Top 10 Life Changing Gautam Buddha Stories in Hindi

Top 10 Life Changing Gautam Buddha Stories In Hindi | गौतम बुद्ध की कहानियाँ

नमस्कार मेरे प्यारे भाईयो और बहनों आप सभी का नॉलेज ग्रो मोटिवेशनल ब्लॉग पर स्वागत है। दोस्तो आज के इस आर्टिकल के जरिए में आपके साथ Top 10 Life Changing Gautam Buddha Stories In Hindi में शेयर करने वाला हू। इसीलिए आप सब इस लाइफ चेंजिंग आर्टिकल को आखिर तक जरूर पढ़िए।

Gautam Buddha Stories in Hindi
Top 10 Life Changing Gautam Buddha Stories in Hindi

Top 10 Life Changing Gautam Buddha Stories In Hindi | गौतम बुद्ध की कहानियाँ

दोस्तो मैंने आप सभी के लिए गौतम बुद्ध की कहानियों को ढूंढकर इकट्ठी किया हुआ हु, ताकि आपके जीवन में सफलता हासिल कर सकू। ये गौतम बुद्ध की कहानियाँ आपकी रचनात्मक और आपकी अंदरूनी गुणों से एक बार फिर से मिलवाने में आपकी मदद करेगी। तो बिना समय को गवाए चलिए आपके साथ गौतम बुद्ध की शिक्षाप्रद कहानियों को शेयर करते हैं।

Heart Touching Gautam Buddha Story in Hindi – दिल को छू लेने वाली कहानी

दोस्तो आज की इस पहली कहानी से आपको सीखने को मिलेगा का ही जीवन में असंभव कुछ भी नही है और जब जागो तब सवेरा होता है। अगर आपको ये लगता है की मैने बहुत से बुरे काम किए हुए और अब इन गलत कामों को सुधारने के लिए कोई भी विकल्प नहीं है, तो आपको गौतम बुद्ध के जीवन की यह दिल को छू लेने कहानी को एक बार अवश्य पढ़ना चाहिए।

heart touching gautam buddha story in hindi
Best Life Changing Gautam Buddha Stories in Hindi

गौतम बुद्ध और उंगलीमाल की कहानी

एक दिन बुद्ध श्रावस्ती के ही एक गांव में भिक्षाटन के लिए पहुंचते हैं। जब बुद्ध गांव में प्रवेश करते हैं, तो देखते हैं कि पूरे गांव में सन्नाटा छाया हुआ था। दूर – दूर तक कोई व्यक्ति नजर नहीं आ रहा था। बुद्ध उस गांव के पहले द्वार पर जाते हैं और कहते हैं , भिक्षामदेही, परंतु भीतर से बाहर कोई नहीं आता।

बुद्ध दूसरे द्वार पर जाते हैं परंतु कोई दरवाजा नही खोलता। बुद्ध तीसरे द्वार पर जाते हैं परंतु उसमें से भी कोई व्यक्ति बाहर नहीं आता। फिर अचानक एक दरवाजा खुलता है, जिसमें से एक व्यक्ति बाहर निकलता है , वह जल्दी से बुद्ध का हाथ पकड़ता और उन्हें अपने घर में ले जाता है और कहता है क्षमा करें, बुद्ध परंतु इस समय आप बाहर नहीं जा सकते।

उंगलीमाल को श्रावस्ती की सीमा पर देखा गया है। सभी गांव वाले डरके मारे अपने अपने घरों की खिड़कियां दरवाजे बंद करके बैठे हुए हैं। बुद्ध उस व्यक्ति से पूछते हैं कौन है ये उंगलीमाल और उससे इतना भय क्यों है ? वह व्यक्ति कहता है उंगलीमाल एक राक्षस है।

उसे जो भी मनुष्य मिलता है बच्चा वृद्धि, स्त्री या पुरुष, यहाँ तक कि सन्यासी भी, वह किसी को भी नहीं छोड़ता। महाराज प्रसन्नजीत के सैनिक भी उससे डरते हैं। बुद्ध उस व्यक्ति से पूछते हैं, क्या वह यह सब धन के लालच में करता है ?

वह व्यक्ति कहता है नहीं धन का उसे कोई लालच नहीं है। वह जब भी किसी मनुष्य पर वार करता है, तो उसकी उंगली काट कर अपने गले की माला बनाता है। इसलिए उसका नाम उंगली माल पड़ गया है और यह भी सुना है कि जब उसके गले की माला में सौ उंगलियां पूरी हो जाएंगी तो उसकी विनाशक शक्तियां और भी ज्यादा बढ़ जाएंगी।

बुद्ध कहते हैं आभार आपका ! आपने मुझे उसके बारे में बताया। वह व्यक्ति कहता है , कृपाकर आप बाहर ना जाए। वह आप पर भी वार कर सकता है। बुद्ध कहते हैं, भय से अपनी राह छोड़ दो, ऐसा मैंने कभी नहीं किया। मुझे भिक्षा मांगता देख , जन – जन के हृदय में उंगलीमाल का भय कम होगा।

वह व्यक्ति कहता है नहीं बुद्ध आप मत जाइए , वह बहुत खतरनाक है। बुद्ध कहते हैं, वह खतरनाक नहीं दुखी है और मुझे उसके पास जाना होगा, उसे मेरी आवश्यकता है। इतना कहकर बुद्ध उस व्यक्ति के पास से चले जाते हैं। कुछ दूर चलने के बाद बुद्ध वन में प्रवेश करते हैं।

वन में चारों ओर एक सन्नाटा छाया होता है। दूर – दूर तक ना तो कोई मनुष्य, और ना ही कोई पशु पक्षी दिख रहा होता है, परंतु बुद्ध अपने मार्ग में आगे बढ़ते रहते हैं। अचानक बुद्ध के सामने उंगलीमाल आकर खड़ा हो जाता है, उसका रूप इतना डरावना होता है कि कोई भी व्यक्ति उसे देखकर भयभीत हो जाए।

उसके गले में उंगलियों की माला होती है। चेहरा और हाथ रक्त से सने होते हैं और शरीर बलशाली होता है। उसका रूप इतना भयानक होता है कि किसी भी साधारण व्यक्ति के प्राण तो उसे देखते ही निकल जाए, परंतु बुद्ध पर उंगलीमाल के डरावने रूप का कोई असर नहीं होता।

बुद्ध कुछ क्षण तक एक शांत मुस्कुराहट के साथ उंगलीमाल की तरफ देखते हैं और फिर उसकी बगल से निकल अपने मार्ग में आगे बढ़ जाते हैं। बुद्ध को ऐसा करते देख उंगलीमाल को समझ नहीं आता कि उसके साथ यह हो क्या रहा है ?

वह मन ही मन सोचता है कि मुझे देखकर लोग या तो भाग जाते हैं या मुझे देखकर ही मर जाते हैं या फिर मुझसे अपने प्राणों की भीख मांगने लगते हैं। मैंने कई सन्यासियों को भी मारा है, परंतु मैंने आज तक कोई ऐसा व्यक्ति नहीं देखा, जो मुझे नजरअंदाज करके अपने मार्ग में आगे बढ़ जाए!!

या तो इसने मुझ पर ध्यान नहीं दिया या फिर हो सकता है कि यह देख ही ना सकता हो, परंतु मुझे इससे क्या, मुझे तो अपनी उंगलियों की माला पूरी करनी है। उंगलीमाल बुद्ध को आवाज लगाता है ए साधु रुक !बुद्ध उंगलीमाल को नजरअंदाज करते हैं और अपने मार्ग में आगे बढ़ते रहते हैं।

उंगलीमाल और क्रोध में भरकर बुद्ध को आवाज लगाता है , ए साधु रुक बुद्ध फिर से उंगलीमाल को नजरअंदाज करते हैं और अपने मार्ग में आगे बढ़ते रहते हैं। उंगलीमाल, तीसरी बार बहुत ज्यादा क्रोध में भरकर आवाज लगाता है, ए साधु रुक ! बुद्ध रुकते हैं।

Life Changing Gautam Buddha Stories In Hindi | गौतम बुद्ध की कहानियाँ

उंगलीमाल बुद्ध के पास जाता है और कहता है , मेरे आदेश देने के बाद भी तू रुका क्यों नहीं ? बुद्ध कहते हैं , मैं तो बहुत पहले ही रुक चुका हूं। तुम ही चलते जा रहे हो। उंगलीमाल समझ नहीं पाता कि बुद्ध क्या कह रहे हैं, परंतु वह इतना जरूर समझ जाता है कि सामने खड़ा व्यक्ति उससे डर नहीं रहा है।

उंगलीमाल बुद्ध को डराने के लिए चिल्लाकर पूछता है , ए साधु तुझे मुझसे भय नहीं लग रहा है ? मैं आदिमानव हूं। बुद्ध कहते हैं नहीं, तुम मानव हो। बुद्ध की यह बात उंगलीमाल के हृदय पर लगती है। पहली बार उसे किसी ने मानव कहा था। परंतु वह उस बात को नजरअंदाज करने का प्रयास करता है और बुद्ध से पूछता है,

ए साधु तूने ये क्यों कहा कि तू कब का रुक चुका है जब कि तू तो चल रहा था और तूने ये क्यों कहा कि मैं नहीं रुका ? बुद्ध कहते हैं मैं बहुत पहले ही रुक चुका हूँ। ऐसे सारे बुरे कृत्य छोड़ चुका हूं जिससे किसी भी व्यक्ति को कष्ट पहुंचे। सब जीना चाहते हैं, बस तुम उन्हें करुणा से देखने का प्रयास करो।

बुद्ध के ये शब्द दोबारा से उंगलीमाल के हृदय पर चोट करते हैं, परंतु वह दोबारा से बुद्ध की बातों को नजरअंदाज करने का प्रयास करता है और इस बार वह और क्रोध में भरकर बुद्ध की गर्दन पर अपनी कटारी रख देता है, जिससे वह लोगों की हत्या किया करता था,और बुद्ध से चिल्लाकर कहता है नहीं !

