जाने सफलता दिलाने वाले भगवान श्री कृष्ण के 10 उपदेश, आज से ही कर दे जीवन में अपनाना शुरू

जाने सफलता दिलाने वाले भगवान श्री कृष्ण के 10 उपदेश, आज से ही कर दे अपने जीवन में अपनाना शुरू

नमस्कार दोस्तों आप सभी का नॉलेज ग्रो मोटिवेशनल ब्लॉग पर स्वागत है। दोस्तो आज का यह आर्टिकल आप सभी के लिए बहुत ही इंट्रेस्टिंग और लाइफ चेंजिंग साबित होने वाला है, क्योंकि दोस्तो आज में आपके साथ भगवान श्री कृष्ण के 10 उपदेश शेयर करने वाला हू, जो आपको आपके जीवन में सफलता हासिल करने में बहुत मददगार साबित होंगे।

Top 10 Shri Krishna Updesh in Hindi | भगवान श्री कृष्ण के 10 उपदेश
Top 10 Shri Krishna Updesh in Hindi | भगवान श्री कृष्ण के 10 उपदेश

Top 10 Shri Krishna Updesh in Hindi | भगवान श्री कृष्ण के 10 उपदेश

दोस्तो मुझे अपने खाली समय में भगवान श्री कृष्ण के उपदेश सुनना और पढ़ना बहुत अच्छा लगता है, इसीलिए में हर रोज अपने खाली समय में श्री कृष्ण भगवान के उपदेश सुनता रहता हूं। और आज सुबह जब में श्री कृष्ण के उपदेश सुन रहा था, तब मैंने सोचा की क्यों न आज भगवान श्री कृष्ण के 10 उपदेश आपके साथ भी शेयर किया जाए।

ताकि आपको भी आपके जीवन में सफलता हासिल करने में मदद मिल सके। दोस्तो इस आर्टिकल में आपको बहुत कुछ सीखने को मिलने वाला है, इसीलिए इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़िए। तो बिना समय को गवाए चलिए जानते हैं – सफलता दिलाने वाले भगवान श्री कृष्ण के 10 उपदेश।

भगवान श्री कृष्ण का पहला उपदेश:

दोस्तो आपने कभी किसी पंछी को देखा है, जब उसे अंडी देने होते है तो वो सर्व प्रथम एक स्थान खोजता है, एक ऐसा स्थान जो वर्षा, धूप और शत्रुओ से सुरक्षित हो और फिर वो अपना घोंसला बनाकर फिर अंडी देता है।

और फिर उन अंडों से नन्ही संतानें निकल आती है, तो वो पंछी उन्हे भोजन देता है, उनकी सुरक्षा करता है। परंतु जब उनके पंख निकल आते हैं, तब ना ही उनको भोजन देती है और ना ही उनकी सुरक्षा करती है और ना ही उन्हें घोंसला बनाना सिखाती है, बस उन्हें उड़ने की कला सिखाती हैं।

फिर वे नन्ही संताने उड़ने की कला सीखकर स्वयम अपना भोजन लाना सीखती है और स्वयम अपना घोंसला बनाना सीखती है। और हम मनुष्य क्या करते हैं, अपनी संतान बड़े होने के पश्चात भी उनकी चिंता में सूखते है, और प्रयास करते हैं की उनके लिए घर बना सकें।

हम अपनी संतान को और भी शक्तिशाली बनाने के स्थान पर पंगु कर जाते हैं। दोस्तो हमे भी वही करना चाहिए जो एक पंछी करता है, यानी की अपनी संतान को उड़ने की कला सिखाईये यानी की अच्छे संस्कार दीजिए और एक समय के पश्चात उसे स्वयम अपना आकाश चुनने के लिए मुक्त कीजिए।

भगवान श्री कृष्ण का दूसरा उपदेश:

दोस्तो आप जानते है की अनगिनत प्रयासों के प्रश्छात एक चिटी अपने लिए एक छोटा सा घर बना पाती है, जो अन्य जीवों के लिए सरल सी बात है। लेकिन उस चिटी के लिए उसके जीवन की सबसे बड़ी घटना हैं और सबसे बड़ी सफलता भी है।

भविष्य में वो चिटी रहे या न रहे लेकिन उसके द्वारा बनाया हुआ घर बहुत सालों तक टिका रहता है। दोस्तो हमारे जीवन में सफलता के साथ भी वैसा ही होता है, आपको और हम सभी को एक दिन में ही सफलता नहीं मिलती है, लेकिन यदि आप प्रतिदिन बिना रुके प्रयास करते हैं , तो एक दिन आपको सफलता अवश्य मिलेगी।

