Top 5 Powerful Real Life Inspirational Stories in Hindi

Top 10 Real Life Inspirational Stories in Hindi | महान लोगों की प्रेरणादायक कहानियां हिंदी में

नमस्कार साथियों आप सभी का नॉलेज ग्रो मोटिवेशनल ब्लॉग पर स्वागत है। दोस्तो आज का यह आर्टिकल सभी के लिए बहुत ही Inspirational और Life Changing साबित होने वाला है, क्योंकि दोस्तो आज में आपके साथ टॉप 5 महान लोगों की प्रेरणादायक कहानियां हिंदी में शेयर करने वाला हू।

Top 5 Real Life Inspirational Stories in Hindi | महान लोगों की प्रेरणादायक कहानियां
Top 5 Real Life Inspirational Stories in Hindi | महान लोगों की प्रेरणादायक कहानियां

Top 5 Real Life Inspirational Stories in Hindi | महान लोगों की प्रेरणादायक कहानियां हिंदी में

दोस्तो अगर आप इस आर्टिकल को आखिर तक पढ़ते हैं, तो आपको 5 जिद्दी महान लोग और उनके हद्दपार पागलपन के बारे में जानने को मिलेगा। इसीलिए इस आर्टिकल को अंत तक ध्यान से जरूर पढ़िए, तो बिना समय को गवाए चलिए कहानियों की शुरआत करते हैं।

Ratan Tata Real Life Inspirational Story in Hindi

दोस्तो आज हम सब युवाओं के inspiration, idial और भारतीय बिजनेस मैन रतन टाटा जी के बारे में बात करने वाले हैं, और इस दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति नही है, जो रतन टाटा जी को पसंद ना करता हो। दोस्तो बचपन में ही इनके माता पिता का डिबोस हो गया। उसके बाद रतन टाटा जी अपनी दादी जी के साथ रहने लगे।

बचपन से ही उनकी दादी जी ने उन्हे एथिक्स और मोरल का पाठ पढ़ाया। याने कि चाहे कुछ भी हो जाए, तुम्हे ऐसा कोई भी कदम नही उठाना है, जिससे खानदान पे कोई आंच आए। और इसको रतन टाटा जी आज तक फॉलो करते आए हुए है।

अपनी हाई स्कूल की पढाई खत्म करते ही रतन टाटा जी ने अपने हायर एजुकेशन के लिए अमेरिका के कोर्नल यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया। ग्राजुवेशन कंप्लीट करने के बाद उनको आईबीएम से job ऑफर हुआ। तब आईबीएम उस वक्त दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक थी।

कुछ महीनो के लिए रतन टाटा जी ने आईबीएम कंपनी में नौकरी भी की लेकिन उनकी दादी की तबियत खराब हो गई थी, उसके चलते उन्हें भारत वापस लौटना पड़ा। भारत वापस आते ही रतन टाटा जी ने Tata Steel में काम करने लगे। पर यहा काम करने में इनका दिल नही लगा।

जब यह बात उन्होंने जेआरडी टाटा जी से कही तो उन्होंने नेल्को कंपनी को संभालने के लिए रतन टाटा जी को दे दिया। नेल्को कंपनी electronic सेक्टर में काम करती थी और वह उस वक्त बहुत लॉस में चल रही थी। दोस्तो अब यहां आता है ट्विस्ट,👇

रतन टाटा जी ने नेलको कंपनी को टेकओवर करने के बाद कम्पनी में हो रही गलती को ढूंढने के लिए रतन टाटा जी ने कंपनी को एनालायस करना शुरू कर दिया। एनालायस करने के बाद ग्राउंड लेवल से लेकर टॉप लेवल तक उन्होंने बदलाव लाया। रतन टाटा की ओनरशिप के अंदर नेल्को कंपनी के सारे डेफ्थ क्लियर हो गए और यह कंपनी फिर से प्रॉफिट मेकिंग कंपनी बन गई।

दोस्तो 1991 के बाद से रतन टाटा की असली जर्नी शुरू हो गई। जब वो tata company के चेयर मैन बन गए। जब रतन टाटा जी चेयरमैन बने तो उस वक्त कई सिनियर्स का मानना था की रतन टाटा जी इस पोस्ट के लिए लायक नही है। लेकिन जे.आर.डी टाटा ने किसी की भी बात न सुनते हुए रतन टाटा जी को टाटा कंपनी का चेयरमैन बना दिया।

