एक्सेप्ट करने की आवश्यकता होती है की आपकी सफलता में लक का भी महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।

यहा पर किफायती होने का मतलब यह नहीं है की कंगालो की तरह रहे, बल्की इसका मतलब सिर्फ इतना है की आप बिना वजह के अपने पैसे खर्च ना करे और दिखावे में न पडे।

Tails, You Win

लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट का आपके रिटर्स पर बहुत प्रभाव पड़ता है। लेकिन यह जानना बिलकुल भी इंपोसिबल है की कौन सा इन्वेस्टमेंट लंबे समय के लिए सबसे अच्छा टेरर देगा। कोई भी इंसान हमेशा सही डिसीजन नही ले सकता हैं और एक अच्छा इन्वेस्टर बनने के लिए आपको 10 में से सिर्फ 6 बार सही होने की आवश्कता है।

यानी की दोस्तो असफलता भी सफलता का एक हिस्सा है। उदाहरण प्रस्तुत करके समझाया जाए तो वाल्ट डिज्नी के शुरुवाती दिन काफी बहुत ही मुश्किल थे, और सन 1930 तक उन्होंने 400 से भी ज्यादा कार्टून बनाए थे, लेकिन उनमें से कोई भी ज्यादा सफल नहीं रहा। और इसके वजह से वाल्ट डिज्नी का स्टूडियो बैंक क्रप्ट हो गया।

लेकिन यह सब कुछ बदल गया जब वाल्ट डिज्नी जी ने स्नो व्हाइट एंड सेवन डोर्स को रिलीज किया। स्नो व्हाइट एंड सेवन डोर्स के वजह से वाल्ट डिज्नी जी ने सिर्फ 6 महीने में 8 मिलियन डॉलर से भी ज्यादा कमाई की। जो की कंपनी के अब तक की कुल संपत्ति से ज्यादा थी।

जब आप इस बात को मान लेते है और एक्सेप्ट कर लेते है की अमीर बनने के लिए हमे हमेशा सही होना जरूरी नहीं, तब आप लाइफ में बहुत बार फेल होने के बाद भी जीत सकते है।

Freedom

दोस्तो वेल्थ की सबसे अच्छी फार्म वो है जिसमे आप जो करना चाहे वो कर सके। एंगस स्कैम बैल यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन में एक साइकोलॉजिस्ट थे। उन्होंने यह जानने के लिए एक रिसर्च किया की वो कौन सी चीज है जो लोगो को असली खुशी देती हैं?

उन्होंने अपनी रिसर्च में पाया की यू तो हर कोई अलग अलग चीजे चाहता है, लेकिन एक चीज सब में कॉमन थी और वो है अपनी लाइफ के उपर आपका पूरा कंट्रोल होना। खुश रहने के लिए आपको आपके लाइफ के उपर पूरा कंट्रोल होना अच्छी सैलरी, बड़ा घर और प्रेस्टिजेस जॉब से भी इंपोरटेंट हैं।

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जब आप कोई ऐसा काम करते है जो आप नहीं करना चाहते हैं। तो जाहिर सी बात है की आप उस काम से नफरत करते हैं। लेकिन अगर आप अपना मन पसंद काम ऐसे वातावरण में करते हैं, जिस पर आपका कंट्रोल हो, तब भी आप इस काम से नफरत करने लग जायेंगे।

क्योंकि अमेरिकन सुशोलॉजीस्ट कार्ल पिल्मर ने हजारों बुजोरगो का इंटरव्यू लिया और उनसे पूछा की अपनी पूरी जिंदगी में कौन से ऐसे महत्त्वपूर्ण लेसंस सीखे? उनमें से लग भग सभी ने हार्ड वर्क करने और ज्यादा पैसे कमाने पर ज्यादा जोर नही दिया बल्की उन्होंने अच्छे दोस्त बनाने और अपनी परिवार के साथ क्वॉलिटी टाइम बिताने की बात कहीं।