दोस्तो आप ये स्मरण रखिएगा की भाग्य के द्वार उनके लिए नही खुलते जो हार मान लेते हैं, बल्की ये भाग्य उनका स्वागत करता है, जो उठकर उनके द्वार खटखटाने का प्रयास करते है। इसीलिए प्रयास करते रहिए तो सफलता आपके पास एक न एक दिन आएगी ही आएगी।

भगवान श्री कृष्ण का तीसरा उपदेश:

दोस्तो आपने घर के दरवाजो को लॉक करने के लिए लगाए हुए तालों को तो देखा ही होंगा। दोस्तो वो ताला प्रहार से भी खुलता है और प्यार से भी खुलता है, अर्थात उस ताले को आप एक चाबी से भी खोल सकते हो और एक हथौड़ी से भी खोल सकते हो, लेकिन दोनो तरीको में खुलने में अंतर होगा।

अगर आप उस ताले को प्रहार से खोलोगे तो वह ताला फिर से काम में नही आएगा। किंतु यदि आप उस ताले को उसकी चाबी से खोलोगे, तो वह ताला सदा काम आएगा। दोस्तो ठीक उसी प्रकार हमारे जीवन में संबंध भी कुछ इसी प्रकार होते है।

हमारे जीवन के आनंद रूपी धन की रक्षा करते हैं किंतु प्रेम से, यदि अगर क्रोध से किया जाए तो वे किसी काम के नही रह जाते हैं। इसीलिए उन्हें सदा प्रेम की चाबी से खोलिए न की क्रोध रूपी हथौड़ी से। क्योंकि हर बार आप नया ताला ला सकते हैं, लेकिन नए रिश्ते नही ला सकते है।

भगवान श्री कृष्ण का चौथा उपदेश:

जीवन “क्या है यह जीवन?” हम जन्म लेते हैं और बड़े होते है और हमारे मां बाप हमे पालते हैं। फिर उनके धन से हमारा बालपन बीतता है, फिर हम बड़े होते हैं और हम विवाह कर लेते है। फिर हमारी संताने होती है, हम उनको पालते हैं और फिर हम वृद्ध हो जाते हैं और एक दिन इस संसार से चले जाते हैं।

क्या यही जीवन है?

दोस्तो आपके और हम भी के जीवन में यह प्रश्न कई बार आता होंगा, है ना! अब में आपको एक जल के जीवन के बारे बताता हू। सागर से भाप बनकर उठता है, मेघ बनकर बरसता है और फिर नदी बनकर फिर से सागर में समावेश करता है।

किंतु कभी ये प्रश्न नही करता की उसका जीवन क्या है और उसका उद्देश्य क्या है? कैसे आइए जानते है। जल हर भाव जीता है और जितना बन सके देता जाता है। जब सागर में होता है तो असंख्य जन जीवो को जीवन देता है।

जब सागर से भाप बनकर मेघ बनता है तब किसानों को आशा देता है की फसल पुनः उपजेगी। जब वर्षा बनकर बरसता है तो इस सुखी और प्यासी धरा को सिचता है। और जब नदी में प्रवाहित होता है तो किनारों पर वनस्पतियों को जीवन देता है।

परंतु जरा ये सोचिए की क्या ये जल कभी ये सोचता होंगा की उसका जीवन क्या है? और उसके जीवन का उद्देश्य क्या है? नही, बस वो अपने धर्म का पालन करता है और जितना हो सके सबको आनंद देता जाता है। इसीलिए जीवन में कभी भी ये प्रश्न मत कीजिए गा की,

ये जीवन क्या है और इस जीवन का उद्देश्य क्या है? बस इस जीवन को अच्छे कर्म करते हुए जियो और जितना हो सके सबको को आनंद देते रहिए। फिर आपका मन प्रसन्न होकर बोलेगा की राधे राधे

भगवान श्री कृष्ण का पांचवा उपदेश:

दोस्तो कभी वर्षा के कारण बने कीचड़ से होकर आप कभी अपने घर गए है? तो आपको पता ही होंगा की पादुका पहनने के कारण उस कीचड़ से तो आप बच जाते हैं, किंतु उन पादुकावो द्वारा उड़ने वाली बूंदे आपके वस्त्रो को मैला कर ही देती हैं।

किंतु फिर भी उस बूंदों से आपके वस्त्र गंदे हो जायेंगे इस कारण से आप चप्पल पहनना तो नही छोड़ते हैं ना? ठीक इसी प्रकार जीवन में कुछ ऐसे लोग भी आते हैं पादुका के भांति, जो आपको कीचड़ से तो बचा लेते है लेकिन वस्त्र रूपी आपके मन पर शंका के दाग लगा ही जाते हैं।

इन लोगो के कारण से मन को खिन्न करने के आवश्यकता नही है, बल्की आवश्यक है यह सोचना की आपको आपके पाव कीचड़ से बचाने है या आपके वस्त्र। अर्थात हमे हमारे जीवन में गंभीर होना अच्छी बात है।