और इसके बाद रतन टाटा जी की लीडरशिप की यात्रा शुरू हुई। रतन टाटा जी पहले से ही विजनरी इंसान थे और अब तो उनको ऐसा मौका मिल गया था अपने विजन को इंप्लीमेंट करने का। अपने विजन और अपनी मेहनत के दम पर रतन टाटा जी ने टाटा की सारी कंपनीज को प्रॉफिट मेकिंग कंपनीज बनाया।

दोस्तो रतन टाटा जी विजनरी इंसान होने के साथ साथ एक मास्टर कम्युनीकेटर भी थे। जिससे वे अपने आइडियाज और विजन को सही तरीके से दूसरो के सामने रख पाते थे। रतन टाटा जी की सबसे बड़ी खूबियों में से एक खूबी यह थी की उनके साथ जो भी काम कर रहा हो, वो उनको देखकर इंस्पायर हो जाता था।

जिससे दूसरो के अंदर सेंस ऑफ कैपेबिलिट पैदा हो जाती थी, की में यह काम आसानी से कर सकता हूं और यह एक ग्रेट लीडर की निशानी होती हैं। 1998 में रतन टाटा जी ने कोड ऑफ कंडक्ट को इंट्रोड्यूस किया, जिसके मुताबिक हर टाटा कामगार को सेम रिस्पेक्ट मिलेगी।

बहुत सारे कामगारों ने कोड ऑफ कंडक्ट को साइन करने से मना कर दिया, लेकिन रतन टाटा जी ने हार ना मानकर सभी से इस कोड ऑफ कंडक्ट को साइन करवा ही दिया। अब जो में किस्सा आपको बताने वाला हु वो शायद आपने कही पर सुना या पढ़ा होंगा! पर इस पोस्ट में यह किस्सा एड करने से में खुद को रोक नही सका।

दोस्तो मुझे यह लगता है की इस किस्से के बिना रतन टाटा की जीवनी कंप्लीट हो ही नही सकती। इसीलिए दोस्तो इस आर्टिकल के अंत तक बने रहिए। किस्सा कुछ ऐसा है की साल 2000 में रतन टाटा जी का ऑटो मोबाइल सेक्टर बहुत ही लॉस में चल रहा था। इस पर रतन टाटा जी ने यह डिसीजन लिया की वो टाटा मोटर्स को फोर्ड कंपनी को बेच देंगे।

इसीलिए वो अपनी टीम के साथ बिल फोर्ड जी से मिलने के लिए चले गए। बिल फोर्ड से मिलने के बाद उनका बर्ताव रतन टाटा जी को पसंद नही आया। क्योंकि बिल फोर्ड जी ने रतन टाटा जी से कहा की हम आपसे ये कंपनी खरीद कर हम आप पर एहसान कर रहे हैं। रतन टाटा जी को यह बात बहुत चुब गई।

उसी रात रतन टाटा जी ने अपनी टीम के साथ भारत वापस लौट आए और यह डिसाइड किया की वो अब अपनी यह कंपनी नही बेचेंगे, बल्कि इसे ग्रो करेंगे। और उसके बाद उन्होंने अपनी सारी ताकत को टाटा मोटर्स कंपनी में लगाया और इसके चलते कुछ ही सालो में टाटा मोटर्स एक प्रॉफिटेबल कंपनी बन गई।

उसके ठीक 8 साल बाद फोर्ड कंपनी बहुत लॉस में जा रही थी, क्योंकि उनकी कार कंपनी जगुआर और लैंड रोवर कंपनी लॉस में जा रही थी। उसी वक्त रतन टाटा जी ने उन दोनो कंपनीज को 2.3 बिलियन डॉलर में खरीद लिया और इन लॉस में गई कंपनीज को फिर से profitable बनाया।

उस वक्त बिल फोर्ड जी ने रतन टाटा जी से एक लाइन कही की “आप हमारी इन companies को खरीद कर आप हम पर बहुत बड़ा एहसान कर रहे हैं” दोस्तो इससे एक बात साफ हो जाती हैं की सफलता से बड़ा कोई भी रिवेंज नही है, और यह हमे रतन टाटा जी से सीखने को मिलता है।