Man in the Car Paradox

जब आप किसी को अच्छे से कार चलाते हुए देखते हैं, तो आपके दिमाग में यह बाते नही आती की वाव इस गाड़ी का ऑनर कितना कूल है, बल्की आपके दिमाग में सबसे पहले यह बात आती है कि काश यह गाड़ी मेरे पास होती, तो लोग मुझे कितना कूल समझते।

यहां मुश्किल यह है की आपको लगता है की आपके पास अच्छी और महंगी चीजे होंगी तो लोग आपकी तारीफ करेंगे। बल्की जब आप दूसरो की जगह पर खुद को रखकर देखेंगे तो आप खुद ऑनर की तारीफ नही करेंगे। हम सभी इंसानों की ऐसी सोच होती है की अगर हम अमीर होंगे तो लोग हमारी तारीफ करेंगे और हमे ज्यादा पसंद करेगे।

लेकिन सच यह है की दूसरे लोग आपको आपके अमीरी के बेसेस पर आपको पसंद नहीं करते है, बल्की आपकी अमीरी को एक बैंच मार्क बनाकर खुद ये सोचते है की वो भी आपके जैसे अमीर होते, तो लोग भी उनकी तारीफ करते और उन्हें ज्यादा पसंद करते।

दोस्तो विनम्रता और काइंडनेस और इमप्थी यह ऐसी चीजे है, जो वेल्थ के मुकाबले लोगों की नजरो में आपको ज्यादा पसंदीदा और ज्यादा रिस्पेकटेड बनाती है।

Welth is What you Don’t See

ज्यादातर लोग जो महंगी और फैंसी कार चलाते हैं, वो एचुअल में अमीर नही होते है। बल्की वे ज्यादातर अपना पैसा अपनी महंगी गाड़ी पर खर्च कर देते है। और एक महंगी कार यह बताती है की ऐसे लोगो को पैसे की समझ बिलकुल भी नहीं होती हैं।

हम इंसान अक्सर बाहरी इनफॉर्ममेंशन की बेसेस पर दुसरे लोगो को जच करते हैं। जैसे की कोई कौन सी गाड़ी चलाता है और कैसे घर में रहता है और किस तरह के कपड़े पहनता है। लेकिन वास्तव में असली वेल्थ अदृश्य या अनसीएबल होती है। ये ऐसे एसेट्स होते है, जिन्हे बाहरी दिखावटी चीजों में नही बदला जाता हैं।

रिच होना सिर्फ आपके करंट इनकम को दर्शाता है, वही वेल्थी होने का मतलब है, आपकी करंट सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट कितनी है। ताकि बाद में आप बिना किसी परेशानी के अपने पैसे खर्च कर सके। अमीर होने का मतलब यह नहीं है की आप वेल्थी है।

अमीर दिखने की इच्छा के पीछे का सबसे बड़ा कारण यह भी है, की ऐसे रिच मॉडल्स को ढूंढना काफी आसान है और वे आसानी से दिख भी जाते है। वही पर एक वेल्थी रोल मॉडल ढूंढना काफी मुश्किल है, क्योंकि वेल्थ हमेशा छिपी रहती है।

Save Money

आपके खर्च करने के बाद बचे पैसों को जमा करना ही वेल्थ कहलाता है। वेल्थ को खट्टा करने के लिए आपको ज्यादा इनकम की जरूरत नहीं है, बल्की आपको हाई सेविंग की जरूरत है। आपकी वेल्थ की वैल्यू आपके जरूरतों और इच्छा पर निर्भर करती है।

दोस्तो अगर आप जानता चाहते हैं की अपने पैसों को आसान तरीकों से कैसे बचाया जाए तो आप नीचे दिए गए आर्टिकल को जरूर पढ़िए।