मानव में ना प्रेम है, ना करुणा है, सिर्फ छल और कपट है इसलिए मैं सबकी हत्या करुँगा, किसी को जीवित नहीं छोहुँगा। बुद्ध कहते हैं, तुम्हें लोगों ने बहुत दुख दिया है उंगलीमाल, क्रूरता मनुष्य अज्ञान के कारण ही करता है। ईर्ष्या , द्वेष , मोह माया ये सभी अज्ञान की ही संताने हैं , परंतु वह व्यक्ति ही है जिसमें दया, करुणा, सद्भाव और समझ का उदय भी होता है।

उंगलीमाल यदि इस जीवन में क्रूर और निष्ठुर लोग हैं, तो दयावान भी हैं। बस तुम्हें अपनी आंखों से इस अंधेपन की पट्टी को हटाना होगा, जो तुम्हें केवल बुराई ही दिखा रही है। तीसरी बार बुद्ध के शब्दों को सुन, उंगलीमाल का खुद पर से संयम हट जाता है।

उसे समझ नहीं आता कि पहली बार उसे अपना आपा इतना कमजोर क्यूँ महसूस हो रहा है। वह कोशिश तो करता है, क्रोध करने की , परंतु कर नहीं पाता। वह बड़ी हिम्मत जुटाकर क्रोधित होने का नाटक कर , बुद्ध से कहता है , तुम और व्यक्तियों जैसे नहीं हो।

बुद्ध कहते हैं मैं हर व्यक्ति जैसा ही हूं, बस जागृत हो, यह सिद्ध कर रहा हूं कि हर व्यक्ति में जागने की क्षमता है। मेरा मार्ग क्रूरता को दया में परिवर्तित करता है। उंगलीमाल तुम अनजाने में घृणा के पथ पर हो, बस इस क्षण रुक जाओ। तुम्हारे भीतर भी यह क्षमता है कि तुम दया और करुणा के पथ पर चल सको।

इतना सुनते ही उंगलीमाल के हाथ से कटारी जमीन पर गिर जाती है और उसकी आंखों से आंसू बहने लगते हैं। भला कोई कब तक बुद्ध को अनदेखा करेगा ? उंगली माल रोते हुए बुद्ध से पूछता है , क्या आप वही हैं जिन्हें लोग बुद्ध कहते हैं ? जो लोगों को मुक्ति के मार्ग पर चलना सिखाते हैं।

बुद्ध कहते हैं हां , मैं वही हूं और तुम्हें भी मुक्ति के मार्ग पर ले जाना चाहता हूं। उंगलीमाल कहता है परंतु मैं अब बहुत दूर निकल गया हूं। मैंने बहुत हत्याएं करी हैं , बहुत पाप करे हैं। मैं अब चाहकर भी वापस नहीं लौट सकता और मेरा वापस लौटना असंभव है।

बुद्ध कहते हैं असंभव कुछ भी नहीं , जब जागो तभी सवेरा। उंगलीमाल कहता है मैं अब पुनः जीवन की ओर नहीं मोड़ सकता , बहुत देर हो चुकी है । बुद्ध कहते हैं, तुम में इतनी चेतना है कि तुम जानते हो कि जो तुमने अब तक किया वह बुरा था ।

इसका अर्थ यह है कि तुम जानते हो कि क्या अच्छा है और क्या बुरा उंगलीमाल जिस दिन से तुमने अच्छा कार्य करना शुरू कर दिया, उस दिन से तुम्हारा एक नया जीवन शुरू हो जाएगा। उंगलीमाल कहता है, मैं कितने भी अच्छे कार्य क्यों ना कर लूं परंतु लोग मुझे उसी दृष्टि से देखेंगे और मुझे चैन से जीने नहीं देंगे।

बुद्ध कहते हैं उंगलीमाल यदि तुमने हिंसा का मार्ग छोड़ा तो मैं तुम्हें मार्ग दिखाऊंगा, तुम्हारा संरक्षण करुँगा, तुम्हें लोगों की घृणा से बचाऊँगा। बस पहला क़दम तुम्हे ही उठाना होगा। उंगलीमाल पूछता है, क्या यह हो सकता है ? बुद्ध कहते हैं, अवश्य हो सकता है।

तुम में असामान्य बुद्धि है उंगलीमाल तुम परमसत्य के पथ पर बहुत आगे जाओगे। उंगलीमाल रोते हुए बुद्ध के चरणों में गिर पड़ता है और कहता है , मैं आपको वचन देता हूं कि मैं सारे बुरे कृत्य छोड़ दूंगा और आपके पीछे करुणा के पथ पर चलना सीखुंगा। कृपाकर आप मुझे अपना शिष्य बना लीजिए।

बुद्ध कहते हैं, मैं शिष्य नहीं बनाता बल्कि व्यक्ति स्वयं मेरे संघ से जुड़ता है। उंगलीमाल उसी समय बुद्ध का भिक्षु बन जाता है। यहां पर एक बात समझनी जरूरी है कि बुद्ध किसी को भी शिष्य या भिक्षु नहीं मानते थे। जो भी व्यक्ति उनके साथ जुड़ता था , उसे केवल मार्ग दिखाते थे और वह मार्ग पर चलता था। भिक्षु और शिष्य शब्द केवल संघ से जुड़ने वाले लोगों की पहचान होती थी।

Life Changing Gautam Buddha Stories In Hindi | गौतम बुद्ध की कहानियाँ

कहानी में आगे बढ़ते हैं, बुद्ध का भिक्षु बनने के बाद उसका नाम अहिंसक पड़ जाता है। दोस्तो बुद्ध ने जैसा उसका नाम रखा था ठीक वैसा ही वह बन चुका था, आइए जानते हैं कि कैसे उंगलीमाल राक्षस एक अहिंसक बना, इसीलिए आर्टिकल के अंत तक बने रहिए।

जब अहिंसक प्रथम बार अन्य भिक्षुओं के साथ एक गांव में भिक्षाटन के लिए जाता है, तो गांव के कुछ लोग उससे बदला लेने के लिए, उसे लाठी डंडों से पीटने लगते हैं। जब यह बात बुद्ध को पता चलती है, तो वे तुरंत उसे बचाने के लिए उसके पास पहुंचते हैं और अपने शरीर को उन लाठी डंडों के बीच में ले आते हैं जो अहिंसक को पड़ रहे थे।

बुद्ध को देखकर वे गांव वाले डंडे और पत्थर मारना बंद कर देते हैं। सभी लोग बुद्ध से कहते हैं बुद्ध क्यों इस हत्यारे उंगलीमाल की रक्षा कर रहे हो ? ना जाने कितने लोगों की जानें ली हैं इसने ? बुद्ध कहते हैं, अब यह उंगलीमाल नहीं है। इसका नाम अहिंसक है।

अब यह आपकी ही तरह एक मानव है। वे गांव वाले कहते हैं, ऐसा आदमी कभी नहीं बदल सकता। बुद्ध कहते हैं, यह बदल चुका है। बस आप सब लोग इसे अपनी पुरानी दृष्टि से देख रहे हैं। यदि यह उंगलीमाल होता तो क्या आप में से किसी में भी इतना साहस या बल होता कि कोई इसे एक उंगली भी लगा सके।

यह आपका हर वार खाता रहा , क्या इसने आप पर पलटकर वार किया ? क्या यह परिवर्तन आपको नहीं दिखा ? आज इसने अपना लहू बहा से अपने सारे बुरे कृत्य धो डाले हैं। आप लोगों के द्वारा इतनी मार खाने के बाद भी इसकी आंखों में आपके लिए क्रोध नहीं है। क्या यह बदलाव आपको नहीं दिख रहा है ? यह तो बदल गया, परंतु आप कब बदलोगे?

इतने में ही उन गांव वालों में से एक स्त्री कहती हैं, यह परिवर्तन मैंने स्वयं देखा है। वह स्त्री गांव वालों से कहती है, आप में से कौन ऐसा है जो दूसरों के दुख में दुखी हो , दूसरों की पीड़ा सहन ना हो, तो उसे हर प्रकार की सहायता प्रदान करे। यह इस भिक्षु ने किया है।

दो दिन पहले एक व्यापारी अपनी पत्नी को लेकर जा रहा था। उसकी पत्नी प्रसव पीड़ा से व्याकुल थी। मैं पास से ही गुजर रही थी इसलिए मैं भी दौड़ी दौड़ी गई। उस स्त्री की पीड़ा बढ़ती ही जा रही थी। घना जंगल होने के कारण उसे कहीं ले जाया भी नहीं जा सकता था।

तभी यह भिक्षु वहां आ पहुंचा और इसने मुझसे पूछा कि क्या हुआ बहन ? मैंने इसे बताया कि यह स्त्री प्रसव पीड़ा में है और इस घने वन में हम कुछ कर भी नहीं पा रहे हैं। कब तक यह कष्ट भोगेगी , कहीं इसके और इसके बच्चे के प्राण ना चले जाएं। इस भिक्षु ने मुझसे कहा कि ऐसा नहीं होगा।

मैं अभी अपने गुरु के पास जाऊंगा , वे अवश्य ही कोई मार्ग दिखाएंगे। इतना कहकर यह भिक्षु दौड़कर वहां से चला गया। बुद्ध कहते हैं व्यथित हो अहिंसक मेरे समक्ष आया और मेरे पैरों में गिर मुझसे कहने लगा बुद्ध एक स्त्री गहन प्रसव पीड़ा में है और उसकी पीड़ा बढ़ती ही जा रही है , कहीं मां और बच्चे को कुछ हो ना जाए।

मैंने कहा दौड़कर जाओ और उससे कहो बहन जिस दिन से मेरा जन्म हुआ है। मैंने जानबूझकर किसी भी प्राणी को कष्ट नहीं पहुंचाया है। मेरे सत्कर्म तुम्हारा सुरक्षा कवच बने, आपकी और आपके शिशु की रक्षा करे। अहिंसक ने मुझसे कहा , परंतु यह तो असत्य होगा बुद्ध !

सत्य तो यह है कि मैंने आज तक बहुत से प्राणियों को कष्ट पहुंचाया है। यदि मैंने ऐसा कहा तो वे माता और शिशु उसी क्षण प्राण त्याग देंगे। फिर मैंने कहा तो तुरंत जाओ और उस स्त्री से कहो बहन जिस दिन से मेरा एक नया जन्म हुआ है , मैंने सभी बुरे कृत्यों को त्यागा है। और उस दिन से मैंने किसी भी प्राणी को कष्ट नहीं पहुंचाया है।

मेरे सत्कर्म आपका सुरक्षा कवच बने और आपकी और आपके शिशु की रक्षा करे। इसने मुझसे पूछा कि क्या मेरे सत्कर्म उन्हें बचा लेंगे ? मैंने कहा , अवश्य यह तुम्हारी अपनी कमाई है या तो तुम इसे अपने लिए बचा कर रखो या फिर किसी पराए पर खर्च कर दो।

अपने कमाए सत्कर्म को किसी पराए पर न्योछावर करने से पहले अहिंसक ने एक क्षण नहीं सोचा और यह उसी समय उस स्त्री और उसके शिशु की जान बचाने के लिए वहां चला गया। वह स्त्री कहती है , हां , यह भिक्षु दौड़कर वहां आया, अभी भी वह स्त्री गहन पीड़ा से जूझ रही थी।

इसने अपने दोनों हाथ जोड़े और आंखें बंद करके कहने लगा, बहन जिस क्षण से मैं भिक्षु बना हु, उस क्षण के बाद मैंने कोई भी ऐसा कृत्य नहीं किया , जिससे किसी भी प्राणी को कष्ट पहुंचे मेरे सत्कर्म आपके लिए सुरक्षा कवच बनें, आपकी और आपके शिशु की रक्षा करें और इतना कहते ही उस स्त्री ने अपने बच्चे को जन्म दे दिया।