Aimee Mullins Real Life Inspirational Story in Hindi

दोस्तो 20 जुलाई 1975 Allentown Pennsylvania में एक लड़की का जन्म हुआ। मगर उसके जन्म की एक अनोखी बात थी और वो यह थी की वो लड़की बिना Fibula Bones की पैदा हुई थी। दोस्तो Fibula Bones हमारे पैरों की एक अहम हड्डी होती हैं। जाहिर सी बात है की उनका ना होना पैरों में जान ना होने के बराबर है।

डॉक्टर्स का कहना था की उनके घुटनों के नीचे के हिस्से को अगर न काटा गया तो, इससे उसे अपनी पूरी जिन्दगीभर व्हील चेयर पर ही काटनी पड़ सकती है। इसीलिए महज एक साल की उमर में ही उस बच्चे की पहली सर्जरी कर दियी गई, जिसमे उसके घुटनो के नीचे के हिस्से को काट दिया गया।

दोस्तो ये सुनकर दिमाग में यह खयाल जरूर आता है की बेचारी कितनी बतनसिब थी, और उसकी जिंदगी शुरू होने से ही पहले तबाह हो गई। मगर उस बच्ची का ऐसा नहीं मानना था। 2 साल की उमर में ही उस बच्ची ने अपने प्रोस्थेटिक (कृत्रिम) पैरों से चलना सीख लिया था।

लेकिन उसने कभी भी अपने प्रोस्थेटिक पैरो को बहाने की तरह इस्तमाल नही किया। बचपन से ही उसे sports और एक्टिंग का शॉक था। और जब भी कोई उसे अपाहिज या डिसेबल्ड केहता, तो उसका हमेशा यही जवाब आता था की 👇👇👇

“में कोई अपाहिज नहीं हु, अगर आप टेक्निकली देखो तो में एक ऐसी इंसान हु, जिसके दोनो पैरो के घुटनों के नीचे के हिस्सो को काट दिया गया है। मगर इसका मतलब यह नहीं है की में अपाहिज हू और में कुछ कर नही सकती। ये कमी ने मुझे नाही कुछ करने से रोक सकती है और ना ही मेरे जस्बे को कम कर सकती है।”

और यह बात सच है दोस्तो! ये सब होने के कुछ ही सालों बाद जब academic स्कॉलरशिप से ये लड़की जॉर्ज टाउन यूनिवर्सिटी में पढ़ने गई, तो उसी दौरान इस लड़की ने नॉर्मल एथलीट्स के साथ नैशनल कॉलेज एथलेटिकल एसोसिएशन यानि की (NCAA) Division 1 Track and Field Event’s में complete किया हुआ था।

दोस्तो इस तरह वो दुनिया की पहली महीला amputee बनी थी, जिसने NCAA में भाग लिया था। दोस्तो इस लड़की का नाम है Aimee Mullins और वो अमेरिकी एथलिट्स 1996 में paralymics में 200 मीटर की दौड़ को 34.06 सेकंड में भागने का रिकॉर्ड बनाया था।

और इतना ही नही दोस्तो 1999 में उन्होंने ब्रिटिश फैशन डिजाइनर अलेक्जेंडर मिकवीन के लिए मॉडलिंग भी की हुई थी। बस 23 साल की उमर में ही उन्हें peoples magzine के 50 most Beautiful in the world के लिस्ट में फिचर्ड किया गया था।

और दोस्तो 2011 में ग्लोबल लॉरियल ब्रैंड अम्ब्यासीटर भी बनी और उसके साथ ही उन्होंने काफी मूवीज और टीवी सीरीज में भी ऐक्टिंग भी कि हुई है। और वो आज एक अमेरिकन एथलीट, एक actress और एक मॉडल के नाम से फेमस है।

दोस्तो क्या आप जानते है की ये सब क्यों पॉजिबल हुआ? 👇👇👇

“क्योंकि उन्होंने कभी खुद को अपाहिज समझा ही नहीं और अपनी कमी को उन्होने कभी भी अपना बहाना नहीं बनने दिया। और अपनी काबिलियत पर हमेशा भरोसा रखा।”

