Geeta Saar in Hindi | गीता सार इन हिंदी (गीता के 21 सूत्र)

दोस्तों अगर आप गीता सार इन हिंदी में पढ़ना चाहते हैं? तो आप Geeta Saar in Hindi आर्टिकल को जरूर पढ़िए।

नमस्कार मेरे भाईयो और बहनों आप सब का हमारे नॉलेज ग्रो हिन्दी ब्लॉग पर स्वागत है। क्योंकि दोस्तो आज में आपके साथ भगवत गीता सार इन हिंदी में शेयर करने वाला हु। इसीलिए आप सब इस लाइफ चेंजिंग पोस्ट को आखिर तक जरूर पढ़िए।

Geeta Saar in Hindi | गीता सार इन हिंदी
Geeta Saar in Hindi | गीता सार इन हिंदी
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भगवत गीता सार इन हिंदी | Geeta Saar in Hindi

तो दोस्तों बिना समय को गवाएं बढ़ते हैं, इतिहास के उस सबसे बड़े ज्ञान के खजाने के तरफ जो इस दुनिया की ही नही बल्कि इस श्रृष्टि के सबसे बड़े मोटिवेशनल स्पीकर श्री कृष्ण के द्वारा दिया गया है। और जिसको बड़ी आसानी से समझ कर और उसे फॉलो करके कोई भी इंसान वो सब हासिल कर सकता है, जो वो चाहता है।

चाहे खुशी पाना हो, चाहे सफलता हासिल करनी हो, या चाहे मैनेजमेंट सीखना हो, या चाहे अपनी जिंदगी को पहले से बेहतर बनानी हो? श्री भगवद गीता से ज्यादा महान दूसरा कोई और कोर्स नही हो सकता हैं। मैं आपको सिंपल से सिंपल शब्दों में कैसे भी करके भगवत गीता सार इन हिंदी में अच्छी तरह से समझाने की कोशिश करूंगा।

इस दुनिया में कुछ भी अच्छा या बुरा बिना किसी कारण के नही होता है।

दोस्तो एक बार पुराने टाइम में एक गांव में एक गरीब औरत रहती थी, और जब उसको एक बच्चा हुआ, तब वो बिलकुल स्वस्थ था। लेकिन एक बार किसी इंसीडेंट के वजह से उस बचे के हाथ की एक उंगली कट गई, उस बच्चे की मां बहुत दुखी हो गई और वो सोचने लगी कि मेरे बच्चे के साथ ही ऐसा होना था।

और वो औरत हमेशा भगवान को इस बात के लिए कोसती रहती थी, कि पता नहीं भगवान को मेरे से क्या दुश्मनी थी, कि मेरे ही बच्चे की उंगली काट ली। समय बीतता गया और उस गांव में एक दिन साधु के वेश में एक मायावी राक्षस आया। वो राक्षस अपनी शक्तियां बढ़ाने के लिए बहुत सारे बच्चों की बली चढ़ाना चाहता था।

उसने उस गरीब औरत के बच्चे को भी किडनैप कर लिया। लेकिन जैसे ही वो राक्षस उस बच्चे की बली चढ़ाने लगा, तो उसको अपनी गुरु के द्वारा बताई गई शर्त याद आ गई की जिस भी बच्चे की तुम बली चढ़ाओ गे ना, उसके सभी अंग सही सलामत होने चाहिए। और उसके बाद उस राक्षस को मजबूरी में उस कटी हुई उंगली वाले बच्चे को जिंदा छोड़ना पड़ा।

उस दिन इस बच्चे के मां को यह रियलाइस हुआ की इस दुनिया में जो कुछ भी होता हैं ना, चाहे वो अच्छा हो रहा है या बुरा हो रहा है, वो कभी भी बिना किसी कारण के नही होता है।

आप किसी भी कंडीशन में कर्म किया बीना और उसका फल पाए बिना नहीं रह सकते है।

दोस्तो ऐसा हो ही नही सकता है की इंसान का शरीर 1 सेकंड के लिए भी बिना कर्म किए रह सके। ऐसा हो ही नही सकता कि इस श्रृष्टि का एक कण एक सेकंड के लिए भी बिना किसी कर्म को किए रह सके। कर्म करना हमारे जीवन का अभिन्य हिस्सा है।

दोस्तो अगर हम सोते भी है ना लेकिन हमारा दिमाग नही सोता है, हम सपने देखते हैं, सांस लेते हैं, हमारे शरीर के हर अंग में करोड़ों सूक्ष्म कण अपना काम करने में लगे रहते हैं। हम कर्म किए बिना कभी भी नही बच सकते है। और ऊपर से भगवान यह भी बोलते हैं की हमे किसी भी कर्म में बंध कर नही रहना चाहिए।

दोस्तो आप confuse हो गए ना, देखिए हम ना किसी भी पल कोई भी काम किए बिना रह सकते है, और ना ही हमे कर्म में बंध करके रहना चाहिए। कहने ने का मतलब यह है कि हम जो भी करते हैं, वो यह मान करके करे कि करने वाला मैं नही हु, बल्की करने वाला तो ऊपरवाला है। मैं तो सिर्फ कारण मात्र हु उस काम को करने के लिए।

इस काम को मैं नही कर रहा हू, बल्की ये काम मेरे द्वारा कराया जा रहा है। और जब हमारी सोच इस लेवल की होंगी, तो हमे कभी भी कोई भी दुख नहीं मिलेगा। हमे कभी भी पश्चाताप नही होगा और नाही हमे कभी भी घमंड होगा।

आजाद होकर जीने वाला ही वास्तविक मनुष्य होता हैं।

दोस्तो दूसरो के गुलाम रहकर खुश रहने के बजाय आजाद होकर खुद के दुखो का सामना किया जाना चाहिए। भले ही आपके जिंदगी में कितने ही कष्ट क्यों न हो। लेकिन अगर आप आजाद होना तो आप ही वास्तविक मनुष्य हो। श्री भगवद गीता में गुलामी को मौत से भी बुरा बताया गया है। दोस्तो इंसान किस किस का गुलाम नही है?