दूसरों के दुख से दुखी होने वाला किसी को कैसे दुख दे सकता है! यदि यह भिक्षु मन का सच्चा ना होता, तो वह स्त्री कब के अपने प्राण त्याग चुकी होती। अहिंसक बुद्ध से कहता है। इन्हें मत रोकिए बुद्ध इन्हें मारने दीजिए और तब तक मारने दीजिए जब तक कि इनके मन का क्रोध शांत ना हो जाए ।

बुद्ध कहते हैं कर्म और गुणों के भंडार हो तुम। आज तुमने अपने नाम अहिंसक को सिद्ध कर दिया है। बुद्ध और उस स्त्री की बात सुन वे सभी गांव वाले कहते हैं , आप सही कह रहे हैं बुद्ध। अहिंसक बदल चुका है और हम से ही देखने में भूल हो गई थी।

Life Changing Gautam Buddha Stories In Hindi | गौतम बुद्ध की कहानियाँ

दोस्तो इस कहानी से हमे यह सीखने को मिलता है की👇👇👇

लोग सोचते हैं की उन्होंने बहुत सारे गलत काम किए हुए है, अब इन गलत कामों को सुधारने के लिए कोई भी विकल्प नहीं है,
पर इस पर गौतम बुद्ध कहते है कि चाहे आपने अब तक कितने भी बुरे काम किए हुए होंगे, अगर आप एक विचार को अपने मन में लाते हैं, की अब मुझे कुछ सही करना है।

तो वही विचार आपके रूपांतरण का कारण बन सकता है। पर सबसे जरूरी बात यह है की क्या तुम पहला कदम उठाने के लिए तैयार है। दोस्तो यह कहानी आपको कैसी लगी नीचे कमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके जरूर बताएं।

Story of Gautam Buddha in Hindi – गौतम बुद्ध की कहानी

दोस्तो आज की यह दूसरी कहानी आपको दिन के हर क्षण में जागरूक कैसे रहे यह सिखायगी, अगर आप दिन के हर क्षण में जागरूक कैसे रहे यह जानना चाहते थे? तो आप गौतम बुद्ध के जीवन की यह कहानी आपको जरूर पढ़ना चाहिए।

gautam buddha motivational stories in hindi
Gautam Buddha Motivational Stories in Hindi

2. जागरूकता

एक बार एक नौजवान लड़का बौद्ध भिक्षु से पूछता है, की मुनीवर होश क्या है और जागरूकता क्या है और हम इसे अपने जीवन में कैसे ला सकते हैं? वो बौद्ध भिक्षु उस लड़के से कहते हैं, में तुम्हे एक छोटी सी घटना के बारे में बताता हु।

एक बार बुद्ध अपने सैकड़ों भिक्षुओं को प्रवचन दे रहे थे, और बुद्ध के सभी भिक्षु बुद्ध को बड़े ध्यान से सुन रहे थे। लेकिन बुद्ध के बिलकुल सामने वाली पग्ती में सबसे आगे बैठा हुआ भिक्षु बुद्ध को सुनने के दौरान अपने पैर का अंगूठा हिला रहा था।

जैसे ही बुद्ध की नजर उस भिक्षु पर पड़ती है, तो बुद्ध बोलते बोलते अचानक चुप हो जाते हैं। बुद्ध का इस तरह से अचानक चुप हो जाने से वहा उपस्थित लोग बहुत चौकते है। जो भिक्षु अपने पैर का अंगूठा हिला रहा था, बुद्ध उससे पूछते हैं कि तुम्हारे पैर का अंगूठा क्यों हिल रहा है?

जैसे ही वह भिक्षु बुद्ध के इन शब्दो को सुनता है, वह भिक्षु अपने पैर का अंगूठा हिलाना बंद कर देता है। और बुद्ध से कहता है की बुद्ध आपके शब्द और समय ये दोनो ही कीमती है, इसीलिए आप इस तरह की छोटी बातो पर ध्यान मत दीजिए, और वैसे भी में आपको सुन तो रहा था, तो इससे अंतर क्या पड़ता है?

की मेरे पैर का अंगूठा हिल रहा था या नहीं? तो बुद्ध उस भिक्षु से पूछते हैं कि क्या तुम अपने पैर का अंगूठा जान बूझकर हिला रहे थे? वह भिक्षु बुद्ध से कहता है कि नही बुद्ध, मुझे तो पता ही अब लगा है। बुद्ध कहते हैं फिर यह छोटी बात नही है,

क्योंकि अगर तुम्हारे पैर का अंगूठा तुम्हारे बिना मर्जी के हिल सकता है, तो तुम्हारा मन भी तुमसे बिना तुम्हारे मर्जी के कुछ भी करवा सकता है। और यही कारण है की व्यक्ति ऐसे पाप कर देता है की जिन्हे करने के बारे में वो व्यक्ति सोच भी नही सकता था।

Life Changing Gautam Buddha Stories In Hindi | गौतम बुद्ध की कहानियाँ

उसके बाद वह भिक्षु बुद्ध से कहता है की बुद्ध मुझे क्षमा कीजिए और जिसे मैं छोटी समस्या समझ रहा था, यह तो बहुत बड़ी समस्या है। कृपा कर मुझे बताए कि इस बड़ी समस्या से छुटकारा कैसे पाएं? बुद्ध कहते हैं होश के द्वारा और जागरूकता के द्वारा...

वह भिक्षु बुद्ध से पूछता है की होश क्या है? बुद्ध कहते हैं कि होश का अर्थ है जागकर देख लेना, क्या तुमने यह ध्यान नहीं दिया की तुम्हारे पैर का अंगूठा हिल रहा था लेकिन जैसे ही तुम्हारा ध्यान उस पर गया, वह हिलना बंद हो गया।

पूरे दिन में जब भी याद आए खुद को जागरूकता के साथ देखो की टीम क्या कर रहे हो और क्यों कर रहे हो? तुम्हे बेहोशी में जीने की आदत है, इसीलिए तुम बार बार होश खो दोगे. लेकिन तुम्हे बार बार अपने होश को वापस लाना है।

धीरे धीरे तुम पाओगे की तुम्हारे अंदर एक ऐसा जागरण पैदा हो रहा है, जिसे बेहोशी में बदलने का कोई उपाय नहीं है। उसके बाद वह बौद्ध भिक्षु उस नौजवान से पूछते हैं कि तुम इस घटना से क्या समझे? वह नौजवान लड़का कहता है की होश का अर्थ है खुद को देखना।

अगर हम लगातार जागरूक रहने का प्रयास करते हैं, तो हमारे अंदर एक ऐसा जागरण पैदा होगा, जिसे बेहोशी में बदलने का कोई तरीका नहीं है। फिर वह बौद्ध भिक्षु उस लड़के से कहते हैं कि शुरुआत में जबरदस्ती जागरूक रहो और बाद में जागरूकता तुम्हारा स्वभाव बन जाएगा।

गौतम बुद्ध की कहानी इन हिंदी – Gautam Buddha Ki Kahani in Hindi

दोस्तो भगवान गौतम बुद्ध के द्वारा कही गई यह कहानी आपके जीवन की एक बहुत बड़ी गलती को खत्म कर देंगी। दोस्तो इसीलिए इस लाइफ चेंजिग कहानी को अंत तक जरूर पढ़िए।

Gautam Buddha Ki Kahani in Hindi - गौतम बुद्ध की कहानी
Gautam Buddha Ki Kahani in Hindi

3. भगवान बुद्ध और एक सर्प की कहानी

एक बार गौतम बुद्ध अपने शिष्यो के साथ बैठे उन्हे कुछ समझा रहे थे, इतने में वहा पर राजा अजात शत्रु आ पहुंचते हैं और उनसे पूछते हैं कि जब से में आपका अनुयाई बन गया हूं, तब से सभी लोग मेरे सीधेपन का गलत फायदा उठा रहे हैं?

आपका अनुयाई बनने से पूर्व सभी लोग मुझसे बहुत डरते थे, क्योंकि में पहले बहुत क्रूर था, और किसी को भी मृत्यु दंड देने में एक क्षण भी नही लगता था। परंतु अब आपका अनुयाई बनने के बाद मेरा मन इन कामों को करने के लिए तैयार नहीं होता है और में सभी लोगो को प्रेम देना चाहता हूं।

लेकिन कुछ लोग इस चीज का गलत फायदा उठाकर रहे हैं, और इससे मेरे प्रजा को खतरा है और मेरे शासन में दिक्कते आ रहे हैं। अब आप ही बताए की में क्या करू? बुद्ध कहते हैं कि तुम्हे इसका उत्तर एक कहानी के द्वारा देता हूं।

एक बार एक भिक्षु एक गांव से गुजर रहा था, और इस गांव में बहुत ही बड़ा पीपल का वृक्ष था। भिक्षु सोचता है की बहुत देर चलते चलते हो गई है, अब कुछ देर के लिए इस पेड़ के नीचे आराम करता हूं। वो भिक्षु पेड़ के नीचे आराम करने के लिए जाने को ही होता है की कुछ लोग उसे रोकते हैं।

और उससे कहते है की ठैरो वहा पर मत जाओ, वहा पर एक जहरीला सांप रहता है, जिसने बहुत सारे लोगों को डस लिया है, और वो बहुत सारे लोगो की हत्या अपने सर लिए घूमता है। और वो इतना खतरनाक है की जो भी उसके सामने आ जाता है, वो उसे जीवित नहीं छोड़ता है।

वो भिक्षु मुस्कुराता है और इस व्यक्ति से कहता है की एक दिन तो सबको मरना है तो अगर मुझे आज मरना है, तो इसमें कौन सी बड़ी बात है! आप मेरी चिंता ना करे और मुझे जाने कि आज्ञा दे। और वो भिक्षु वहा पर आराम करने के लिए उस पेड़ के निचे चला जाता है। और वहा पर अपना आसन बिछाकर बैठ जाता है।

कुछ ही क्षण में वो जहरीला सर्प उस भिक्षु के सामने आ जाता है और उससे कहता है की हे व्यक्ति क्या तुम्हे मुझसे डर नही लगता? और क्या तुम्हे पता नही है की यह मेरा इलाका है.. और यहां पर आने की किसी की हिम्मत नही होती।

फिर वह भिक्षु उस सर्प से बड़े प्रेम पूर्वक कहता है की हे भाई इसमें डर वाली कौन सी बात है? तुम जो भी करते हो, वो इसीलिए तो करते हो क्यूंकि तुम्हे डर है की कोई तुम्हे मार न दे। इसीलिए तुम दूसरो को डसते हों।

मुझे किसी बात का डर नही है, ना मुझे मृत्यु का भय है और नाही मुझे जीवन कि लालसा है। कोई मुझे नुकसान पहुंचा ही नही सकता है, तो में तुमसे क्यों बेहभित हु। सर्प को गहरा आघात पहुंचता है।