लेकिन अगर आप हर बात को गंभीरता से लोगे तो इस जीवन का आनंद समाप्त हो जायेगा। दोस्तो ये संसार अनित्य है यानी की यहा पर ऐसा कुछ भी नही है, जो सदा के लिए जीवित रहेगा।

इसीलिए दोस्तो श्री कृष्ण कहते हैं की जब तक ये जीवन है तब तक आप संतोष और आनन्द से जिए। स्वयम पर छिटकने वाले कीचड़ पर ध्यान न दें, बस आनंद बाटते रहिए। फिर मन 😊 प्रसन्न होकर बोलेगा की राधे राधे...

भगवान श्री कृष्ण का छटा उपदेश:

दोस्तो मनुष्य को जब सफलता मिलती है, तब उसमे जागता है: अहंकार और ऐसे में मनुष्य हमेशा एक बात भूल जाता है: “झुकना” और मनुष्य सोचता है की में क्यों किसी के समक्ष झुकू? और ऐसा इसीलिए हो जाता है क्योंकि मनुष्य एक बात भूल जाता है की ,

इस संसार में उसने जो कुछ भी प्राप्त किया हुआ है, वह सब झुककर ही प्राप्त किया हुआ है। बालपन में चलना सीखा तो इस धरा पर झुककर और गिरकर, बड़ों का आशीष लिया भी झुककर और उसके साथ ही किसान को फसल काटने के लिए भी झुकना पड़ता है।

और कुए से पानी निकालने के लिए भी पात्र को झुकना पड़ता है। भगवान से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष हमे झुकना पड़ता है। आंधियो में वृक्ष कैसे सुरुक्षित रहते हैं: झुककर और सम्मान कैसे पाया जाता है: झुककर

दोस्तो इसी के समक्ष झुकने का अर्थ खुद का आत्म सम्मान खो देना नही है, बल्कि उसका अर्थ होता है की विनंब्र। दोस्तो हम मनुष्य है और इस आकाश की उचाइयों तक पहुंचने के लिए हमे किसी पक्षी की भांति पंखों की जरूरत नहीं है। बल्की हम जितना झुकेंगे उतना ही हम ऊपर उठते चले जायेंगे।

भगवान श्री कृष्ण का सातवा उपदेश:

दोस्तो आप इस संसार में ऐसे कई लोग जानते होंगे , जिन्हे आप स्वार्थी मानते होंगे और आपकी आवश्यकता पड़ने पर ही आपका स्मरण करते हैं। अन्यथा वर्षो तक कही दिखाई नही पड़ते है। लेकिन उनको जैसे ही आपकी आवश्यकता पड़ती है , तो वे लोग हाथ जोड़कर आपके सामने सज्ज हो जाते हैं।

दोस्तो आपको उन लोगों का बड़ा क्रोध आता होगा ना और आपका मन खिन्न हो जाता होंगा। और फिर आपके मन से यह स्वर निकल जाता है की इस व्यक्ति की सहायता कभी न करना। किंतु आप ऐसा कभी भी न कीजिए।

अब आप यह सोच रहे होगे की क्यों कह रहा हूं में ऐसा ? क्योंकि भगवान श्री कृष्ण कहते हैं की स्मरण रखिएगा की दीपक का स्मरण व्यक्ति केवल तभी करता है जब अंधकार गहरा हो जाता है। इसलिए उस व्यक्ति को स्वार्थी मानकर खुद व्याकुल ना होइए।

बल्की स्वयम को दीपक मानकर आनंदित होइए और खुद को भाग्यवान समझिए, क्योंकि किसी को जरूरत पड़ने पर आपकी याद आती है। और आप इस संसार में किसी की सहायता करने के योग्य है। इस जीवन में किसे के स्वार्थी होने से स्वयम का दृष्टिकोण न बदले। बस ये दृष्टि रखिए स्वयम के परमार्थ पर फिर प्रसन्न 😊 होकर बोलेगा की राधे राधे।

भगवान श्री कृष्ण का आठवां उपदेश:

दोस्तो हमारा शरीर प्रक्रति की सर्वोत्तम रचना है और जो अंग और तत्व हमे मिले हुए हैं ना, उन सभी का अपना अपना एक संदेश है। क्या है वो संदेश जो हमे हमारे अंगो और तत्वों से मिलता है? जानने के लिए आर्टिकल के अंत तक बने रहिए।

दोस्तो हमे दो आंखे दिए हुए है देखने के लिए , दो कान दिए हुए है सुनने के लिए , दो नथुने दिए हुए थे सांस लेने के लिए , दो हाथ दिए हुए है दोहरा परिश्रम करने के लिए लेकिन जीभ केवल एक ही दी हुई है , उस पर भी नकुले बलिष्ट दांत दिए हुए है उसकी रक्षा के लिए।

दोस्तो आपने कभी सोचा है क्यों?