वो अपने दिमाग का गुलाम है, अपने विचारो का गुलाम है और उसके साथ अपनी आदतों का भी गुलाम है। कही काम कर रहे हो ना, तो किसी के गुलाम होकर काम कर रहे हैं। दोस्तो दूसरो का साथ लेना और दुसरो का गुलाम बनना, इस के बीच में एक हल्की सी लाइन और इस लाइन के उधर आप चले गए ना, तो समझ लेना की आप किसी के गुलाम बन गए हैं।

दोस्तो वो लाइन है अपना खुद सेल्फ रिस्पेक्ट, जब तक कोई भी इंसान अपना सेल्फ रिस्पेक्ट के साथ कोई भी काम करता है, तब तक वो आजाद है। लेकिन जब वो दुसरो के सामने इतना गिर जाता हैं की उस इंसान की सेल्फ रिस्पेक्ट खत्म होने लगती है, तो उस इंसान की जिंदगी समस्याओं से घिर जाती है, और वो गुलाम बन जाता हैं।

इसीलिए दूसरो का गुलाम रहकर खुश होने से अच्छा है की आजाद होकर खुद की समस्याओं का सामना किया जाए।

वासना, गुस्सा और लालच ये सब तीनों नर्क के दरवाजे है।

दोस्तो बिना किसी मकसद के तो हम लाइफ नही जी सकते है। और मकसद को पूरा करने के लिए हमारे मन में डिजायर का होना बहुत ही जरूरी है। लेकिन अगर वो मकसद केवल और केवल खुद तक ही सीमित रह जाए और आपको इस बात से कोई फर्क न पड़े की आपकी डिजायर्स के वजह से सामने वाले का कितना नुकसान हो रहा है?

तो दोस्तो ऐसी डिजायर बहुत दुख देनी वाली बन जाती है। क्योंकि कभी न कभी उसके गलत नतीजो का मुकाबला आपको करना ही पड़ेगा। इसीलिए अपने मन में ऐसी डिजायर्स ही रखनी है, जिससे दूसरो का नुकसान नहीं हो।

गुस्सा:

दोस्तो गुस्सा हमारे कमजोर होने का सबसे बड़ा सबूत है। जो इंसान बहुत ज्यादा गुस्सा करता है ना, वो इंसान बहुत ज्यादा कमजोर होता हैं। ठीक है किसी के अच्छे के लिए गुस्सा होने की प्रैक्टिस करली तो यह समझ में आ जाता है। लेकिन दोस्तो ये क्या बात हुई बीपी हाई हो गई, आंखे लाल हो गई और पूरा आउट ऑफ कंट्रोल ही हो गया…

लालच :

दोस्तो आपने सोने की मुर्गी के बारे में तो जरूर कहानी सुनी होगी। जो मुर्गी एक दिन में एक सोने का अंडा दे देती थीं। लेकिन एक दिन उस मुर्गी के मालिक ने लालच में आकर ऐसा सोचा कि भैया ये मुर्गी हर रोज एक सोने का अंडा दे ही रही है, तो इसके पेट में न जाने कितने अंडे होंगे? और में हर रोज सिर्फ एक अंडा नही ले सकता।

में आज ही इस मुर्गी का पेट काट कर सभी अंडो को बाहर निकाल लूंगा और इस लालच के वजह आखिर क्या हो गया ?? सोने की अंडे देने वाली वो मुर्गी मर गई और अगले दिन से उस मुर्गी के मालिक को कुछ भी नही मिला। जितना उसको मिल रहा था ना, उसके लालच के वजह से, वो भी उसके हाथ से छीन ले लिया गया।

दोस्तो इसीलिए वासना गुस्सा और लालच ये तिन्हो नर्क के दरवाजे है, और में मरने के बाद वाले नर्क की बात नही कर रहा हू, बल्की नर्क समान जिंदगी जीना मर कर नर्क जाने से भी बुरा है।

इंसानियत के सिवाय इस दुनिया में कुछ भी नहीं रहता है।

इंसान जब पैदा होता है, तब वो नंगा आता है और जब वो मरता है, तब उसको ऐसे ही जला दिया जाता हैं। उसके साथ में कुछ भी नही चला जाता हैं। दोस्तो जिंदगी में आपको जो कुछ भी यहां आने पर मिला है, वो आपके आने से पहले किसी और का था और जब आप यहां से चले जाओगे, तो वो सब किसी और का हो जायेगा।

जो पैसे आज आपके पास है ना, जो नाम आज आपके पास है ना और जिस पोजिशन पर आज है, उस पोजिशन पर आपसे पहले कोई और था, आज भले ही आप हो लेकिन कल कोई और आपसे वो जगह छीन लेगा। दोस्तो यही इस श्रृष्टि का नियम है और ये भगवद गीता की वो सबसे बड़ी सिख है, जो हर एक पृथ्वी वासी को समझनी चाहिए।