दोस्तो आज कल हम जरा जरा सी बात पर हार मान लेते हैं, और जरा जरा सी मुश्किलें आने पर बहाने मारने लगते है। और हम कहते रहते हैं की, 👇👇👇

अरे में तो इसीलिए नही कर पाया क्यूंकि ये प्रॉब्लम हो गई थी। मेरी जिंदगी में ये कमी आ गई थी और मेरी तकदीर खराब हो गई थी।

दोस्तो तकदीर एक लिफ्ट की तरह है, जिसकी कोई गैरेंटी नही है कि जिसका दरवाजा कब खुलेगा या बंद होंगा। और अगर खुला भी तो आपको उसमे जाने की जगह मिलेगी या नही इसकी कोई गारंटी नहीं। मगर दोस्तो लिफ्ट चाहे खुला हो या बंद हो, लेकिन लाइफ में हमेशा सीढ़ियों का रास्ता हमेशा खुला हुआ रहता है और मेहनत इसी सीढ़ी का नाम है।

तकदीर यानी की किस्मत का लिफ्ट आपके लिए हमेशा बंद क्यों न हो, लेकिन मेहनत की सीढ़ी आपके लिए हमेशा खुली हुई रहती है। तकदीर के लिफ्ट के मुकाबले मेहनत की सीढियो पर चढ़ते वक्त आपको ज्यादा तकलीफ होंगी और वक्त भी ज्यादा लग सकता है, लेकिन अंत में आपको सफलता जरूर मिलेगी।

दोस्तो एक ऐसी लड़की जिसकी किस्मत में ढंग से चलना भी नही लिखा था, उसने अपनी मेहनत की दम पर Paralymics की दौड़ में World Record बनाया। और अपने जुनून से नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया। वो कर दिखाया जो नॉर्मल चलता फिरता इंसान भी नहीं कर पाए। उसने अपनी मेहनत और जुनून से अपनी किस्मत को बदल डाला।

तो दोस्तो ये आप पर निर्भर है की आप अपने तकदीर का खुलने का इंतजार करें और अगर ना खुलें तो जिंदगी भर उसे कोसते रहे। या फिर मेहनत की सीढ़ी पकड़कर धीरे धीरे अपनी मंजिल की तरफ बढ़ना शुरू करें। फैसला आपका हैं!

Vilma Rudolph Real Life Story in Hindi

दोस्तों Vilma Rudolph का जन्म Tennessee के एक गरीब परिवार में हुआ था। 4 साल की उम्र में उसे डबल निमोनिया और काला बुखार ने गंभीर रूप से बीमार कर दिया था, जिसकी वजह से उसे पोलियो हो गया। उसके बाद डॉक्टर्स ने यह कहा की “वह जिंदगी भर कभी चल फिर नही सकेगी।”

लेकिन विल्मा की मां ने उसकी हिम्मत बढ़ाई और उसे कहा की “ईश्वर की दी हुई क्षमता, मेहनत और लगन से वह जो चाहे वो कर सकती है।” ये बात सुनकर विल्मा ने अपनी मां से कहा की ‘वह इस दुनिया की सबसे तेज धाविका बनना चाहती है।’

दोस्तो 9 साल की उम्र में डॉक्टरों के मना करने के बावजूद भी विल्मा ने अपने पैर के ब्रेस को उतारकर पहला कदम उठाया, जब की डॉक्टरों का कहना था की “वह कभी चल कर नही पाएगी” 13 साल की होने पर उसने अपनी पहली दौड़ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और सबसे पीछे रही।

उसके बाद वह दूसरी, तीसरी और चौथी दौड़ प्रतियोगिता में हिस्सा लेती रही और हमेशा आखरी स्थान पर आती रही। वह तब तक कोशिश करती रही, जब तक वह दिन नही आ गया, जब वह फर्स्ट आई। 15 साल की उम्र में विल्मा टेनेसी स्टेट यूनिवर्सिटी गई, जहा वह एड टेंपल नाम के कोच से मिली।

