जानिए आलस क्यों आता है और आलस को कैसे दूर करें?

जानिए आलस क्यों आता है और आलस को दूर कैसे करें?

नमस्कार दोस्तों, आप सभी का हमारे नॉलेज ग्रो मोटिवेशनल ब्लॉग पर स्वागत है। दोस्तो अगर आप जानना चाहते हैं की आलस क्यों आता है और आलस को कैसे दूर करें? तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हुए हैं।

दोस्तो अगर आप इस आर्टिकल को अंत तक ध्यान से पढ़ते हैं? तो में गरेंटी के साथ कह सकता हूं की आपका जीवन बदलना तय है। इसलिए इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़िए। तो बिना समय को गवाए चलिए जानते है की आलस क्यों आता है और आलस को दूर कैसे करें?

आलस क्यों आता है और आलस को दूर कैसे करें?
जानिए आलस क्यों आता है और आलस को दूर कैसे करें?

जानिए आलस क्यों आता है और आलस को दूर कैसे करें?

दोस्तो किसी ने बड़ी कमाल की बात कही है की 👇👇👇

“आलसी वही है जिसके जीवन में कोई बड़ा लक्ष्य नही है, जो जीवन को जीना नहीं काटना चाहता है”

दोस्तो एक छोटी सी कहानी जिसके द्वारा आप जानेंगे की कैसे आलस आपके जीवन में आप पर हावी होता जा रहा है और कैसे आप उसे अपने जीवन से बाहर निकाल सकते हैं। तो चलिए कहानी की शुरुआत करते हैं।

एक बार एक नौजवान लड़का एक महात्मा के पास आता है और उनसे पूछता है की मुझे आलस क्यों आता है? फिर वे महात्मा उस लड़के को उत्तर देते हुए कहते हैं की आलस आने के 2 कारण है।

जानिए शरीर में आलस्य के कारण क्या है?

पहला कारण यह है की जीवन में कोई बड़ा लक्ष्य ना होना और दूसरा कारण है की हमारा मन और शरीर कैसे काम करता है उसकी समझ ना होना। जिसके जीवन में कोई बड़ा लक्ष्य नहीं है, उसके जीवन से तो आलस जा ही नहीं सकता।

लेकिन जिसके जीवन में कोई लक्ष्य तो है लेकिन उसे अपने शरीर और मन की समझ नही है, वह भी आलस की चपेट में आ जाता है। हमारा मन बहुत ही बड़ा कलाकार हैं और यह हमे मूर्ख बनाने में ज्यादा समय नहीं लगाता है।

अगर तुम ध्यान करना चाहते हो, तो यह तुमसे कभी भी ध्यान करने के लिए मना नहीं करेगा, यह तुमसे कहेगा कि ध्यान करना ब्रह्म मुहूर्त में ज्यादा अच्छा होता है। अब ना तो तुम ब्रह्म मुहूर्त में उठ पाओगे और ना ही तुम ध्यान कर पाओगे।

ये तुम्हे धन कमाने के लिए कभी भी मना नहीं करेगा, लेकिन ये तुमसे कहेगा कि “धन ही सबकुछ थोड़ी ही होता है और ये कभी भी तुम्हारा विरोध नहीं करता, बल्की यह तुम्हे मूर्ख बनाता है।” और कमाल की बात यह है की “तुम मूर्ख बनते हो।”

फिर वह लड़का उन महात्मा से पूछता है की तो फिर इसका समाधान क्या है महात्मन? फिर वे महात्मा जी कहते हैं की “जो ये तुम्हारे साथ कर रहा है, वही तुम इसके (मन) साथ करो। यानी की तुम्हारा मन तुम्हे मूर्ख बना रहा है, तो तुम उसे मूर्ख बनाओ।

जब तुम्हारा मन तुम्हे कहेगा कि ‘कुछ देर सो जाता हूं, उसके बाद काम करूंगा’ तो तुम उसे कहो की ‘कुछ देर क्यों ज्यादा देर सोऊंगा लेकिन उससे पहले काम पूरा करूंगा।’

तुम्हारा मन तुमसे कहेगा ‘आज स्वादिष्ट भोजन खाऊंगा’ तो तुम तुरंत उससे कहो की स्वादिष्ट क्यू अति स्वादिष्ट खाऊंगा लेकिन उससे पहले 1 घंटे व्यायाम करूंगा।

फिर वह व्यक्ति उस महात्मा से पूछता है की लेकिन कब तक में अपने मन को मूर्ख बनाउ? फिर वे महात्मा जी उससे कहते हैं की जब तक तुम अपने आलस से मुक्त रहना चाहते हो, तब तक तुम्हे अपने मन को मूर्ख बनाते रहना है।

फिर वह व्यक्ति पूछता है की कभी कभी तो ऐसा होता है की मुझे अफसोस होता है की ‘में अपने जीवन में कुछ कर नही पा रहा हूं, क्योंकि मेरे भीतर से ही कुछ करने का मन ही नहीं करता।’ फिर ऐसी स्थिति में में क्या करू?

वे महात्मा जी कहते हैं की “मन को तो तुम मूर्ख बना सकते हो, लेकिन शरीर को तुम्हे समझना होंगा। हमारा शरीर चलता है भोजन से और अगर तुम मरा हुआ भोजन खाओगे, तो वह तुम्हे ऊर्जा कैसे देगा?