तो अगर बदलाव ही इस दुनिया का नियम है, तो ऐसी कौन सी चीज है जो हमेशा रहती है? कोई तो ऐसी चीज जरूर होंगी, जो हमारे मरने के बाद भी इस दुनिया में रहेगी ?? और वो चीज है “इंसानियत” दोस्तो सबसे पहले आप एक अच्छा इंसान बनिए और हर एक मनुष्य उस परमात्मा का अंश है। और हमारे सीधे तार उस परमात्मा से जुड़े हुए हैं।

दोस्तो हमारी आत्मा कभी भी गलत नही हो सकती है। पर हम शरीर के सुखों के लिए गलत कर्मो को करने में लग जाते है। और उनका नतीजा भी गलत होता हैं। खैर छोड़िए आज हमारे पास जो कुछ भी है, चाहे हमारा प्यार हो, या कोई रिश्ता हों, या पैसा हो या नाम हो, वो सब हमसे एक ना एक दिन जरूर छीन जायेगा या जरूर दूर चला जायेगा।

और दोस्तो यही श्रृष्टि का नियम है कि जो कल किसी और का था, वो आज आपका है, लेकिन आज जो आपका है ना, वो आने वाले दिनों के बाद किसी और का हो जायेगा।

जैसा आप सोचते हों, वैसा आप बन जाते हो।

दोस्तो आज आप अपनी लाइफ में जो कुछ भी हो? वो केवल और केवल आपकी सोच के वजह से हो। आज कोई भी इंसान अगर किसी लेवल पर है ना, चाहे वो लेवल उपर हो या नीचे की हो, वो सिर्फ उस इंसान की सोच के वजह से हैं। अगर एक बिखारी भी अमीर बनना चाहता है ना और वो अगर बनना चाहे तो वो अमीर बन सकता है!

दुनिया के कोई मायका लाल में इतनी हिम्मत नही है की उसे अमीर बनने से रोक सके। और अगर एक अमीर इंसान बर्बाद होना चाहता है ना, तो वो अपनी सोच से बर्बाद हो सकता हैं। अगर कोई क्रिकेट का भगवान है ना, तो वो उसकी सोच के वजह से, क्योंकि जैसा आप सोचते हैं ना, ठीक वैसा ही आप बन जाते हैं। अगर आपने किसी मंजिल को जीत लिया है, ना तो उसको एचुअल में जितना मात्र एक औपचारिकता रह जाती है।

शांत इंसान वही है, जिसकी बुद्धि और आत्मा एक पक्ष में है।

भगवद गीता से मिली सिख और इस आर्टिकल की 7 वी सिख यह है, की इस दुनिया में सबसे शांत इंसान वो है, जिसकी बुद्धि और आत्मा एक पक्ष में है। जिनका दिमाग और दिल एक तरफ है, वो इंसान कभी भी खुश नही रह सकता हैं। जिसकी विचारो में बहुत सारी इच्छाएं होती है और जब इच्छाएं पूरी नहीं हो जाती है, तब उस इंसान के अंदर क्रोध पैदा होने लग जाता हैं।

की मेरा यह काम क्यों नहीं हो पा रहा है? अगर आप अपने आपको काबू में करके वो कर पाते है, जो आप करना चाहते हैं, और जो वास्तव में सही है और वो आपको संतुष्टि देता है, और जो की आपको वास्तव में करना चाहिए। तो आपको खुश रहने से कोई भी नही रोक सकता हैं।

हमारे मन का अशांत रहने का सबसे बड़ा कारण यही है कि हम बहुत सारी इच्छाओं की पुरी होने की शर्त पर अपनी खुशियों को एक कोने पर बांध कर रख देते है। जब की हैप्पीनेस क्या हैं (it’s state of mind) खुशी एक मानसिक अवस्था होती है। इसीलिए कहा जाता हैं की जो आपका मन (अंतरात्मा) करे, वो किजिए।

अगर आपका मन करता है की खुले आसमान में उड़ान भरू तो आप उड़ान भरिए। और उसके साथ ही अपने विचारो को दिल से सहमत रखिए।

कोई भी काम अच्छा या बुरा सिर्फ उस काम को करने के पीछे के इरादे से निश्चित होता हैं।

दोस्तो कोई भी काम अच्छा और बुरा, वो केवल एक वजह से बनता है और वो है, उस काम को करने के पीछे आपका इरादा कैसा है? आप उस काम को करना क्यों चाहते हैं? क्या आप उस काम को इसीलिए कर रहे हैं, क्योंकि जिससे आपका कोई स्वार्थ पूरा हो, या आप इसीलिए काम कर रहे हैं की किसी का भला हो जाए।

काम भले ही एक हो लेकिन उसका नतीजा इस बात पर डिपेंड करता है की आपका उद्देश्य सही है या बुरा हैं। महाभारत की युद्ध में पांडव भी युद्ध कर रहे थे और कौरव भी कर रहे थे, लेकिन दोनो के उद्देश्य बिलकुल विपरीत थे। पांडव अपने धर्म के लिए युद्ध कर रहे थे और कौरव अधर्म के लिए युद्ध कर रहे थे।