उसने आज तक ऐसे व्यक्ति देखे थे जो उसे मारने की कोशिश करते और उसने आज तक ऐसे व्यक्ति देखे थे जो उससे डर कर भागते थे। आज तक उसने ऐसा व्यक्ति नही देखा था, जो उसे देखकर बिलकुल बेहभित ना हो।

उसके बाद वह सर्प उस भिक्षु के चरणों में लैट जाता है। और उनसे कहता है की हे प्रभु मैने आज तक जो भी किया वो सब अपनी जान बचाने के लिए किया, क्योंकि अगर में इस तरह का रूप धारण नही करता, तो लोग मुझे जीवित नहीं छोड़ते।

Life Changing Gautam Buddha Stories In Hindi | गौतम बुद्ध की कहानियाँ

भिक्षु कहता है की तुम बिलकुल सही कह रहे  हो, लेकिन अगर तुम जीवन के इस मोह से मुक्त होना चाहते हो? तो तुम शांत हो जाओ और प्रेम से भर जाओ। और जानो की जीवन एक दिन खत्म हो ही जायेगा और उसके लिए बुरे काम करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

इतना कहकर वो भिक्षु वहा से चलता है और वो सर्प अपने भीतर इन बातो को रख लेता है। और प्रण लेता है की आज से वो कोई भी गलत कृत्य नही करेगा। इसके बाद सर्प अपने सभी गलत कृत्यों को छोड़ देता है पर इसका उल्टा प्रभाव उसके ऊपर पड़ता है।

जो लोग उसे देखकर डर के बाघ जाते थे, अब उसके सीधे पन का गलत फायदा उठा रहे हैं। अब सभी लोग उसे छेड़ते हैं और उसे चोटे पहुंचाते है। अब वो सर्प बहुत दुखी रहना लगा और बहुत ही ज्यादा चोटो से ग्रस्त रहना लगा।

अब वो लोगो को कोई भी नुकसान नही पहुंचाता था और सभी लोगो से प्रेम करने की कोशिश करने लगता था। परंतु लोगो का उससे जो बह था वो ही उसे सुरक्षित रख रहा था। क्योंकि अब कोई भय नही है, इसीलिए लोग उससे डरते नहीं है।

कुछ दिन बाद वही भिक्षु दुबारा से उस वृक्ष के नीचे आकर बैठता है और उस सर्प को देखता है, और बड़ा आश्चर्य चकित होता है, की पहले इस सर्प की क्या स्थिति थी और अब इसकी स्थिति क्या हो गई है।

सर्प उस भिक्षु से कहता है की हे प्रभु जब से आपने मुझे यह कहा है की शांत हो जाऊ और प्रेम को अपनाऊ तब से लोगो ने मेरे साथ गलत व्यवहार करना शुरू कर दिया है और जिससे मुझे अपना जीवन जीने में बहुत कठिनाई हो रही है।

अब आप ही बताइए कि मुझे क्या करना चाहिए? भिक्षु कहता है की हे मित्र मैने तुमसे यह नही कहता की तुम अपने स्वभाव को ही बदलो, क्रूरता तुम्हारा स्वभाव है और अगर तुम क्रूर नही रहोगे, तो लोग तुम्हें खत्म कर देंगे। इसका अर्थ यह नहीं है की तुम अपना भीतर से जो उद्देश्य है उसको गलत रखो।

दोस्तो इसका अर्थ यह है की आपको भीतर से अपने आपको सही रखना है, बाहर से आपको वो दिखाना होगा जो जरूरी है। क्योंकि सर्प एक जहरीला जीव है और लोगो के मन में उसके लिए डर होना जरूरी है।

वह भिक्षु उस सर्प से कहते ही की अगर लोगो के मन में तुम्हारे लिए भय नही होंगा, तो लोग तुम्हे हानि ही पहुचाएंगे। परंतु तुम्हे भीतर से अपने आपको सही रखना चाहिए, की तुम्हे किसी को कोई नुकसान नही पहुंचाना चाहिए। केवल अपना भय बनाए रखना है।

तो इसके बाद बुद्ध अजात शत्रु से कहते हैं की अजात शत्रु तुम इस कहानी से क्या सीखे। और इसका अर्थ यह है की तुम अपना स्वभाव मत बदलो बल्कि अपने आपको भीतर से बदलो। अगर तुम अपने आपको प्रेम पूर्ण पाओगे और अपने उद्देश्य को अच्छा पाओगे तो तुम्हे उससे खुशी मिलेगी।

यहां पर इस बात की तनिक भी जरूरी नहीं है की तुम बाहर से लोगो क्या दिखाते हो। जरूरत सिर्फ इस बात की है तुम भीतर से अपना क्या उद्देश्य रखते हो।

दोस्तो इस कहानी के माध्यम से में आप सभी को यह समझाना चाहता हु की हम इस तरह की गलती बार बार करते हैं, या तो हम किसी काम को स्ट्रीम लेवल पर करते हैं, या तो उसे हम बहुत कठोर बनाते हैं, या करते ही नही है।

अगर आपको भी इस तरह की कोई आदत है कि आप अपने किसी काम को बहुत ज्यादा कठोर बनाकर करते हैं, तो में आप सभी से यह निवेदन करता हूं की आप उसे पहले सरल बनाए और उसे इस योग्य बनाए की आप उसे कर सके। और जब आप उस योग्य हो जाए की उस कठिन काम को भी कर सके, तो उसे भी करिए।

Mahatma Buddha Story in Hindi – गौतम बुद्ध की प्रेरक कहानी

दोस्तो भगवान बुद्ध का पूरा जीवन हमारे लिए एक प्रेरणा का स्रोत हैं, में आज भगवान गौतम बुद्ध के जीवन एक छोटी सी घटना के बारे में आपके साथ शेयर करने वाला हू। जो की उनके शिष्य यानी उनके चचेरे भाई के बारे में हैं, जिनका नाम आनंद होता है। दोस्तो यह कहानी आपको बहुत कुछ सिखाएगी, इसीलिए इस कहानी को अंत तक ध्यान से पढ़िए।

Mahatma Buddha Story in Hindi
Gautam Buddha Story in Hindi – गौतम बुद्ध की प्रेरक कहानी

4. गौतम बुद्ध के शिष्य आनंद की कहानी

एक बार आनंद भिक्षाटन के लिए एक नगर में पहुंचते हैं। बहुत देर चलने के बाद उन्हें तेज प्यास लग जाती हैं, जिसके कारण वो एक कुएं के पास जाते हैं। जहा पर कुछ स्त्रियां पानी भर रही होती हैं।

वो उन स्त्रियों से कहते हैं की कृपया आप हमें पानी पिला दे, क्योंकि हमे बहुत तेज प्यास लगी हुई है। उनमें से एक स्त्री आनंद को पानी पिलाती है, और वो स्त्री आनंद के रूप को देखकर पूरी तरह से मन मोहित हो जाती है।

मन ही मन सोचती है की यदि मुझे विवाह करना है, तो इसी व्यक्ति से करना है। क्योंकि इतना सुंदर व्यक्ति मैने आज तक नही देखा था। आनंद एक राज कुमार थे, जिसके वजह उनकी सुंदरता स्वाभाविक थी।

वो स्त्री अपने मन में कही तरीके की योजना बनाती है की किस तरह से में इस व्यक्ति से विवाह कर सकू। आनंद वहा से जा ही रहा होता है वह स्त्री आनंद को अपने घर भोजन के लिए आमंत्रित करती हैं। आनन्द उस स्त्री का आमंत्रण स्वीकार लेते हैं और उसके घर भोजन के लिए चले जाते हैं।

Life Changing Gautam Buddha Stories In Hindi | गौतम बुद्ध की कहानियाँ

घर पहुंचकर वह स्त्री भोजन पकाती है और आनंद को भोजन परोसती है। आनंद भोजन करना शुरू करते हैं और जब आनंद भोजन कर रहे होते हैं, तो वह स्त्री आनंद को एकटक देख रही होती है। आनंद भोजन करने के बाद उस स्त्री के घर से चले जाते हैं।

आनंद के जाने के बाद वह स्त्री अपनी मां से कहती है, माँ आपको मेरे विवाह की चिंता लगी रहती है ना ? उस स्त्री की मां कहती है हां पुत्री ! वह स्त्री कहती है तो ठीक है। मैं विवाह के लिए तैयार हूं और मैंने अपना वर चुन लिया है। उस स्त्री की मां पूछती है, कौन है वो ?

वह स्त्री कहती है, वो ये भिक्षु हैं जो हमारे घर भोजन करने के लिए आए थे। उस स्त्री की मां कहती है, पागल हो गई है तू ! वह एक भिक्षु है और उसने संसार को त्याग दिया है। वह स्त्री कहती है तो क्या हुआ ? मैं उन्हें पुनः संसारी बना दूंगी। उस स्त्री की मां कहती है, यह नहीं हो सकता।

वह स्त्री कहती है यदि तुम चाहो तो हो सकता है माँ , तुम जादू टोना जानती हो ना ? तो ऐसा कोई मंत्र फेरो दो की वह भिक्षु मेरा हो जाए और अगर तुम ऐसा नहीं कर सकतीं तो मेरा मरा हुआ मुंह देखने के लिए तैयार हो जाओ।

उस स्त्री की मां कहती है, ठीक है यदि तेरी यही ज़िद है तो तू ऐसा कर कि उसे एक बार भोजन पर फिर बुला, मैं वशीकरण के दाने बना दूंगी, तू उसके भोजन में मिलाकर उसे खिला देना। फिर वह भिक्षु हमेशा के लिए तेरा हो जाएगा। अगले दिन फिर वह स्त्री आनंद को भोजन के लिए आमंत्रित करती है।

आनंद उस स्त्री की बात मान लेता है और उसके घर जाकर भोजन ग्रहण करने लगता है। उस स्त्री ने पहले से ही भोजन में वशीकरण के दाने मिला रखे होते हैं, जिसके कारण आनंद बेसुद हो जाता है। आनंद के बेसुद होते ही वह स्त्री आनंद के साथ गंधर्व विवाह की तैयारी में लग जाती है।

वहां बुद्ध के पास भिक्षाटन कर सभी भिक्षु लौट आते हैं , परंतु आनंद नहीं लौटता। आनंद के वापस ना आने के कारण बुद्ध अन्य भिक्षुओं से उसके बारे में पूछते हैं। सभी भिक्षुओं में से एक भिक्षु कहता है बुद्ध आज आनंद एक स्त्री के घर भोजन करने के लिए गया था।

बुद्ध कहते हैं परंतु बहुत समय हो गया है, अब तक उसे लौट आना चाहिए था। तुम जाओ और उसे देखकर आओ। वह भिक्षु उस स्त्री का घर जानता था, जहां आनंद भोजन के लिए गया था। वह भिक्षु सीधा उस स्त्री के घर पहुंचता है और देखता है कि वह स्त्री आनन्द के साथ गंधर्व विवाह की तैयारी कर रही है।