विल्मा ने उन्हे अपनी यह ख्वाइश बताई की “में दुनिया की सबसे तेज धाविका बनना चाहती हूं” तब उसके कोच ने उसे कहा कि “तुम्हारी इसी इच्छा शक्ति के वजह से तुम्हे कोई भी नही रोक सकता है और साथ में में भी तुम्हारी मदद करूंगा।” आखिर वह दिन आ गया जब विल्मा ने ओलंपिक में हिस्सा लिया।

दोस्तो ओलंपिक में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में मुकाबला होता है। ओलंपिक में विल्मा का मुकाबला जुट्टा हैन से हुआ था, जिसे कोई भी हरा नही पाया था। पहली दौड़ में 100 मीटर की थी और इसमें विल्मा ने जुट्टा को हराकर अपना पहला गोल्ड मेडल जीता।

दोस्तो दूसरी दौड़ 200 मीटर की थी, जिसमें विल्मा ने फिर से जुट्टा को हराकर गोल्ड मेडल जीता। तीसरी दौड़ में 400 मीटर की रिले में रेस का आखरी हिस्सा टीम का सबसे तेज एथलीट ही दौड़ता है, इसीलिए विल्मा और जुट्टा, दोनो को अपनी अपनी टिमो के लिए दौड़ की आखरी हिस्से में दौड़ना था।

Vilma की टीम के 3 लोग रेस के शुरुआती तीन हिस्से में दौड़े और आसानी से बेटन बदली। जब विल्मा के दौड़ने की बारी आई , तो उसके हाथ से बेटन ही छूट गई। लेकिन विल्मा ने यह देख लिया की दूसरे छोर पर जुट्टा हैन तेजी से दौड़ चली है। फिर Vilma ने गिरी हुई बेटन को उठाया और मशीन की तरह ऐसी तेजी से दौड़ी की जुट्टा को तीसरी बार भी हराया।

और दोस्तो तीसरी बार हराकर अपना तीसरा गोल्ड मेडल जीता। और यह बात इतिहास के पन्नो में दर्ज हो गई की एक लकवाग्रस्त महिला 1960 के ओलंपिक में दुनिया की सबसे तेज धाविका बन गई। दोस्तो विल्मा रुडोल्फ की इस कहानी से हमे यह सीखने को मिलता है की 👇👇👇

कामयाब लोग कठिनाइयों के बावजूद भी सफलता हासिल करते हैं, न की तब जब कठिनाईयां नही होती। दोस्तो आपको यह कहानी कैसी लगी? कृपया मुझे नीचे कमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके जरूर बताएं और उसके साथ ही इस कहानी को अपने दोस्तो के साथ अवश्य शेयर कीजिए।

Real Life Motivational Story in Hindi – सोच बदलने वाली कहानी

दोस्तो एक 10 – 15 साल का लड़का क्या उखाड़ पाएगा, अगर वो पढ़ेगा लिखेगा नही तो कोई नौकरी भी नही देगा, तो क्या कमाओगे और क्या खाओगे। ऐसी सोच रखने वाले लोगों और मां बाप के लिए ये real Life Story एक तमाचा है।

क्योंकि दोस्तो ऐसे कई लोग है, जो स्कूल और कॉलेज में तो कुछ भी उखाड़ नही पाए, पर आज युवाओं के लिए खुद एक inspiration बन चुके है, और आज हर कोई उनके जैसा स्टार बनना चाहता है। क्रिकेट के हर मैच में अपनी छाप छोड़ने वाले इस बंदे की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।

जो कभी अपने बुरे हालात के चलते 5 रुपए की मैगी से अपना गुजारा करता था, वो बंदा आज 5 करोड़ रुपए की सिर्फ घड़ी पहनता है। गुजरात के एक छोटे से गांव में रहने वाला बंदा, जो कभी एक अपार्टमेंट तक अफोर्ड नही करता था, वो आज भारत के सबसे महंगे एरिया में 8 Bhk Apartment में रहता है और उसकी वैल्यू 100 करोड़ से भी ज्यादा है।

जी हां, दोस्तो में बात कर रहा हू, वन ऑफ मोस्ट फेमस इंडियन क्रिकेट स्टार हार्दिक पांड्या जी की..! दोस्तो इस बंदे के आज के नवाबी शॉक के बारे में तो आपको बताऊंगा ही पर उससे पहले उसकी रियल लाइफ स्टोरी जरूर पढ़िए।