दोनो एक ही मैदान में थे और दोनो ही अपनी पूरी ताकत के साथ एक दूसरे से लढ रहे थे। लेकिन दोनो का काम एक होने के बाद भी और मेहनत भी एक होने के बाद भी कौरव हार गए और पांडव जीत गए। इसके पीछे का कारण एक ही था और वो है उनका काम को करने के पीछे का इरादा अलग अलग था। एक का इरादा सही था और एक का इरादा गलत था।

सच्चाई और अच्छाई को ना कभी हराया जा सकता है और ना कभी छुपाया जा सकता है।

दोस्तो सच्चाई और अच्छाई को ना कभी हराया जा सकता है और ना कभी छुपाया जा सकता है। इसीलिए सच कहने और अच्छे कामों को करने से कभी मत डरिए। इस विषय में भगवान बुद्ध भी कहते है की सच्चाई और सूरज को ज्यादा देर तक छिपाया नहीं जा सकता है। एक वक्त आने पर इनको दुनिया के सामने आना ही पड़ता है।

आप उनको सामने आने से नही रोक सकते है, इसीलिए अगर आज आप कोई ऐसा काम कर रहे हो, जो गलत है और जिसमे झूट है, तो आपको उस काम को तत्काल ही छोड़ देना चाहिए। क्योंकि किसी न किसी दिन आपकी सच्चाई इस दुनिया के सामने जरूर आएगी।

हम सब अपनी लाइफ में बहुत सारे झूट हर रोज बोलते हैं, किसी के आरोप से बचने के लिए या फिर अपना फायदा देखने के लिए हम झूट बोलना पड़ता है। भगवद गीता में यह भी कहा गया है की अगर आप कोई ऐसा सच बोलते हैं, जिससे किसी मासूम के साथ अन्याय होता हो, तो वह बोला गया सच अच्छा नहीं होता है।

और अगर आप ऐसा असत्य बोलते हो, जिससे किसी का भला होता हैं, पर किसी का नुकसान भी नहीं होता है, तो बोला गया असत्य भी बुरा नही होता है। इसमें महत्वपूर्ण बात यह है की किसी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। दोस्तो इस सत्य, असत्य और असत्य सत्य को समझना बहुत ही बारीके का काम हैं।

इसीलिए अपने विवेक से दो बार सोच के उसके बाद ही निर्णय ले की आपको क्या बोलना चाहिए और क्या नहीं।

कुछ पाने के लिए संघर्ष करना अनिवार्य है।

दोस्तो अगर आप अपनी लाइफ में कुछ भी पाना चाहते हैं, तो आपको उसके लिए संघर्ष करना ही पड़ेगा। और अगर आप संघर्ष नही करना चाहते हैं, तो आपको इस बात का दुख नहीं होना चाहिए की आपको वो सब हासिल नहीं हुआ, जो आप हासिल करना चाहते थे।

अगर आपको आपके कर्मों का अच्छा नतीजा चाहिए, या आपको आपकी लाइफ में कुछ बड़ा हासिल करना चाहते है। तो फिर आप ये मत देखिए की मेहनत करने का सही समय कौन सा है? या आप ये मत देखिए की आपको बुख लग रही है या प्यास लग रही है! गर्मी लग रही है या सर्दी लग रही है? अगर आप अपनी लाइफ में कुछ पाना चाहते हैं? तो आपको संघर्ष करना ही पड़ेगा।

और अगर आप संघर्ष करना नही चाहते हैं तो आपको जितना कम मिले, या कुछ भी नही मिले या आपका बुरा हो या आपके साथ गलत हो, तो आपके पास इतनी हिम्मत होनी चाहिए इन सभी दुखो को सेहन कर सको। क्योंकि ये आपकी लाइफ थी और आपके सपने थे और आपकी मेहनत थी।

जिसको मेहनत करनी थी, वो मेहनत करके सुखों को भोग रहा है और जिसको सिर्फ कोरे सपने देखने थे, वो आज भी वैसा ही है, जैसा वो तब था जब उसने वो सपना देखना शुरू कर दिया था। आपको अपने सपनों के लिए संघर्ष हर हाल मे करना ही पड़ेगा।

हमे सिर्फ कर्म करने के अधिकार है, फल के बारे में न सोचे।

आपको काम करने की तो छूट है लेकिन अपने आपके उस काम में होने वाली जीत और हार में खुद को बांध करके नही रखना चाहिए। ये एक मात्र ऐसी चीज है, जो अगर इंसान समझ ले तो उसके 100% दुख समाप्त हो सकते हैं और वो बिना डिस्ट्रप हुए मेहनत कर सकता है। ऐसी कोई मंजिल नहीं रह जायेगी इस दुनिया में जिसको वो हासिल न कर सकें।

सबसे शानदार बात ये होगे की बहुत कुछ अचीव करने के बाद भी आपको कभी घमंड नहीं होगा। आपका कभी भी किसी काम को करने का उद्देश्य यह नही होना चाहिए की अगर इस काम को में अगर कर लूंगा तो मुझे ये फल प्राप्त हो जायेगा। अक्सर होता यह की हम मेहनत तो बहुत कर लेते हैं, लेकिन उस मेहनत से ज्यादा हमारे मन में डिजायर्स होती है।