इतने में ही आनंद को भी होश आ जाता है और उस स्त्री और उसकी मां की कोशिश नाकाम हो जाती है। वह भिक्षु आनंद और उन दोनों मां बेटी को बुद्ध के पास ले जाता है और बुद्ध को पूरी घटना समझाता है। बुद्ध उस स्त्री से यह सब करने का कारण पूछते हैं।

वह स्त्री बुद्ध से कहती है, मैं आनंद से प्रेम करती हूं। बुद्ध उस स्त्री से पूछते हैं , आनंद में ऐसी क्या विशेषता है जिसने तुम्हें इतना मोहित कर दिया है ? वह स्त्री कहती है , मुझे आनंद का सब कुछ अच्छा लगता है उसकी आंखें उसकी नाक, उसके होंठ, उसकी चाल, उसकी वाणी और सब कुछ, मैं उसे हर रूप में प्रेम करती हूं।

बुद्ध कहते हैं, आनंद में रूप और गुण तो हैं जो किसी को भी आकर्षित कर सकते हैं, परंतु क्या तुमने उसका प्रेम से भरा हृदय देखा ? क्या तुम जानती हो कि आनंद सर्वाधिक प्रेम किसे करता है ? वह स्त्री कहती है, मुझसे तो नहीं करता। बुद्ध कहते हैं, यहीं तुम चूक गईं।

आनंद तुमसे भी प्रेम करता है परंतु उसके प्रेम की व्याख्या वह नहीं है, जो तुम समझती हो, आनंद स्वतंत्र है , मुक्त है। उसका प्रेम बहुत गहरा है और वह समस्त मानव जाति से प्रेम करता है और यह चेष्टा करता है कि समस्त मानव उस प्रेम के मार्ग पर चल सके। उसका प्रेम उसे जलाता या दुखाता नहीं है, जिस प्रकार तुम्हारा प्रेम तुम्हें जला रहा है।

यदि तुम आनंद से सच्चा प्रेम करती हो तो तुम समझोगी और उसके प्रेम में कभी बाधक नहीं बनोगी। अपितु उसके प्रेम को ऊंचाइयों तक ले जाने की चेष्टा करोगी। बुद्ध की बात सुन वह स्त्री रोने लगती है और बुद्ध से कहती है , मेरा प्रेम स्वार्थी था और आनंद को अपने आप से बांधना चाहती थी।

क्या मैं भी भिक्षु आनंद की तरह प्रेम कर सकती हूं और क्या आप मुझे सिखाएंगे ऐसा प्रेम जो निस्वार्थ हो। जो संपूर्ण मानव जाति के लिए हो। बुद्ध कहते हैं अवश्य सिखाऊंगा! दोस्तो आपको इस कहानी से क्या सीखने को मिला यह हमे नीचे कमेंट बॉक्स में कॉमेंट करेंगे जरूर बताएं।

Gautam Buddha Short Story in Hindi | गौतम बुद्ध की लघु कथा

दोस्तों गौतन बुद्ध के जीवन की यह 5 वी कहानी आपको जन्म और मृतु के बारे में बहुत कुछ सिखाएगी, इसीलिए निचे दी गई एक माँ और उसके मृतक बच्चे की कहानी को एक बार अवश्य पढ़िए.

Gautam Buddha Short Story in Hindi
Gautam Buddha Short Story in Hindi

5. एक माँ और उसके मृतक बच्चे की कहानी

दोस्तो एक बार गौतम बुद्ध के पास एक स्त्री अपने बच्चे को लेकर रोती हुई आती है और उनसे कहती है , प्रभु मैं आपके पास बड़ी आशा लेकर आई हूं। मैं जानती हूं कि आपके लिए सब कुछ संभव है और आप परमज्ञानी हैं। कृपया मेरे मृत बच्चे को जीवित कर दीजिए, मैं आपका यह उपकार कभी नहीं भूलुंगी।

उस स्त्री को बुद्ध के पास उन लोगों ने भेजा था जो बुद्ध से ईर्ष्या करते थे। उनका उद्देश्य था कि बुद्ध सभी की नजरों में गिर जाए। उस स्त्री के पुत्र की मृत्यु वास्तव में हुई थी , परंतु वह नहीं जानती थी कि उसका और उसके मृत पुत्र का इस्तेमाल बुद्ध को नीचा दिखाने के लिए किया जा रहा था।

उसे तो बस यह बताया गया था कि बुद्ध सच में उसके पुत्र को जीवित कर सकते हैं। वह स्त्री कहती है कहिए ना प्रभु आप मेरे पुत्र को जीवित कर देंगे ना? वहां उपस्थित सभी लोग बुद्ध के उत्तर का इंतजार कर रहे होते हैं। बुद्ध कहते हैं, हां मैं तुम्हारे पुत्र को जीवित कर सकता हूं।

बुद्ध की बात सुन वहां उपस्थित सभी लोग बहुत चौंकते हैं और वह स्त्री बहुत प्रसन्न होती है। बुद्ध कहते हैं परंतु तुम्हें एक कार्य करना होगा। वह स्त्री पूछती है क्या करना होगा मुझे प्रभु ? बुद्ध कहते हैं तुम्हें एक मुट्ठी सरसों के दाने लाने होंगे। वह स्त्री कहती है, मैं अभी लेकर आती हूं प्रभु।

Life Changing Gautam Buddha Stories In Hindi | गौतम बुद्ध की कहानियाँ

बुद्ध कहते हैं , परंतु ध्यान रहे दाने ऐसे घर से लाने हैं जहां कभी किसी की मृत्यु ना हुई हो। वह स्त्री उसी क्षण सरसों के दाने लेने के लिए अपने गांव में चली जाती है। वह अपने गांव के हर घर में जाकर पूछती है। उसे सरसों के दाने तो हर घर में मिलते हैं परंतु उसे कोई ऐसा घर नहीं मिलता, जिसमें आज तक कभी किसी की मृत्यु ना हुई हो।

वह स्त्री समझ जाती है कि मृत्यु जीवन का एक ऐसा सत्य है जिसे कोई नहीं बदल सकता। वह स्त्री बुद्ध के पास जाती है और कहती है, मैं इस बात को कहीं ना कहीं जानती तो थी परंतु स्वीकारना नहीं चाहती थी। आपने बिना कुछ कहे ही मुझे इस सत्य से अवगत करा दिया।

बुद्ध कहते हैं जो जन्मा है , उसकी मृत्यु निश्चित है, और यही प्रकृति का नियम है। चाहे कोई सुंदर हो या करूप हो या बूढ़ा हो या जवान, मृत्यु सभी को आनी है। बुद्ध कहते हैं ये संसार जिसे हम यथार्थ मानते हैं , यह दुख और पीड़ा का क्षणभंगुर खेल है। जो जन्मा है उसकी मृत्यु निश्चित है।

दोस्तो यह कहानी आपको कैसी लगी नीचे कमेंट बॉक्स में कॉमेंट करेंगे जरूर बताएं और साथी इस कहानी को अपने दोस्तो के साथ अवश्य शेयर कीजिए, ताकि गौतम बुद्ध की कहानियाँ और लोगो को भी पढ़ने को मिल सके।

Gautam Buddha Motivational Story in Hindi

दोस्तो गौतम बुद्ध के जीवन की यह छोटी सी कहानी आपको बताएगी की क्रोध क्या है और आप इसे कैसे खत्म कर सकते हैं? तो चलिए जानते हैं गौतम बुद्ध की शिक्षाप्रद कहानी को।

Gautam Buddha Inspiration Story in Hindi
Gautam Buddha Inspiration Story in Hindi

6. अपने गुस्से को काबू में कैसे करें जानिए गौतम बुद्ध की शिक्षाप्रद कहानी से

एक बार गौतम बुद्ध अपने शिष्यों के साथ बैठकर उन्हे कुछ समझा रहे थे, बुद्ध के सभी शिष्य बुद्ध को बड़े ध्यान से सुन रहे थे। बुद्ध और उनके सभी भिक्षु यह देखते हैं की उनकी तरफ एक आदमी बड़ी तेजी से आ रहा है, और वह आदमी बहुत क्रोध में है और वह कुछ बड़बड़ाता आ रहा है।

उस व्यक्ति को देख गौतम बुद्ध के कुछ शिष्य समझ जाते हैं की यह व्यक्ति कुछ गलत करने के उद्देश्य से गौतम बुद्ध के पास आ रहा है। इसीलिए गौतम बुद्ध के २ शिष्य दौड़कर उस आदमी के पास चले जाते हैं और उसे रोक लेते हैं। और उस व्यक्ति से पूछते हैं कि तुम कौन हो और तुम्हे किससे मिलना है?

वह व्यक्ति गौतम बुद्ध के शिष्यों से कहता है की मेरे मार्ग से हट जाओ, आज में इस बुद्ध को सबक सिखाकर ही रहूंगा। उस व्यक्ति की बात सुन गौतम बुद्ध के शिष्य उस व्यक्ति को शांत करने की कोशिश करते हैं, पर वह व्यक्ति शांत नहीं होता है।

बुद्ध उस व्यक्ति को देखते हैं और मुस्कुराते हैं और अपने शिष्यों से कहते हैं की मेरे प्रिय भिक्षुओं उसे आने दो मेरे पास, वह मुझसे कुछ कहना चाहता है। बुद्ध की आज्ञा का पालन करते हुए बुद्ध के भिक्षु उस व्यक्ति के मार्ग से हटते हैं। और वह व्यक्ति बुद्ध के पास आकर खड़ा हो जाता है।

जैसे ही व्यक्ति बुद्ध के पास पहुंचता है, वह बुद्ध को गालियां देना शुरू कर देता है। बुद्ध उस व्यक्ति की गलियां सुनते रहते हैं परन्तु उसे कोई भी उत्तर नही देते। बहुत देर तक बुद्ध को गालियां देने के बाद वह व्यक्ति अपने मन में सोचता है की मेरी गालियों का तो बुद्ध पर कोई भी असर नहीं हो रहा है।

इसीलिए उस व्यक्ति का क्रोध और भी ज्यादा बढ़ जाता है, और वह व्यक्ति बुद्ध के उपर थूक देता है। उसके बाद बुद्ध एक कपड़ा उठा देते हैं और उस थूक को पोंछ देते हैं। यह देख कर गौतम बुद्ध के सभी भिक्षुक क्रोध से भर जाते हैं। पर बिना बुद्ध के आज्ञा के कोई भी भिक्षुक अपना क्रोध प्रकट नही करता।

वह व्यक्ति दुबारा से बुद्ध के ऊपर थूकता है और बुद्ध दुबारा से एक कपड़ा उठाते हैं और उस थूक को साफ कर लेते हैं। और मुस्कुराकर इस व्यक्ति से कहते हैं की मित्र तुम कुछ और कहना चाहते हो? जैसे ही वह व्यक्ति बुद्ध का यह प्रश्न सुनता है, वह व्यक्ति भीतर तक हिल जाता है।