दोस्तो जो लोग अपनी किस्मत को टोकते रहते हैं ना, वे लोग इस कहानी को ध्यान से पढ़े। क्योंकि किस्मत रहम तभी करती है, जब बंदे में किस्मत से चैलेज करना जज्बा हो और ऐसे लोगो के सामने किस्मत भी अपना सर झुकाती है।

तो दोस्तो चलिए जानते हैं हार्दिक पांड्या जी का 5 रुपए की मैगी से 5 करोड़ की घडी तक का सफर हिंदी में। दोस्तो इस कहानी को आखिर तक जरूर पढ़िए, क्योंकि ये कहानी बहुत ही इंस्पायरिंग है।

Hardik Pandya Real Life Inspirational Story in Hindi

हार्दिक पांड्या जी जो एक मिडिल क्लास फैमिली से बीलोंग करते हैं, और वो पढ़ाई लिखाई में भी कुछ खास नहीं थे। कॉलेज की तो बात ही छोड़ दीजिए क्योंकि जब वे 9th class में थे, तब तीसरी attempt में pass होने के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई करना ही छोड़ दिया था।

पर हार्दिक पांड्या जी को क्रिकेट में बहुत ही ज्यादा इंट्रेस्ट था, इसीलिए वे दूसरे गांव में क्रिकेट खेलने के लिए जाया करते थे। वहा पर अगर उनकी टीम जीतती थी, तो उनको से 300 से 400 रुपए मिलते थे। गाव से दूसरे गांव तक का सफर वे अक्सर दूसरो से लिफ्ट मांग कर पूरा करते थे, ताकि लंच के लिए पैसे बच सकें।

इसके बावजूद भी हार्दिक पांड्या जी को पूरा दिन 5 रुपयों की मैगी पर दिन निकालना पड़ता था। क्योंकि प्रोपर डाइट मेंटेंट करना तो मुश्किल था, बाकी का खाना खाने से नींद आती थी, और ऐसी सिच्वेशन में हार्दिक पांड्या जी पूरे पूरे दिन क्रिकेट खेलते थे।

एक इंटरव्यू में हार्दिक पांड्या जी ने बताया था की कभी कभी बहुत बुरा लगता था, क्योंकि इतनी बचत करने के बावजूद भी हमे किराए के घर में रहना पड़ता है। पहले तो इनके पापा एक फाइनेंस कंपनी में काम करते थे, लेकिन हार्ट अटैक आने के बाद उनको वो काम करना छोड़ना पड़ा।

हार्दिक पांड्या जी की फाइनेंशियल सिच्वेशन बहुत खराब थी, लेकिन इसके बावजूद भी उन्होंने अपना गोल चेंज नहीं किया, क्योंकि उन्होंने ठान लिया था की अब क्रिकेट में ही कैरियर बनाना है। और इतनी सिद्धत से अगर चाहो तो भगवान भी मिल जाते हैं।

और उसके बाद हार्दिक पांड्या जी का क्रिकेट में अंडर 16 के कैंप में सिलेक्शन हो गया। और इसी बीच इंग्लैड की टीम इंडिया में आकर खेलने वाली थी, और सारे बच्चों को अपना नाम Ball Boy के लिए देना था। पर यहां हार्दिक पांड्या जी का एटीट्यूड देखिए।

उन्होंने कहा की मुझे Ball Boy बनना ही नहीं है, क्योंकि में यहां पर क्रिकेटर बनने आया हु, Ball Boy नही। इस हरकत के बाद कोच ने उनको लगभग बाहर ही निकाल दिया था। पर हार्दिक पांड्या जी का जुनून यह था की जो चाहिए और जो सपना है, उससे कम में तो मानना ही नहीं है।

कई लोगो को ये हरकत अच्छी नही लगेगी, लेकिन जिसके अंदर ये पागलपन होता है ना, वो ऐसे ही होते हैं। और इस जुनून और पागलपन के वजह से हार्दिक पांड्या जी को आज इस लेवल तक पहुंचा दिया है।

दोस्तो सचिन तेंदुलकर जी के साथ इनका पहला किस्सा बहुत ही फेमस है। जब पहली आईपीएल में हार्दिक पांड्या जी जबर्दस्त तरीके से खेले और Mumbai Indians जीत गए, तब सचिन तेंदुलकर जी ने हार्दिक पांड्या जी को एक सरप्राइस विजिट किया था।