हम हर वक्त ये सोचते रहते हैं की यार में इतनी मेहनत तो कर रहा हू, तो मुझे सफ़लता क्यों नहीं मिलेंगी? मेरी को सफलता तो मिलनी ही चाहिए, क्यूंकि में सफलता को डिजर्व करता हूं। और हमारे एक्सपेक्टेशन इतनी हाई हो जाती है, जितनी हमारी मेहनत होनी चाहिए।

लेकिन अगर आप सफल नही हो पाते है, तो आपको एक बात जरूर याद रखनी चाहिए की अगर आप इस काम में सफल नहीं हुए हैं, लेकिन कोई और इंसान तो इस काम में जरूर सफल हुआ होगा। क्योंकि उसने आप से ज्यादा मेहनत की होगी। लेकिन वो सफलता उसको न मिलकर आपको मिल जाती है, तो उसके साथ में कही ना कही अन्याय हो जाता, क्योंकि उसने आप से ज्यादा मेहनत की हुई है।

और उसके कर्म भी आपसे ज्यादा संघर्षिल रहे हैं, जिस दिन आपका कर्म ज्यादा संघर्षिल बन जायेगा ना, तो उस दिन सफलता आपकी भी हो जायेगी। इसमें कोई डाउट नहीं है। लेकिन भगवद गीता में श्री कृष्ण जी रिजल्ट के बारे सोचने से तो क्लियर मना कर देते है। और कहते है की हे अर्जुन तू चाहे यह लड़ाई जीते या हारे, तू आएगा तो मेरे पास ही। ना तो यह है की तू जीत करके कही और चला जायेगा, और नाही यह है की तू हार करके कही और चला जायेगा।

जैसा सब पहले था वैसा ही बाद में होगा, इसीलिए तू उठ और युद्ध के परिणाम के बारे मे सोचे बिना ये समझ कर लढाई कर की ये लढाई तू नही बल्कि में यानी स्वयम खुद श्री कृष्ण कर रहा हूं। और फिर जो भी परिणाम आए इस लढाई का, की अर्जुन को केवल लढाई को लढ़नी थी और वो लढा और श्री कृष्ण का काम परिणाम देना था, और उन्होंने वो दिया भी।

श्री कृष्ण जी ने कहा है की हे अर्जुन तू तो उस काम को करने का सिर्फ एक जरिया है, तू तो केवल उस काम को करने केलिए एक छोटी सी वजह है। पर वास्तव में तो में श्री कृष्ण ही उस काम को कर रहे हैं। इसका मतलब यह है की आपको सिर्फ अपने मेहनत पर ही ध्यान देना है, कोई आपको लूजर कहे या आपको एक फैलियर कहे। आपका काम है सिर्फ काम करना न की रिजल्ट के बारे में सोचते रहना।

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हम सब यहां खुद को बेहतर बनाने केलिए आए हैं।

दोस्तो इस दुनिया में हम सब अपने आपको पहले से बेहतर बनाने के लिए और कुछ बेहतर सीखने के लिए आए हुए हैं। और जो ऐसा नहीं कर रहा है ना, वो हर दिन मर रहा है। इंसान का नाश 2 तरह से होता है, एक तो जब उसका शरीर बूढ़ा हो जाए और रंगो में खून दौड़ना बंद हो जाए और दिल काम करना बंद हो जाए तो उस इंसान की मौत हो जाती है। जिसको हम सब जानते हैं।

लेकिन दूसरी मौत इंसान की तब हो जाती है जब वो अपने मन से हार जाता हैं। और अपने मन में यह बिठा लेता है की इस काम को में नही कर सकता। जब इंसान अपने आपको समस्याओ के सामने ऐसा सोचने लग जाता है की ये समस्या मेरे से बहुत बड़ी है और में इनको नही कर सकता। और ऐसे ही जब इंसान की हिम्मत मर जाती है तब वो इंसान जिंदा लाश की तरह हो जाता हैं।

इसीलिए भगवद गीता में कहा है की हमारी आत्मा हर जन्म में अपने आपको पहले से बेहतर बनाते हुए अपनी यात्रा पे आगे बढ़ती रहती है। और जब उसका एक लेवल आ जाता है, तब वो परमात्मा से वापस मिल जाती है। फिर इसके बाद फिर से शरीर को धारण नही करती है।

अगर हमारी जो उत्पत्ति है ना वो अगर उस परम पिता से हुई है ना, जिसको हम भगवान कहते है, या जो कुछ भी कहते है। धर्म आपके एक जैसे हो सकते हैं, लेकिन ये सोचिए कि आपको बनाने वाला वो है, और वो इतना मजबूत है, तो आप कमजोर कैसे हो सकते हैं? इसीलिए हमे अपने मन से कभी भी हार नहीं माननी चाहिए।

माफ करना महान व्यक्तित्व की निशानी है।

इस दुनिया में सबसे हिम्मत वाले और सबसे ज्यादा ताकत वाले वो इंसान होते है, जो माफ करना जानते हैं। एक बार जरा सोच करके देखिए की भगवान को कौन सी चीज भगवान बनाती है। श्री भगवद गीता में भगवान श्री कृष्ण जी कहते है की चाहे वो कितना भी पापी इंसान क्यों न हो, लेकिन अगर वो अपने बुरे कर्मो को करना छोड़कर अच्छे कर्म करना शुरू कर दे, तो उसको वो अपना लेते है।