और वह व्यक्ति बुद्ध को कोई भी उत्तर नही दे पाता है और तुरंत वहा से चला जाता है। बुद्ध के सभी भिक्षुओं के मन में यह प्रश्न होता है की उस व्यक्ति ने बुद्ध का इतना अपमान किया, लेकिन बुद्ध ने उस व्यक्ति को यह क्यों कहा की क्या वह और कुछ कहना चाहता है।

सभी भिक्षुओं में से एक भिक्षुक बुद्ध से कहता है की आपने उस व्यक्ति से यह क्यों कहा की क्या वह कुछ और कहना चाहता है। जब की यह तो स्पष्ट था की वो व्यक्ति यहां कुछ कहने नही आया था, बल्कि वह तो आपका अपमान करने आया था। क्या आप उसके द्वारा किए गए अपमान को नहीं देख पाए।

बुद्ध मुस्कुराते हैं और अपने सभी भिक्षुओं से कहते है की मेरे प्रिय भिक्षुओं अपमान और सम्मान उसे नजर आता है, जो इन दोनो से चिपके हुए होते हैं। में इन दोनों से भी ऊपर उठ चुका हूं, इसीलिए ना तो मुझे परेशान कर सकता है और नाही सम्मान मुझे प्रसन्न कर सकता है।

वह व्यक्ति बुद्ध का अपमान करके अपने घर तो चला जाता है लेकिन पर पूरी रात सो नहीं पाता है। उसके मन में सिर्फ यही प्रश्न घूमता रहता है की मैने बुद्ध का अपमान किया उन्हे गलिया भी दी, फिर भी उन्होंने मुझ से यह क्यो पूछा कि क्या में कुछ और कहना चाहता हूं?

जब की में वहा कुछ कहने नही बल्कि उनका अपमान करने गया हुआ था। अगले दिन वह व्यक्ति सुबह सुबह जल्दी उठकर बुद्ध के पास चला जाता है और उनकी चरणो में लैट जाता है। बुद्ध के सभी शिष्य उसको देखकर आश्चर्य चकित होते हैं, की जो व्यक्ति कल बुद्ध का अपमान करके गया हुआ था, आज वह रो रहा है, और बुद्ध के चरणों में पड़ा हुआ है।

बुद्ध उस व्यक्ति को उठाते हैं और उस व्यक्ति से कहते हैं की मित्र क्या तुम और कहना चाहते हो? इतने में ही बुद्ध का एक भिक्षुक बुद्ध को टोकता है और उनसे पूछता है की बुद्ध जब कल यह व्यक्ति आपका अपमान कर रहा था, तब भी आपने यही बात कही थी की क्या तुम्हे कुछ और कहना है?

और आज यह व्यक्ति आपके चरणों में पड़ा रो रहा है? आप तब भी यही बात कह रहे हैं? इसका क्या अर्थ है बुद्ध कृपा कर समझाइए हमे। बुद्ध कहते हैं की बात को कहने के लिए शब्द असमर्थ हैं, कल भी यह व्यक्ति मुझसे कुछ कहना चाहता था, पर शब्द असमर्थ थे।

इसीलिए क्रोध में आकर उसने मुझ पर थूककर इसने वो बात मुझसे कहने का प्रयास किया। और आज भी शब्द असमर्थ, इसके आंसू कह रहे हैं, जो यह कहना चाहता है। उसके बाद वह व्यक्ति बुद्ध से कहता है की बुद्ध मुझे क्षमा कीजिए मैने आपका अपमान किया है।

Life Changing Gautam Buddha Stories In Hindi | गौतम बुद्ध की कहानियाँ

बुद्ध कहते हैं की तुम्हे क्षमा मांगने की कोई भी आवश्यकता नहीं है, क्योंकि क्रोध भी तुमने किया और उसकी पीड़ा भी तुमने ही पाई है। इसमें तुमने दूसरे किसी को क्या नुकसान पहुंचाया है। बुद्ध अपने सभी भिक्षुओं और उस व्यक्ति से कहते हैं की 👇

“क्रोध जलते हुए अंगारे की तरह है, जिसे हम अपने हाथ में पकड़ते हैं किसी और पर फैंकने के लिए। और सर्व प्रथम उस अंगारे से हमारा ही हाथ जलता है।”

दोस्तो यह गौतम बुद्ध के जीवन की कहानी को पढ़कर आपको क्या सीखने को मिला? यह नीचे कमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके जरूर बताएं। साथ ही अपने दोस्तो के साथ इस कहानी को शेयर करना न भूलें।

Gautam Buddha Story in Hindi

दोस्तो आज की यह ७ वी कहानी आपको सिखाएगी की अपने डर से मुक्ति कैसे पाएं? दोस्तो अगर आप भी यह जानना चाहते की अपने डर से मुक्ति कैसे पाएं? तो इस कहानी को अंत तक जरूर पढ़िए।

गौतम बुद्ध की कहानी इन हिंदी
गौतम बुद्ध की कहानी इन हिंदी

7. डर से मुक्ति कैसे पाएं (गौतम बुद्ध की शिक्षा)

दो साधु जंगल से गुजर रहे थे, एक गुरु था और दूसरा उनका शिष्य था। एक बुजुर्ग था और दूसरा युवा था। बूढ़े साधु ने अपने कंधे पर एक झोली टांग रखी थी। कोई वजनी चीज लटकी हुई मालूम पड़ती थी। बीहड़ रास्ता था और दूर दूर तक कोई भी दिखाई नही पड़ता था।

उस बूढ़े साधु ने अपने शिष्य से पूछा की बेटे जंगल में कोई डर तो नही है। अपने गुरु की बात सुन उस युवा संन्यासी को बहुत हैरानी हुई। क्योंकि आज तक उसके गुरु ने इस तरह का प्रश्न कभी नही पूछा था। वह युवा संन्यासी अपने गुरु से कहता है की गुरु देव डर कैसा? यह जीवन तो नश्वर ही है, तो डर कैसा?

गुरु ने कहा ठीक है, हम आगे बढ़ते हैं। दोनो गुरु शिष्य अपने मार्ग में आगे बढ़ते हैं। रात और गहरी होनी लगती है और सन्नाटा और ज्यादा छाने लगता है। गुरु दुबारा से अपने शिष्य से पूछता है, बेटे कोई डर तो नही है ना ?

शिष्य चौकता है और कहता है की डर कैसा और किस बात का डर? हम संन्यासी है, भला हमे कैसा डर? शिष्य की बात सुन गुरु ने कहा कि ठीक है हम आगे बढ़ते हैं! थोड़ा आगे चलने पर उन्हें एक कुआ मिलता है। शिष्य कुएं से पानी निकलता है और अपने गुरु को दे देता है।

गुरु अपने शिष्य को अपने झोले को दे देता है और पानी पीने लगता है। शिष्य को शक तो पहले से ही था, की झोले में कुछ तो जरूर होना चाहिए, क्योंकि अकारण भय पैदा होना असंभव है। जैसे ही शिष्य अपने गुरु की झोले में हाथ डालता है, वह देखता है की उसमे एक सोने की इट है।

इट को देखते ही शिष्य समझ जाता है की भय का कारण यही है। वह इस ईट को झोले से निकलता है और उसे फैक देता है। और उसकी जगह उसकी तरह का पत्थर रख देता है। गुरु ने पानी पिया और अपने झोले को वापस लिया और अपने कंधे पर टांग लिया।

Life Changing Gautam Buddha Stories In Hindi | गौतम बुद्ध की कहानियाँ

वजन का अहसास हुआ इसीलिए गुरु को लगा की इट है, और उसके बाद गुरु और शिष्य दोनो ही मार्ग में आगे बढ़ गए। कुछ दूर आगे चलने के बाद गुरु को सैनिकों के घोड़ों के दौड़ने की आवाज आई। ऐसा लग रहा था मानो सैनिक उनकी तरफ आ रहे हैं।

गुरु घबरा कर अपने शिष्य से पूछता है की यहां कोई भय तो नही है? कोई डर तो नही है ना? आप बिलकुल निश्चित हो जाइए , क्योंकि डर को मैं पीछे ही फेक आया हु। गुरु घबराया और अपने झोले में देख लिया तो वहा पर सोने कि इट नही थीं बल्कि उसकी जगह एक उसकी तरह दिखने वाला एक पत्थर रखा हुआ था।

लेकिन इतने टाइम से यह पत्थर भी भय का कारण बना हुआ था। वह बूढ़ा गुरु हंसकर कहने लगा की ये तो हद हो गई, इतनी देर से में इस पत्थर को ढो रहा था। और यह मुझे लगातार भय भी दे रहा था। गुरु अपने शिष्य से कहता है की तुमने ठीक कहा कि तुमने भय को पीछे ही छोड़ दिया।

पर पागल तुमने यह मुझे पहले ही क्यों नहीं बता दिया। में इतनी देर तक इस पत्थर के कारण भय भीत रहा। ये इतनी देर का भय बिलकुल व्यर्थ था। शिष्य अपने गुरु से कहता है कि यदि ठीक से समझे, तो जो पहले भी भय था वह भी व्यर्थ था। वजन यह भी है और वजन यह भी है।

‘यह पत्थर दिखाई पड़ता है और वह सोना दिखाई पड़ता था’ यदि आप भी इस पत्थर को ना देखते तो आपकी पूरी रात डर में बितती। उसके बाद वह बूढ़ा गुरु अपने झोले से उस पत्थर को निकालकर फैक देता है और पूरी रात निश्चितता के साथ सोता है।

Moral of Gautam Buddha Story in Hindi

“भय सिर्फ हमारी मान्यताएं हैं, यदि आप वास्तविकता को नहीं देखोगे तो सोना भी भय देगा और पत्थर भी भय देगा। अगर एक बार वास्तविकता को देख लिया तो कैसा भय और कहा का भय! अपने जीवन से भय को सम्माप्त करने का केवल एक ही तरीका है और वो है वास्तविकता को देख लेना।”

दोस्तो अगर आपको यह कहानी पसंद आई होगी और आपके लिए उपयोगी साबित हुई होंगी तो अपने दोस्तो के साथ अवश्य शेयर कीजिए।

Gautam Buddha Inspiration Story in Hindi

में हर समय वर्तमान में कैसे जी सकता हूं? दोस्तो अगर आपके मन में भी यह प्रश्न है, तो यह छोटी सी कहानी आपके लिए ही है। यह छोटी सी कहानी आपको सिखाएगी हर समय वर्तमान में कैसे जिएं। तो बिना समय गंवाए चलिए शुरू करते हैं।

Gautam Buddha Life Story in Hindi
Life Changing Gautam Buddha Stories in Hindi

8. वर्तमान में कैसे जिएं – Gautam Buddha Stories in Hindi

एक व्यक्ति एक महात्मा के पास जाता है और उनसे कहता है की महात्मा जी क्या में आपसे एक प्रश्न पूछ सकता हूं? वो महात्मा उस व्यक्ति को प्रश्न पूछने की आज्ञा दे देते हैं। वह व्यक्ति पूछता है की ऐसा में क्या करू? जिससे में हर समय वर्तमान में जी सकू? वे महात्मा उस व्यक्ति का प्रश्न सुन चुप रहते हैं।

वह व्यक्ति सोचता है की लगता है की महात्मा मेरे इस प्रश्न को ठीक से सुना नही होंगा? और वो व्यक्ति दुबारा से अपने प्रश्न को दोहराता है। पर दूसरी बार भी वे महात्मा उस व्यक्ति के प्रश्न का उत्तर नही देते। वो व्यक्ति तीसरी बार महात्मा से पूछता है, महात्मा जी उस व्यक्ति की और देखते है और उससे एक प्रश्न करते हैं की क्या तुम जमीन पर खड़े हो सकते हो?