दोस्तो आपकी सेविंग्स आपके इनकम और आपके ego के बीच का गैप हैं। आपकी सेविंग्स बचाने का सबसे अच्छा तरीका अपनी इनकम को बढ़ाना नही है, बल्की अपनी विनम्रता को बढ़ाना है। अगर आप अपनी इच्छाओं को कम करेंगे तो आप कम खर्चा करेंगे।

आप अपनी इच्छाओं को तभी कम कर सकते हैं, जब आप इस बात पर ज्यादा ध्यान ना दे की लोग आपके बारे में क्या सोचते है? पैसा बचाने के लिए आपको किसी कारण की जरूरत नहीं है। बिना किसी गोल के सेविंग्स करना आपको लंबे समय तक फ्लेक्सिब्लिटी देता है और आपके पास हर चीज के लिए ज्यादा ऑप्शंस होते है।

फ्लेक्सिब्लिटी आपको एक कंपेटिटिव advantage यानी की फायदा देता है, जिसका मतलब है, आप किसी अच्छी जॉब का वेट कर सकते हैं। या कोई नई स्किल्स को सीखने के लिए टाइम निकाल सकते है।

Reasonable Rational

आप एक रोबोट नही है एक इंसान नही है, इसीलिए आप से गलतियां होना आम बात है। आप पूरी तरह रैशनल होकर अपने फाइनेंशियल डिसीजन नही ले सकते हैं। आपको रैशनल से ज्यादा रीजनेबल होने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। और यह ज्यादा रियलिस्टिक है और लॉन्ग टर्म में आपके अमीर बनने चांसेस को भी बढ़ाता है।

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Conclusion Of The Psychology Of Money Summary in Hindi

दोस्तो आज आपने The Psychology Of Money Summary in Hindi आर्टिकल से सीखा की👇👇👇

जब लाइफ में आपके साथ अच्छी चीजे हो रही हो, तो ह्यूमिलिटी को फॉलो करे और जब बुरी चीजे हो रही हो तो, फरगिवनेस और कैंपेशन को फॉलो करे।

एक हंबल एजुकेशन और एक्सपीरियंसेस वाला इन्सान सर्जन, आर्किटेक या इंजीनियर नही बन सकता, लेकिन फाइनेंस में रोनाल्ड रीड जी जैसा मामूली इंसान भी काफी बढ़िया अचीवमेंट कर सकता है।

कंपाउंडिन के लिए पैसों की नही बल्कि टाइम की जरूरत होती है। जब आप इस बात को मान लेते है और एक्सेप्ट कर लेते है की अमीर बनने के लिए हमे हमेशा सही होना जरूरी नहीं, तब आप लाइफ में बहुत बार फेल होने के बाद भी जीत सकते है।

कम ego का मतलब है, ज्यादा वेल्थ और सेविंग करना एक तरह से आपकी इनकम और आपके ego के बीच का एक गैप है। अपने पैसे को इस तरह से मैनेज करे कि आप रात को बिना किसी फिक्र के आराम से सो सकें।

अगर आप एक अच्छे इन्वेस्टर बनना चाहते हैं तो अपने इन्वेस्टमेंट के टाइम को बढ़ाए, क्योंकि टाइम ही इंवेस्टमेंट की सबसे बड़ी ताकत है। पैसे सेव करने के लिए किसी स्पेसिफिक गोल की जरूरत नहीं है, इसीलिए बचत जरूर करें। क्योंकि ये आपको भविष्य में फ्रीडम देता है।

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अपने पैसों का इस्तमाल अपने टाइम पर कंट्रोल करने के लिए करे, क्योंकि अपने टाइम पर पूरा कंट्रोल होना एक खुशहाल जीवन के लिए बहुत जरूरी है। दूसरो के दिखावे पर ना पड़े बल्की एक Welthy इंसान बनाने पर ध्यान दें।

फाइनेंशियल प्लानिंग करते वक्त दूसरो पर आंख बंद करके दूसरो की नकल ना करें। क्योंकि आपको यह पता नही है की सामने वाला किस चीज में क्यों और कितने समय के लिए इन्वेस्ट कर रहा है।

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