यानी की दोस्तो भगवान इस पूरी सृष्टि के मालिक होकर भी इतने नेक दिल है, और उनके दिल में सब के लिए जगह है और उनके लिए सब सामान है। माफ करना महान व्यक्तित्व की निशानी है और माफ वही कर सकता है, जो सामने वाले के किसी ना किसी नजीरए से बड़ा हो। चाहे वो उपर में बड़ा हो या चाहे वो अच्छे काम करके बड़ा हुआ हों, या चाहे ज्यादा पैसे कमाकर के बाद बड़ा हुआ हो।

किसी की गलती होने पर उस पर नाराज होना या उसपर गुस्सा होना, बहुत आसान काम है और ये काम कोई भी इंसान कर सकता है। लेकिन हिम्मत वाले इंसान गलती करने वाले इंसान को माफ करके उसको और एक मौका दे सकते है। इस दुनिया में जब कोई इंसान कुछ महान कार्य करता है ना, तो बाकी की दुनिया भी ठीक वैसे ही करती है।

में आपको एक उदाहरण देकर समझाता हूं, जब कोई फिल्मी हीरो नई हेयर स्टाइल के साथ आता है, तो वह ट्रेडिंग में आ जाती है। हर कोई उसकी कॉपी करता है। ताजुक की बात यह है की ये बात श्री कृष्ण ने महाभारत में कही थी, जो कितने हजारों साल पुरानी बात है।

“हे अर्जुन अगर तू ये लढाई नही करेगा तो हर कोई तुझे और तेरे वंश को गालियां देगा। की अर्जुन कितना कायर था, लेकिन अगर तू अपना युद्ध करके जीत जायेगा ना, तो इससे आगे आनी वाली जो दुनिया होंगी ना तो उसमे तू एक एक्जामपल सेट होगा। और एक्जामपल ये होगा की धर्म की अधर्म पर जीत हो ही जाती है। और अर्जुन जो तू करेगा उसकी बहुत बढ़ाई होगी और तेरी आने वाली पीडिया भी ना तेरी तरह ही कर्म करेंगी।

भगवान श्री कृष्ण के वाक्य में एक और गहरा अर्थ छुपा हुआ है और वो है की अगर आप अपनी लाइफ में किसी ऐसे लेवल पर हो, जिस लेवल पर जाना किसी सामान्य इंसान के लिए आसान बात नहीं होती है। तो आपको अपनी हाई पोजिशन से इस दुनियां में ऐसे उदाहरण सेट करने चाहिए, जिनसे सब लोगो को भलाई हो और सबको एक सही रास्ता दिखे।

लाइफ तब बदलती है, जब आप अपने सोचने का तरीका बदल देते है।

दोस्तो आपकी लाइफ तब बदलती है जब आप अपने सोचने का तरीका बदल देते है, जब आप अलग तरीके से सोचते हैं और इन सब चीजों को देखते हैं, जो आज आपके पास में है। केवल आपका खुद को देखने और अलग सोचने का तरीका ही आपको सबसे अलग बना सकता है।

हम सब अपनी लाईफ में बहुत कुछ करना चाहते हैं और हम सब सपने देखते हैं की मेरे पास करोड़ों रूपए हो और मेरे पास एक शानदार कार होनी चाहिए, मेरे पास बहुत ज्यादा प्रॉफिट वाले बिसनेस होने चाहिए। ऐसा सोचना कोई बुरा नही है बल्की अच्छी बात है।

सोचना अच्छी बात है और हर किसी को सोचने का जन्म सिद्ध अधिकार है। अगर आप एक अच्छी कल्पना कर सकते हैं, तो यह बहुत बड़ा सबूत है, इस बात का की आप अभी भी जिंदा है। और अपनी जिन्दगी को अच्छे से जी रहे हैं। आपको अपने बड़े बड़े सपनो के साथ ही अपना सोचने का तरीका भी बदलना होगा।

अगर आपको वो सब हासिल करना है, जिनको आज तक आप हासिल नहीं कर पाए हैं, तो आपको ऐसा कुछ करना पड़ेगा, जो आज तक आप नही कर पाए हैं। आप वही सोचते और करते रहेंगे जो आप आज तक करते आए हुए हैं। तो आपको इस बार भी वही मिलेगा, जैसा आपको आज तक मिलता आया है।

शब्दो में मत फसना भावनाएं समझ लेना। कुछ अलग पाने के लिए कुछ अलग करना पड़ता है। अपने सोचने का अलग नजरिया आपको अपनी परिस्थितियो को देखने का अलग नजरिया और अपने काम करने का एक अलग यूनिक तरीका ही आपको एक यूनिक और महान इंसान बना सकता है।

इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है।

दोस्तो हमे ऐसा लगता हैं की अपने मन को गुलाम बनाना मुश्किल है, लेकिन भगवद गीता में कहा गया है कि इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है। हम अपने दिमाग को और अपने विचारो को और अपने आप को खुद के वश में कर सकते हैं। बशर्ते अगर हम ऐसा करना चाहे तो और अगर इसका अभ्यास करे तो संभव है।

जब श्री कृष्ण अर्जुन से कहते है की हे अर्जुन तुझे अपने मन को काबू में रखकर अभी केवल और केवल अपने युद्ध पर ध्यान देना चाहिए। तो उसके बाद अर्जुन श्री कृष्ण से कहते है की हे भगवान आपने ये कह तो दिया की ये मन हर दुख और हर बीमारी की जड़ है, पर ऐसा तो हो ही नहीं सकता कि इंसान अपने मन को पूरी तरह से अपने काबू में करले।