वो व्यक्ति महात्मा से कहता है की में जमीन पर ही खड़ा हु, ना तो मैं जमीन के नीचे हु और ना ही में जमीन के उपर हवा में रह सकता हूं। क्या आप मुझे देख नही पा रहे हैं? वे महात्मा उस व्यक्ति से कहते हैं की मैं तो देख पा रहा हूं, लेकिन तुम नही देख पा रहे हो!

वह व्यक्ति कहता है की महात्मा जी में कुछ समझा नहीं। वे महात्मा उस व्यक्ति से कहते हैं की जब तुम ये देख सकते हो कि ना तुम जमीन के नीचे रह सकते हो और ना ही जमीन के उपर हवा में रह सकते हो, तो क्या तुम यह नही देख सकते की तुम चाहकर भी भूतकाल में रह सकते हो और ना ही भविष्यकाल में रह सकते हो।

जब तुम पहले से ही वर्तमान में हो और इससे ज्यादा वर्तमान में क्या हो सकते हो। तुम्हे यह समझना चाहिए की जीवन का अर्थ वर्तमान है, भूत और भविष्य नही, तुम चाहकर भीं भूत और भविष्य में नही रह सकते। क्योंकि तुम्हारे पास इसका विकल्प ही नही है।

तुम उन भूतकाल के विचारो को सोचकर परेशान हो जिनका खुद कोई जीवित अस्तित्व ही नहीं है। या इन विचारों को सोचकर परेशान हो, जिनके बारे में तुम्हे पता ही नही है, की वो भविष्य में घटित होंगे भी या नहीं? वह व्यक्ति उस महात्मा से पूछता है की में इन विचारों से कैसे छुटकारा पाऊ?

महात्मा कहते हैं की फिर एक और गलत प्रश्न! यह दिमाग जिसके पास इतनी क्षमता है की तीनो स्थितियों में सोच सकता है, यह हमे प्रकृति के द्वारा दिया गया एक उपहार है। क्या तुम इसे खत्म करना चाहते हो? क्या उपहार को खत्म किया जाता है?

Life Changing Gautam Buddha Stories In Hindi | गौतम बुद्ध की कहानियाँ

अगर तुम विचारो को मारना चाहते हो मतलब तुम अपने दिमाग को मारना चाहते हो। यह दिमाग जो इतना शक्तिशाली है, उसे क्या तुम नष्ट करना चाहते हो? वह व्यक्ति कहता है की तो अब आप ही बताए की में क्या करू? में बहुत परेशान हु? मुझे कोई मार्ग नजर नही आ रहा है?

वे महात्मा उस व्यक्ति से कहते हैं की अब तुमने सही प्रश्न पूछा है. अब कुछ हल निकाला जा सकता है। यदि तुम जीवन की सभी समस्याओं से छुटकारा पाना चाहते हो? शारीरिक और मानसिक तप करना होंगा। वो व्यक्ति उन महात्मा से पूछता है की शारीरिक और मानसिक तप क्या है?

शारीरिक और मानसिक तप क्या है?

शारीरिक तप का अर्थ है उचित आहार, उचित नींद और उचित व्यायाम और मानसिक तप का अर्थ है, ध्यान और खुद के साथ समय बिताना और बाहर के कचरे को भीतर आने से रोकना। वह व्यक्ति उन संत से पूछता है की कचरे से आपका क्या मतलब है?

वो महात्मा कहते हैं की तुम भली भांति जानते हो की कचरा क्या है? कचरा वे बाते है जो तुम्हारे विकास को रोकती हैं? और तुम्हारे इंद्रियो के द्वारा तुम्हारे भीतर प्रवेश करती है। यदि तुम सभी समस्याओं का अंत चाहते हो, तो तुम्हे शारीरिक और मानसिक तप करना होगा।

वो व्यक्ति उन महात्माओं से पूछता है की क्या शारीरिक और मानसिक रूप करना क्या आसान है? वे संत उस व्यक्ति से कहते हैं की आसान नहीं है पर मुश्किल भी नहीं है। दोस्तो अगर में आपको यह कहानी पसंद आई होगी और आपके लिए उपयोगी साबित हुई होंगी तो अपने सच्चे दोस्त के साथ अवश्य शेयर कीजिए।

Gautam Buddha Life Story in Hindi – गौतम बुद्ध की प्रेरक कहानी

दोस्तो भगवान बुद्ध यानी की सिद्धार्थ बचपन से ही बहुत प्रेम पूर्ण स्वभाव के व्यक्ति थे, वो कभी भी किसी जीव को भूल से भी कष्ट पहुंचाना नहीं चाहते थे। जब उन्होंने सत्य को प्राप्त नहीं किया हुआ था, तभी भी वो इतने प्रेमपूर्ण थे की सभी जीव उनसे प्रेम करते थे और वो भी सभी जीवों को समान मानकर उनसे बहुत प्रेम करते थे।

दोस्तो जब गौतम बुद्ध के पिता को यह खबर मिलती है की उनके पुत्र पिता तो वो खुशी के मारे झूम उठते हैं, और पूरे राज्य में मिठाई या बटवाते है, और ढोल नगाड़े बजवाते है। और ब्राम्हनो की एक बैठक कराते हैं। जिस में वो आदेश देते हैं की उनके पोते के बारे में कुछ बताए।

ब्राम्हण उनके पोते की कुंडली बनवाते हैं और उसे पढ़ते हैं, और उनके पसीने छूट जाते हैं। क्योंकि उसमे कुछ ऐसा लिखा हुआ होता है की जिसे जानकर शायद राजा शुद्धोधन उनको मौत का दंड भी दे सकते थे। इसीलिए वो उनसे कुछ नही कहते और उनसे कहते है की आपका पौता महान शक्तिशाली राजा बनेगे।

तो वो बहुत खुश हो जाते और उनको इनाम भी दे देते हैं। परंतु यह बात छुपाने योग्य नहीं थी, इसीलिए एक ब्राम्हन इस बात को उनकी मां रानी प्रजापति को बताते हैं। यदि सिद्धार्थ के बच्चे को जन्म मिलता है, तो सिद्धार्थ जीवित नहीं बचेंगे। और सिद्धार्थ के बच्चे के जीवन में पिता का योग नही है।

Life Changing Gautam Buddha Stories In Hindi | गौतम बुद्ध की कहानियाँ

यह सुनकर उनके पैर के नीचे की जमीन ही खिसकती है, और वो कहती हैं की क्या इसका कोई उपाय है? तो ब्राम्हण कहते हैं की इसका एक उपाय है। अगर सिद्धार्थ को अपने प्राण बचाने हैं, तो उन्हें अपने हाथो से एक बली देनी होगी.

ये बात सभी को ही पहले से ही पता होती है की सिद्धार्थ एक ऐसे व्यक्ति है, जो किसी की भी पीड़ा को नही देख सकते थे। तो क्या अपने जीवन के लिए किसी और कि बली देंगे? दोस्तो गौतम बुद्ध के जीवन की यह सच्ची कहानी आपके भीतर करूंना और प्रेम से भर देंगी।

गौतम बुद्ध की कहानियाँ
Life Changing Gautam Buddha Stories in Hindi

गौतम बुद्ध और बली प्रथा की कहानी

उसके बाद सिद्धार्थ को बलि पूजा में यह कहकर बुलाया जाता है कि यह पूजा आपके परिवार की सुख शांति के लिए है। जब सिद्धार्थ पूजा स्थल पर पहुंचते हैं तो वे देखते हैं कि पूजा स्थल पर एक जानवर को बांधा हुआ है जिस की बलि देने की तैयारी की जा रही होती है।

सिद्धार्थ उस जानवर को देख कूलगुरु से पूछते हैं , गुरुदेव भला ग्रह शांति की पूजा में इस पशु का क्या काम ? आपने इसे यहां क्यों बांध रखा है ? कुलगुरु कहते हैं रुकिए युवराज आपको आपके सभी प्रश्नों के उत्तर मिल जाएंगे। पहले आप पूजा में सम्मिलित तो हो जाइए।

सिद्धार्थ पूजा में सम्मिलित हो जाते हैं। कुल गुरु सिद्धार्थ से मंत्र उच्चारण करने के लिए कहते हैं । सिद्धार्थ मंत्र उच्चारण करने लगते हैं। कुलगुरु सिद्धार्थ से हवन में आहुति देने के लिए कहते हैं। में सिद्धार्थ हवन में आहुति देने लगते हैं। लेकिन जब कुलगुरु फरसे ( काटने का हथियार ) को तिलक लगाने के लिए कहते हैं, तब सिद्धार्थ पूछते हैं गुरुदेव पूजास्थल पर इस फरसे का क्या काम ?