क्योंकि शब्द और शब्दो का उपयोग मनुष्य का सबसे बड़ा शस्त्र है, जिसका उपयोग जितना सोच समझ कर किया जाए, उतना ही मनुष्य अपने जीवन में ऊपर उठता है। इसीलिए दोस्तो देखो , सुनो, समझो अधिक लेकिन बोलो कम, फिर आपको सफल होने से कोई नहीं रोक पायेगा।

भगवान श्री कृष्ण का नौवा उपदेश:

दोस्तो इस संसार में सबसे अधिक शुद्ध माना जाता है गंगाजल को, कभी आपने सोचा है की क्यों? क्योंकि गंगाजल का आविर्भाव ही शुद्ध होता है और उसका जन्म शुद्ध होता है। जहा से उसका प्रारंभ होता है वो शुद्ध होता है, और प्रारंभ का शुद्ध होना अति आवश्यक है।

दोस्तो हमारे जीवन में प्रारंभ होता है हमारे विचारो से , इसीलिए हमेशा अपने विचार शुद्ध रखिए क्योंकि इन विचारो से बनते हैं आपके शब्द, आपके शब्द शुद्ध रखिए क्योंकि इन शब्दो से आपके कार्य संपन्न होते है। आपके कार्य शुद्ध रखिए क्योंकि आपके कार्य आपका स्वभाव बनाते हैं।

और स्वभाव से बनती हैं आपकी आदतें और आपकी आदतों से बनता है आपका चरित्र और ये चरित्र संसार के समक्ष आदर्श के रूप में आता है। लेकिन विचारों से आदर्श तक की ये यात्रा तभी शुभ होगी, जब आपके विचार शुभ और शुद्ध होंगे।

इसलिए इस जीवन में और संसार में अगर आपको सफल और कामयाब इंसान बनना चाहते हैं? तो आपने विचार शुद्ध रखिए , फिर आपका मन प्रसन्न होकर बोलेगा राधे राधे।

भगवान श्री कृष्ण का 10 उपदेश:

दोस्तो यदि में आपसे पुछु की दूध और माखन इन दोनों में संबंध क्या है? तो आप कहेंगे की ये तो सरल सी बात है, दूध से ही तो माखन बनता है। और यदि में आपसे पुछू की इन दोनों में अंतर क्या है?

तो कोई कहेगा की एक तरल है तो दूसरा ठोस, तो कोई कहेगा की एक जनक है तो दूसरी उसकी संतान है। नही, इन दोनों में अंतर है शुद्धता का क्योंकि माखन दूध से कही अधिक शुद्ध होता है।

दोस्तो इस बात को कुछ इस प्रकार समझा जा सकता है कि यदि कोई किट आकर उस पात्र में गिरे जिसमें दूध रखा हुआ है, तो आप उस समय क्या करते हैं? आप दूध को फैक देते हैं लेकिन यदि कोई कीट आकर उस पात्र में गिरे जिसमें माखन रखा हुआ है तो आप क्या करते हैं?

तो आप उस कीट को निकालकर फेंक देते हैं क्योंकि वो कीट मैला और दूषित है। ठीक उसी प्रकार यदि हमारा मन निर्मल ना हो तो कुविचार रुपी ये कीट आपके मन को भी दूषित कर देगा। लेकिन यदि हमारा मन माखन के भांति शुद्ध हुआ तो आपके मन में ठहरे हुए कुविचारो को स्वयम से ही मन से बाहर जाना होंगा।

इसीलिए हमेशा यह स्मरण रखिएगा की इस संसार में कीट तो रहेंगे ही , अब आपको दूध बनना है या माखन बनना है ये निर्णय आपका है।

Conclusion:

दोस्तो सफलता दिलाने वाले भगवान श्री कृष्ण के 10 उपदेश अगर आपको पसंद आए होंगे, और आपके लिए उपयोगी साबित हुए होंगे तो नीचे कमेंट बॉक्स में राधे राधे लिखना न भूले। उसके साथ ही अपने दोस्तो के साथ इस आर्टिकल को शेयर जरूर कीजिए।

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दोस्तो आज के इस Top 10 Shri Krishna Updesh in Hindi आर्टिकल में सिर्फ इतना ही, दोस्तो हम आपसे फिर मिलेंगे ऐसे ही एक इंट्रेस्टिंग और लाइफ चेंजिंग आर्टिकल के साथ तब तक के लिए आप जहा भी रहिए खुश रहिए और खुशियां बांटते रहिए।

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद 🙏🙏🙏

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