तो फिर ऐसा ऐसा कौन सा तरीका है जिससे में अपने मन को काबू में कर सकता हूं। इस प्रश्न पर भगवान श्री कृष्ण जवाब देते हुए कहते है की दुनिया में ऐसा कोई काम नहीं है, जिसको कोई इंसान नही कर सके। प्रयास हर काम सफल बनाया जा सकता हैं। अगर कोई किसी पहाड़ को पतह करना चाहता है, और अगर वो एक बार में ऐसा नहीं कर पाता है, तो उसको अपनी कोशिश जारी रखनी चाहिए।

अगर आप किसी काम को करने में फैल हो रहे हैं, और अगर आपको उस काम में सफलता हासिल करनी है, तो आपको अपनी फैल होने की दर बढ़ानी होगा। किसी महान इंसान ने कहा है की आपको केवल इस बात से ध्यान रखना है की अगर मुझे इस पहाड़ पर चढ़ना है ना तो मुझे सिर्फ लढना हैं। आपको इस बात से मतलब नहीं रखना है की आपको सौ बार प्रैक्टिस करनी पड़े या 1000 बार फिर से प्रयास करना पड़े।

आपको चढ़ना है मतलब चढ़ना है और जब आप प्रैक्टिस करेंगे तो ये मन के विचारो वाला पहाड़ है ना, उसको भी आप घुटनों तले ला देंगे। भगवान श्री कृष्ण जी कहते है की अभ्यास से सब कुछ संभव है, चाहे वो कोई काम हो या मन को काबू में करना।

जिसकी शुरुवात होती है, उसका अंत भी जरूर होता हैं।

इस दुनिया में हर वो चीज जिसकी शुरवात होती है, उसका अंत कभी ना कभी जरूर होता हैं। और जब किसी भी चीज का अंत होता हैं, ठीक वही पर एक नई शुरुवात भी होती है। ये चक्र कई अनंत सादियो तक ऐसे ही चलता आया है और ऐसे ही चलता रहेगा।

जब तक ये कायनात रहेंगी, तब तक ये चक्र ऐसे ही चलता रहेगा। चक्र होती ही है, ऐसी चीज जो कभी खत्म नहीं होती है। आज आप खुश हो, कल आप थोड़े ठीक रहोगे, उसके बाद थोड़ा दुख मिलना शुरू हो जाएगा, और इसके 3 दिन बाद आप पूरी तरह से दुखी हो जाओगे। फिर उसके बाद फिर आपके पास उमिद की किरण आयेगी और आपको बेहतर महसूस होना शुरू हो जाएगा।

आपको ये लगने लगेगा की आपका अच्छा वक्त आने लगा है, और आपको सुख मिल रहा है। एक समय आने पर आपका वो प्लेजर भी पिक पर होगा, लेकिन दोस्त वहा पर भी आप कुछ पल के लिए ही रुकेंगे। पहाड़ की छोटी पर जाने के बाद वहा से केवल नीचे आने का ही रास्ता बचता है। और आपके सुख कम होने लगते है। फिर आप नीचे आयेंगे और फिर आप उपर चढ़ेंगे।

हर वो चीज जिसकी शुरवात होती है, उसका अंत होना निश्चित है। चाहे वो हमारा शरीर ही क्यों न हो। और हर वो चीज जिसका अंत होता है, उसकी कभी न कभी शुरुवात जरूर होती है। चाहे उसको उमिद ही क्यों न कहते हो। इसीलिए सुख और दुख की फीलिंग्स के चक्कर में मत फसना और हमेशा शांत रहने की कोशिश कीजिए। चाहे कितना ही सुख हो और चाहे कितना ही दुःख क्यों न हो।

शरीर से बड़ी हमारी इंद्रिय और इंद्रिय से बड़े विचार और विचारो से बड़ी हमारी बुद्धिमानी और हमारी बुद्धिमानी से बड़ी हो उसको आत्मा कहते है।

दोस्तो हमारे शरीर से बड़ी हमारी इंद्रिय होती है और इंद्रिय से बड़े हमारे विचार होते है और हमारे विचारो से बड़ी हमारी बुद्धिमानी होती है। और हमारी बुद्धिमानी से भी ऊपर हो उसको आत्मा कहते है। दोस्तो यह सिख आपको आध्यात्मिक लगती होगी, लेकिन में आपको इस तरीके से समझाने कि कोशिश करूंगा की आपको यह समझ में आए और आपके आज की लाइफ पर आप इसे एप्लाई कर सको।

श्री कृष्ण भगवद गीता मे कहते है की हमारा शरीर तो सबसे नीचा है। जो लोग अपने शरीर और उसके प्लेज़र के बारे में ही सोचते हैं, उस इंसान का लेवल सबसे नीचे रहता है। उससे ऊपर उठकर अपने विचारो में जीता है, तो वहा से बहुत चांसेज होते है कि वो इंसान कुछ ऐसा सोचे की जिससे उसकी लाइफ पूरी तरह से बदल जाए, और वो इंसान कुछ बड़ा काम कर जाए।