और हार्दिक पांड्या जी 20 मिनिट तक उस पल पर विश्वास नहीं कर पा रहे थे। दोस्तो मैंने कही पर सुना और पढ़ा भी था की मां बाप के पैसों पर ऐश करने में मज़ा कहा, मज़ा तो तब आएगा जब पैसा अपना, कामयाबी भी अपनी हो और मजा अपने मां बाप करें।

और ऐसा ही एक इंसिडेंट 2019 में हार्दिक पांड्या जी के साथ हुआ था। जब हार्दिक पांड्या जी के अच्छे परफॉरमेंसेस के वजह से Mumbai Indians ने IPL का Title जीता था। और उसकी पार्टी में हार्दिक पांड्या जी के घर वालों को invite किया हुआ था।

उस पार्टी में हार्दिक पांड्या जी के पिताजी भी गए हुए थे, जो महानायक अमिताभ बच्चन जी के बहुत ही बड़े फैन हैं। तब उस पार्टी में खुद अभिताभ बच्चन जी ने हार्दिक पांड्या जी के पिताजी से कहा था कि आप धन्य हो, जो आपके घर ऐसा बेटा पैदा हुआ है और में इनका फैन हू।

दोस्तो किसी भी मां बाप के लिए इससे बड़ी गर्व की बात क्या हो सकती हैं की जिंदगी भर आप जिसके बड़े Fan रहे हो, वो खुद आपसे आकर बोले की में आपके बेटे का फैन हूं। दोस्तो शायद असली कामयाबी इसे ही कहते हैं।

दोस्तो हार्दिक पांड्या जी की आज की लाइफ स्टाइल आज कोई नवाबों से कम नही है। दोस्तो हार्दिक पांड्या जी Mumbai जैसे बड़े शहर में 8 Bhk apartment में रहते हैं और ये हमेशा अपनी महंगी चीजों को लेकर बहुत ही चर्चित रहते हैं।

जैसे की 3.50 करोड़ की लेंबोगर्नी कार, 5 करोड़ की घडी और 2 लाख का कुर्ता पायजामा और 1.50 लाख के जूते और नजाने और क्या क्या.. जब किसी ने हार्दिक पांड्या जी से यह पूछा की क्या आप Show Up करने के लिए ये सब करते हैं?

तब हार्दिक पांड्या जी मुस्कुराते हुए बोले की जब में पूरा दिन मैगी पर गुजरता था, तब भी में ऐसा ही था। मुझे जब कोई भी चीज पसंद आती थी, तो में उसकी कीमत जमा करने को कोशिश करता था। और उसके लिए में अपने मैन goal के पीछे भागता था, और आज भी मैं वही करता हू।

दोस्तो ये था हार्दिक पांड्या जी का zero से लेकर hero बनने तक का सफर, उमिद है आप सभी को पसंद आया होंगा। दोस्तो अगर आपको हार्दिक पांड्या जी की कहानी पसंद आई होगी तो इसे अपने दोस्तो के साथ इस कहानी को अवश्य शेयर कीजिए।

जरुर पढें: जानिए 72 दिन तपते रेगिस्तान में कैसे जिंदा रहा है एक इंसान? रीयल लाइफ स्टोरी

Mohammad Ali Real Life Short Story in Hindi

दोस्तों मुहम्मद अली अमेरिका के एक प्रोफेशनल बॉक्सर थे, जिनको दुनिया का महान हैवी वेट चैंपियन कहा जाता था। और उन्होंने अपनी पूरी बॉक्सिंग कैरियर में टोटल 61 फाइट्स लढी हुई है, उसमे से उन्होंने 56 फाइट्स जीती हुई है। उन्होने अपनी पूरी बॉक्सिंग कैरियर में सिर्फ 5 बार ही हारे हुए हैं और यही उनको दूसरे बॉक्सर से अलग और महान बनाता है।

दोस्तो मुहम्मद अली जी का जन्म 17 जनवरी 1942 को अमेरिका में हुआ था। दोस्तो उनका असली नाम Cassius Marcellus Clay Jr है। उनके बॉक्सिंग की शुरुआत के पीछे भी एक इंट्रेस्टिंग कहानी है, चलिए उसे जानते हैं।

जब वो 12 साल के थे तब उनकी सायकल चोरी हो गई थी और जब वो पुलिस के पास गए तो उन्होंने पुलिस को कहा की में उस चोर को पंच मारना चाहता हूं? तब उस पुलिस वाले ने मुहम्मद अली जी से कहा की “अगर तुम्हे लोगो से लढ़ना है, तो तुम्हे लढ़ना भी आना चाहिए.”