मरे हुए भोजन का अर्थ यह है की ऐसा भोजन जो व्यक्ति अपने सिर्फ स्वाद के लिए खाता है, जिससे शरीर का उचित विकास नही होता है। जैसे की मिठाईया, पिज्जा, बर्गर आदि.. इसीलिए भोजन ऐसा करो जो तुम्हारे भीतर ऊर्जा पैदा करें, ना की आलस। जैसे की फल और घर का साधा भोजन आदि…

फिर वह लड़का महात्मा से पूछता है की महात्मन में शुरुआत कैसे करू? महात्मा जी कहते हैं की शुरुआत करो एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित करने से यानी एक बड़ा लक्ष्य बनाओ। तुम्हारा लक्ष्य केवल कहने के लिए बड़ा नही होना चाहिए, बल्की उस लक्ष्य के साथ तुम्हारी भावनाए जुड़ी होनी चाहिए।

अगर तुम्हारा लक्ष्य ऐसा है जिसके बारे में सोचकर ही तुम्हारे आंखो में आंसु आ जाते हैं, तो तुम्हे कुछ और करने की जरुरत नहीं है। फिर तुम्हारा लक्ष्य ही तुमसे सबकुछ करवा देगा। और अगर लक्ष्य इतना बड़ा नही है या फिर तुम्हारी भावनाओं के साथ जुड़ा हुआ नही है, तो फिर अपने लक्ष्य को खोजना ही अपना लक्ष्य बनालो।

जिस प्रकार भगवान गौतम बुद्ध ने बनाया था। उन्हे पहले अपना लक्ष्य थोड़ी ही पता था की वहा मिल जायेगी मंजिल, वे तो सिर्फ निकल पड़े थे। आशा थी मन में, लेकिन वो भी टूटने लगी थी। लेकिन अंदर से प्यास इतनी गहरी थी की लक्ष्य को पाकर ही रही।

जब तक तुम्हे यह पता नही चलता की तुम्हारा लक्ष्य क्या है? तब तक तुम अपने मन को मूर्ख बनाते रहो, जैसे वो तुम्हे बना रहा था। कोई भी व्यक्ति शराबी बनना नही चाहता है, लेकिन उसका मन उसे मूर्ख बना बनाकर उसे एक शराबी बना देता है।

कोई भी व्यक्ति चोर बनना नही चाहता है लेकिन यह मन उसे बार बार मूर्ख बना बनाकर उसे एक चोर बना देता है। एक बात को तुम हमेशा याद रखना की “जब तक तुम बुद्धि से ऊपर उठकर बुद्ध नही हो जाते, तब तक तुम्हारे पास 2 विकल्प है।

या तो तुम अपने मन के द्वारा मूर्ख बनो या फिर तुम इसे मूर्ख बनाओं, बीच का कोई रास्ता नहीं है। अगर तुमने अपने मन को मूर्ख बनाना बंद कर दिया, तो यह मन तुम्हे मूर्ख बनाना शुरू कर देगा।

फिर वह नौजवान लड़का कहता है की यह तो आसान है, मन को मूर्ख बनाया जा सकता है। वे महात्मा मुस्कुराते हैं और कहते हैं की यह आसान भी तुम्हारे मन को ही लग रहा है। ये मन कब और कैसी चाल चलेगा, उसके लिए तुम्हे जागरूक रहना पड़ेगा।

अपनी जागरूकता को बढ़ाओ और जागरूक व्यक्तियों के साथ रहो या फिर अपने खुद के साथ समय बिताओ। अगर तुम आलसी व्यक्तियों के साथ रहोगे तो तुम भी आलसी होंगे और अगर तुम ऊर्जावान लोगों के साथ रहोगे तो तुम भी ऊर्जावान बनोगे।

फिर वह लड़का महात्मा जी से कहता है की मुझे अपने मन को मूर्ख बनाना अभी और इसी वक्त से शुरू कर देना चाहिए।  महात्मा कहते हैं की हाँ, सही कहा तुमने। सही समय की प्रतीक्षा करना भी इसी मन की एक चाल है, इसीलिए अभी और इसी वक्त से काम पर लग जाओ।

दोस्तो जो लोग अभी इस आर्टिकल को पढ़ रहे हैं, क्या आप भी सही समय का इंतजार कर रहे हैं? या फिर इसी समय को सही बनाने की ठान चुके है? यह हमे नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके हमे जरूर बताएं।

दोस्तो आज का यह आर्टिकल आपको कैसा लगा और इस आर्टिकल से आपको क्या सीखने को मिला यह हमे नीचे कमेंट करके जरूर बताएं। साथ ही अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया होंगा तो अपने दोस्तो के साथ इसे अवश्य शेयर कीजिए।

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2 thoughts on “जानिए आलस क्यों आता है और आलस को कैसे दूर करें?”

  1. Sab se pahle Thank you sir Aapka bahut sukriya sir
    Aap Hamlogo liye itni mehnat kar ke Article likhte ho sir hamlog Aap ki mehnat ko samaghte hai sir esiliye hamlogo ki taraf ek bar fir se Thank you,, Thank you,, Thank you,, so much,,❤️❤️❤️❤️
    Vaise Article bahut hi knowledgeablev tha sir kuch naya knowledge sikh ne ko mila
    Aor ye knowledge bahut hi powerfful tha Aap ko phir se ek bar Thank you sir Aap is tarah ke knowledge Hamlog ko hamesa sikhate rahiye aor Hamlog sikhte rahenge sir ,, sukriya sir,,❤️❤️❤️ by sir phir next article ya booksummary phir milte hai sir

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