जो इंसान अपने विचारो से भी ऊपर उठकर inteligens लेवल पर आ जाता हैं, तो वह अपने inteligens से अपने विचार और अपनी डिजायर्स और अपनी बॉडी को कंट्रोल में कर सकता है। जो इंसान spiritual लेवल पर आ जाता हैं ना, जैसा की भगवद गीता में श्री कृष्ण जी कहते है की कर्म तो कर लीजिए लेकिन ये सोच कर मत करें की ये कर्म में कर रहा हू, बल्की ये सोच कर कर्म कीजिए की भगवान मेरे द्वारा कर्म करवा रहा है। जब इस तरह से सोचने लग जाओगे, तो आप inteligens लेवल से भी ऊपर चले जाओगे।

खुश रहना या दुखी रहना ये सिर्फ आपकी मानसिक अवस्था है।

दोस्तो खुश रहना या दुखी रहना ये आपकी एक मानसिक अवस्था है, और इसका बाहरी दुनिया से कोई लेना देना नहीं है। ये खुशी और दुख जैसे मान लो कि ये 2 कुएं है, यहां पर आपकी मर्जी है की आप कौन से कूए में रहना चाहते हैं। अगर आप खुशी वाले कुए में हे ना, तो कोई आपको कितना ही दुखी करने के कोशिश करे, पर ये आप पर निर्भर है की आप खुशी वाले कुए से बाहर निकलना चाहते हैं या नहीं।

दोस्तो अगर आप दुख वाले कूए में नीचे गर्दन करके ये मानकर के बैठे हुए हैं की आपको तो दुखी ही रहना है। तो आपको इस दुनिया का सबसे बड़ा मोटीवेटर भी आपको हैप्पीनेस नही दे सकता है। खुश रहना और दुखी रहना ये दोनो आपकी chooses है। आप जैसा रहना चाहते हैं, वो आपकी मर्जी है।

हमारा सबसे बड़ा शत्रु हमारा मन ही है और सबसे अच्छा मित्र भी हमारा मन ही है।

इस दुनिया में हमारा सबसे बड़ा शत्रु हमारा मन है और सबसे अच्छा मित्र भी हमारा मन ही है। अगर हमारा सबसे बड़ा शत्रु हमारा मन है औरआप अपने मन को वश में करते है, तो यह आपके लिए एक मित्र समान कार्य करेगा। और अगर आप अपने मन पर नियंत्रण नहीं रख पाते है, तो आपका मन आपका सबसे बड़ा शत्रु बन सकता है।

एक बार जरा सोचिए की हर इंसान मेहनत क्यों नही कर पाता और हर इंसान सफलता और खुशी को क्यों नही हासिल कर पाता है? क्या आप इस बारे में जानना चाहते है? क्योंकि दोस्तो हर कोई अपने मन को काबू में नहीं कर पाता है। ये मन हमारा सबसे बड़ा शत्रु है, अगर ये हमारे नियंत्रण से बाहर चला जाए तो, और ये एक ऐसी चिड़िया है, जिसको पकड़ने में अच्छे अच्छों के पसीने निकल जाते है।

अगर हम चाहे तो अपने मन को सबसे बड़े और अच्छे मित्र में बदल सकते हैं? हम अपने मन को काबू में करके, उन सब कामों को बेहतर ढंग से कर सकते हैं, जिनको हमे करने में मजा नहीं आता है, लेकिन जिनको करना हमारे लिए बहुत जरूरी होता है। जी हां दोस्तो में बात कर रहा हूं, अनुशासन की अगर हम अनुशासित रहते हैं, तो हमारे लिए इस दुनिया में कुछ भी पाना मुश्किल नहीं है।

हमारी जिंदगी ना तो पास्ट में है और नाही फ्यूचर में है।

दोस्तो हमारी लाइफ ना तो पास्ट में है और नाही फ्यूचर में है, हमारे लाइफ है ना तो केवल सिर्फ वर्तमान में है। हम अपने पास्ट को याद तो कर सकते हैं, और उसमे किए गए कर्मो के फल को भूगद तो सकते है। केवल आज तारीख में जो काम हम कर रहे हैं, उसका फल स्वरूप हमारे भविष्य में हमारे सामने वो खड़े होंगे।

इसीलिए हमारा उद्देश्य यह होना चाहिए की हम आज अपने वर्तमान के काम में मन लगाए। क्योंकि जो भी काम हम अपना मन लगाकर करते हैं, वो एक बीज की तरह होता है, और ये कर्म का बीज है ना, वो पनपता जरूर है। अब वो डिपेंड करता है की वो बीज कैसा है।

उसी हिसाब से कभी कभी जल्दी और कभी कभी लेट उसका पेड़ जरूर बनता है, लेकिन बीज से पेड़ जरूर बनता है। हमारे नाम से इंसान बड़ा या छोटा नही होता है, बल्की उसके काम से होता है। उसके द्वारा किए गए कर्म ही उसको अच्छा और बुरा बनाते है। और इंसान की पहचान उसके नाम से ज्यादा उसके काम से होती है, इसीलिए इंसान को बड़े बड़े काम करना चाहिए।

दोस्तों उमिद हे आप सभी को गीता सार इन हिंदी आर्टिकल पसंद आया होगा ? और आपकी लाइफ को पहले से बेहतर बनाने में इसकी थोड़ी बहुत भूमिका तो जरूर रहेंगी। मेहनत करते रहिए और लाइफ मे आगे बढ़ते रहिए, और एक समय बाद देश मे अपना ही नही बल्कि इस दुनिया में देश का नाम रोशन कीजिए।

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