कुलगुरु कहते हैं जो रक्षा करता है , उसकी भी तो पूजा करनी चाहिए। सिद्धार्थ उस फरसे को तिलक लगा देते हैं। फिर कुलगुरु कहते हैं अब इस हवन कुंड के पांच चक्कर लगाइए सिद्धार्थ। सिद्धार्थ उस हवन कुंड के पांच चक्कर लगा लेते हैं।

चक्कर लगाने के बाद कुल गुरु सिद्धार्थ से कहते हैं , अब सिद्धार्थ आपको कोई प्रश्न नहीं पूछना केवल अपने परिवार की सुख – शांति अपने ध्यान में रखनी है और मेरे साथ चल कर एक बार में इस बलि के सर को इसके धड़ से अलग कर देना है।

कुलगुरु के इन शब्दों को सुनते ही सिद्धार्थ के हाथ से वह फरसा नीचे गिर जाता है और उनकी आंखों से आंसू बहने लगते हैं। सिद्धार्थ रोते हुए कुलगुरु से कहते हैं ये आप मुझसे क्या हैं कराने जा रहे थे कुलगुरु ? कुलगुरु कहते हैं , सिद्धार्थ यह बलि प्रथा है इस बलि को देने बाद आपके सारे संकट समाप्त हो जाएंगे।

सिद्धार्थ पूछते हैं अर्थात अपने प्राण बचाने के लिए किसी मूक के प्राण हर लूँ। यह कैसी मनुष्यता है। कुलगुरु कहते हैं युवराज यह बलि आवश्यक है और यह शास्त्रों में लिखा है। सिद्धार्थ कहते हैं पढ़ा है मैंने, कथित ईश्वर को खुश करने के लिए अपनी प्रिय वस्तु अर्पण करें।

Life Changing Gautam Buddha Stories In Hindi | गौतम बुद्ध की कहानियाँ

कुल गुरु कहते हैं, युवराज यह बलि देनी ही होगी। यदि आप नहीं देंगे तो किसी और से दिलवाई जाएगी परंतु यह बलि देनी आवश्यक है । सिद्धार्थ कहते हैं ना तो मैं खुद बली दूंगा और ना किसी और को देने दूंगा। इतना कहकर सिद्धार्थ उस पशु को खोलकर अपने साथ ले जाते हैं।

दोस्तों जिस व्यक्ति के भीतर करुणा होती है, उसे केवल अपने ही शरीर का दर्द महसूस नहीं होता बल्कि अन्य जीवों की भी पीड़ा महसूस होती है।

Gautam Buddha ki Kahani in Hindi – गौतम बुद्ध की शिक्षाप्रद कहानी

दोस्तो मनुष्य का मन भी ना बड़ा चालाक होता है, वह उसे उसके ही जाल में फसा देता है। हर व्यक्ति के अंदर बहुत सारे अंधविश्वास होते हैं, और ऐसा नहीं है की हर अंधविश्वास गलत होता है, जैसे की आप नशा करते हैं और नशा करके अपने आस पास गंदगी का माहोल बनाए रखते हैं,

इसका असर आपके जीवन पर पड़ता है। चाहे आप माने या ना माने। एक छोटी सी कहानी से में आपको यह समझाने का प्रयास करूंगा की हमारा मन हमे कैसे हमारे ही अंधविश्वासो में बांधकर रख देता है।

How to Control Your Mind In Hindi
Life Changing Gautam Buddha Stories in Hindi

10. अपने मन को समझने का सूत्र – How to Control Your Mind In Hindi

एक बार बुद्ध एक नदी के किनारे से गुजर रहे थे। सर्दियों का समय था। सभी लोग मार्ग पर मोटे मोटे वस्त्र ओढ़कर चल रहे थे। तभी बुद्ध की नजर एक व्यक्ति पर पड़ती है, जो नदी के ठंडे पानी में डुबकी लगा रहा होता है। बुद्ध उस व्यक्ति को देखकर थोड़ा आश्चर्यचकित होते हैं, क्योंकि वह काँप भी रहा था और नहा भी रहा था।

बुद्ध उस व्यक्ति से ठंड में नदी में डुबकी लगाने का कारण पूछते हैं। वह व्यक्ति बुद्ध को बताता है कि वह सुबह सुबह नदी में नहा धोकर पूजा के लिए जा रहा था। तभी उसका पैर एक मेंढक पर पड़ गया और वह अपवित्र हो गया और इसलिए वह फिर से पवित्र होने के लिए नदी में डुबकी लगा रहा है।

बुद्ध उस व्यक्ति की बात सुन मुस्कुराते हैं और उससे पूछते हैं, क्या तुम मुझे बता सकते हो कि वह मेंढक कहां रहता है ? वह व्यक्ति कहता है पानी में महानुभाव। बुद्ध कहते हैं जब तुम इस पानी में डुबकी लगाने से पवित्र हो सकते हो तो वह मेंढक तो हमेशा से ही इस पानी में ही रहता है तो वह तो पहले से ही पवित्र होगा।

उसके छूने से तुम अपवित्र से कैसे हो सकते हैं ? उस व्यक्ति को बुद्ध की बात जचती है और वह पानी के बाहर आ जाता है। बुद्ध उस काँपते हुए व्यक्ति को एक वस्त्र उठाते हैं और कहते हैं

“अंधविश्वास किसी बात का मत करो जब तक कि वह तुम्हारे खुद का अनुभव ना बन जाए।”

फिर बुद्ध कहते है की मनुष्य अपने मन के कारण ही दुख पाता है और जो चीजे अपवित्र है, उन्हे तो वह अपवित्र नही मानता। लेकिन जो चीजे पवित्र है उन्हे वो अपवित्र मानता है। जैसे की लोग नशा करते हैं, व्यभिचार करते हैं, और एक दूसरे से घृणा का भाव रखते हैं, लेकिन इन्हे वो अपवित्र नही मानते।

वे मानते हैं की कोई जीव जो उनके जीवन में कोई भी प्रभाव नही डालता है, वह अपवित्र है। मनुष्य अंधविश्वासों में जीता है, जिसके कारण वो पूरे जीवन वो पूरा जीवन जी ही नही पाता। वह व्यक्ति बुद्ध से पूछता है की सबसे बड़ा अंधविश्वास क्या है?

बुद्ध कहते है की मनुष्य का सबसे बड़ा अंधविश्वास यह है की उसे लगता है की वह अपने मन के द्वारा ही अपने मन से मुक्त हो जायेगा। यानी अपने मन के द्वारा ही अपने जीवन के सभी दुखो से मुक्त हो जायेगा। तुम अपने चारो तरफ देखो तुम पाओगे की हर व्यक्ति अपने ही मन के जाल में उलझा हुआ है।

कोई डर हुआ है तो कोई उमिदो में जी रहा है और किसी को यह लगता है की कल सब कुछ ठीक हो जायेगा। लेकिन वास्तविकता यह है की जब तक मनुष्य अपने मन को नहीं समझेगा तब तक कुछ भी ठीक नहीं हो सकता है और यही शास्वत सत्य है।

Life Changing Gautam Buddha Stories In Hindi | गौतम बुद्ध की कहानियाँ

वह व्यक्ति बुद्ध से पूछता है की मन को कैसे समझा जाता है? बुद्ध कहते हैं की जागरूकता के द्वारा!! पूरे दिन में जब भी याद आए जागरूक होकर देखो की तुम्हारा मन तुमसे क्या करवा रहा है? तुम्हारा मन बार बार तुम्हे भुलाने के प्रयास करेगा, लेकिन तुम्हे बार बार प्रयास करते रहना है।

तुम्हे दिन में यह बार बार देखना है की क्या तुम उसी रास्ते पर जा रहे हो, जो तुम्हे वहा तक पहुंचाएगा, जहा तुम जाना चाहते हो। और यही सूत्र है मन से मुक्त होने का…

11. खुशी का मंत्र – Best Inspirational Story in Hindi

बहुत समय पहले की बात है, गंगा नदी के किनारे एक पीपल का पेड़ था। पहाड़ों से उतरती गंगा अपने पूरे वेग से बह रही थी। अचानक पेड़ से दो पत्ते नदी में आकर गिर गए। एक पिता तिरछा गिरा और एक पत्ता सीधा गिरा।

जो पत्ता तिरछा गिरा था वो जिद पर अड गया की और कहने लगा की आज चाहे जो हो जाए में इस नदी को रोक कर ही रहूंगा। चाहे मेरे प्राण ही क्यों न चले जाए, में इसे आगे नहीं बढ़ने दूंगा। वह पत्ता जोर जोर से चिल्लाने लगा की रुक जा गंगा में तुझे आगे नहीं जाने दूंगा।

पर नदी तो बहती ही जा रही थी, नदी को तो पता ही नही था की कोई पत्ता उसे रोकने का प्रयास कर रहा है। इधर पत्ते की जान पर बन आई थी। वह लगातार संघर्ष कर रहा था। वो पत्ता नही जानता था की बिना लड़े भी वही जाना था, जहा थककर हार कर पहुंचेगा।

परंतु अब और तब के बीच का समय उसके लिए दुख और संताप का समय बन चुका था। वही दूसरा पत्ता जो सीधा गिरा था, वो नदी के प्रवाह के साथ बड़े मजे से बहता जा रहा था। और कह रहा था की चल गंगा आज में तुझे तेरी मंजिल तक पहुचाऊंगा। चाहे जो हो जाए में तेरे मार्ग में कोई भी अवरोध नही आने दूंगा।

नदी को इस पत्ते के बारे में भी कुछ पता नहीं था, वह तो अपने धुन में सागर की ओर बहती जा रही थी। लेकिन यह पत्ता खुश और आनंदित था। क्योंकि उसे तो लग रहा था की में ही नदी को अपने साथ बहाए ले जा रहा हूं।

तिरछे पत्ते की तरह सीधे पत्ते को भी यह नही पता था की चाहे वो नदी का साथ दे या नहीं दे, नदी तो वही पहुंचेंगी, जहा उसे जाना है। पर अब और तब के बीच का समय उसके लिए आनंद का समय बन चुका था। जो पत्ता नदी से लढ रहा था, उसके जीत का कोई उपाय नहीं था, और को पत्ता नदी के साथ बहता जा रहा था, उसकी हार का कोई उपाय नहीं था।

Life Changing Gautam Buddha Stories In Hindi | गौतम बुद्ध की कहानियाँ

दोस्तो यह कहानी हमे सिखाती हैं की जिस दिन हम लड़ना छोड़ देते है, उस दिन से हम जीना शुरू कर देते है। अब लड़ना छोड़ देने का अर्थ यह नहीं है की आप सपने ना देखे या उसके लिए मेहनत करना बंद करदे, बल्कि लड़ना छोड़ देने का अर्थ यह है की आप उन चीजों की बदलने की कोशिश ना करे, जो आपके हाथ में नही है। यही खुश रहने का मूल मंत्र है।

दूसरो को बदलने में अपना जीवन को बर्बाद ना करे, बल्कि खुद को बदलें।

रिलेटेड आर्टिकल

Conclusion of Gautam Buddha Story in Hindi

दोस्तों यह थी वो Top 10 Best Life Changing Gautam Buddha Stories In Hindi में आपको कैसे कैसी लगी? निचे कमेंट बॉक्स में कमेन्ट करके जरुर बताये, और साथ अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ इन सभी गौतम बुद्ध की कहानियों को अवश्य शेयर कीजिये. ताकि उन लोगो को भी गौतम बुद्ध की कहानियाँ हिंदी में पढने को मिल सके.

Gautam Buddha Stories in Hindi Pdf Free Download

दोस्तों अगर आप गौतम बुद्ध की कहानियाँ PDF Download करना चाहते है, तो निचे दिए गए डाउनलोड लिंक पर क्लिक कीजिये और आप Gautam Buddha Stories in Hindi Pdf Free Download कीजिये.

Gautam Buddha Stories in Hindi Pdf Free Download

दोस्तों आज के इस Top 10 Best Life Changing Gautam Buddha Stories In Hindi आर्टिकल में सिर्फ इतना ही दोस्तों फिर मिलेंगे ऐसे ही एक लाइफ चेंजिंग आर्टिकल के साथ, तब तक के लिए आप जहा भी रहिये खुश रहिये और खुशिया बाटते रहिये.

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए धन्यवाद…

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये.

Leave a Comment