उस पुलिस वाले के ये शब्द Mohammad Ali के लिए मोटिवेशन बन गए, और तभी से उन्होंने बॉक्सिंग की ट्रेनिंग लेने की शुरुआत करी। जिस पुलिस अधिकारी ने उन्हे ऐसा कहा था वो पुलिस अधिकारी बॉक्सिंग की ट्रेनिंग भी देते थे। मुहम्मद अली ने शुरुआत में उन्हीं से ही ट्रेनिंग ली।

उसके बाद उन्होंने अपनी पहली फाइट 1954 में 12 साल की उम्र में जीती हुई थी।और 1956 में मुहम्मद अली ने लाइट वेट हैवी वेट टर्नामेंट में जीत हासिल की। और 1956 में उन्होंने बॉक्सिंग कोटा से rom olimpic में क्वालीफाई किया, जहा अपनी performance से लोगो के दिल जीत लिए।

उसके बाद मुहम्मद अली ने अपनी पावरफुल पंचेस से पोलैंड के बॉक्सर Pietrzy kowski को हराकर गोल्ड मेडल को अपने नाम कर दिया। 1963 में उन्होंने अपने पहले प्रोफेशनल मैच में हेनरी कूपर नाम के बॉक्सर को हराकर दुनिया को अपना दम दिखाया।

उसके बाद 1964 में 22 की उम्र में उन्होंने सोनी लिसन को हराया और पहली बार वर्ल्ड चैंपियनशिप को अपने नाम कर दिया। जहा उनका the greatest नामों पड गया, और उनको उसी नाम से बुलाया जाने लगा। 8 मार्च को मुहम्मद अली की फाइट जोसेफ विलियम फ्रेजर के साथ हुई और वो फाइट 15 राउंड तक चली।

और मुहम्मद अली जी को अपनी बॉक्सिंग कैरियर में पहली बार हार का सामना करना पड़ा। मुहमद अली उस टाइम तक रेगुलर 31 मैच के विनर रह चूक थे, वही पर फ्रेजर रेगुलर 26 मैचेस के विनर रह चुके थे। उसके बाद मुहम्मद अली ने बहुत सारे मैचेस को खेले और उनमें जीते भी।

1984 में मुहम्मद अली परकीसन नाम के एक बीमारी से पीड़ित हुए थे, जिसके चलते 2016 में उनको सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ होने लगी और उनको हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। लेकिन अगले ही दिन उनकी मौत हो गई थी।

दोस्तो हमारे द्वारा आपके समक्ष लाई गई ये 5 Real Life Inspirational Stories अगर आपको पसंद आई होगी और आपके लिए उपयोगी साबित हुई होंगी तो अपने दोस्तो के साथ इसे अवश्य शेयर कीजिए। और ये सभी प्रेरणादायक हिंदी कहानियां आपको कैसी लगी? हमे नीचे कमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके जरूर बताएं।

Releted Articles:

Real Life Inspirational Stories in Hindi PDF Free Download

दोस्तो अगर आप Real Life Inspirational Stories in Hindi PDF Free Download करना चाहते हैं? तो आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कीजिए और pdf को Free में डाउनलोड कीजिए।

Real Life Inspirational Stories in Hindi PDF Download

दोस्तो आज के इस Top 3 Real Life Inspirational Stories In Hindi आर्टिकल में सिर्फ इतना ही, दोस्तो हम आप से फिर मिलेंगे ऐसे ही एक inspiration Story के साथ तब तक के लिए आप जहा भी रहिए खुश रहिए और खुशियां बांटते रहिए।

धन्यवाद आपका दिन शुभ हो 🙏🙏🙏

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये.

Leave a Comment